पश्चिम एशिया संकट का हल बातचीत से ही, यूएन चार्टर का पालन जरूरी: अर्जेंटीना के राजदूत कॉसिनो
नई दिल्ली, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत में अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो आगस्टिन कॉसिनो ने पश्चिम एशिया तनाव के समाधान का रास्ता शांति वार्ता के जरिए बताया। इसके साथ ही पहलगाम हमले की बरसी पर पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनका देश इस मुद्दे पर भारत के साथ है।
बुधवार को आईएएनएस से बात करते हुए पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की और भारत के अपने नागरिकों तथा क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के अधिकार का समर्थन किया।
हमले की पहली बरसी पर कॉसिनो ने कहा कि यह दिन उन लोगों को याद करने और उनके परिवारों व प्रियजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करने का है, जिन्होंने इस आतंकी हमले में अपनों को खोया।
उन्होंने कहा, “हम इस दिन को स्मरण करना चाहते हैं, विशेष रूप से उन लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए जो इस हमले में मारे गए, उनके परिवारों और प्रियजनों के साथ खड़े होने के लिए, और आतंकवाद तथा उसके हर रूप की पूरी तरह निंदा करने के लिए।”
राजदूत ने कहा कि अर्जेंटीना आतंकवाद के खतरे को समझता है और इस मुद्दे पर भारत के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा, “हम भारत सरकार का समर्थन करते हैं और जानते हैं कि आतंकवाद क्या होता है।”
वैश्विक परिदृश्य पर बात करते हुए कॉसिनो ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव समेत मध्य-पूर्व की जटिल परिस्थितियों का उल्लेख किया और उम्मीद जताई कि शांति वार्ताओं के जरिए समाधान निकलेगा।
उन्होंने कहा, “हर कोई चाहता है कि यह संघर्ष समाप्त हो। हमें उम्मीद है कि शांति प्रयास जारी हैं और वे दुनिया तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाएंगे।”
महाशक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा (खासकर अमेरिका और चीन के संदर्भ में) पर राजदूत ने कहा कि सभी देशों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के तहत मिलकर काम करना चाहिए ताकि वैश्विक शांति और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि तेल अभी भी वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण कारक बना हुआ है, हालांकि कई देश ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने भारत की इस रणनीति को “सही दिशा में कदम” बताया और कहा कि अर्जेंटीना भविष्य में भारत के लिए खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा में भी अहम भागीदार बन सकता है।
अंत में, भारत-अर्जेंटीना संबंधों पर उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने के प्रयास जारी हैं और निकट भविष्य में उच्च स्तरीय बैठकों के फिर से शुरू होने की उम्मीद है।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
गोल ही क्यों होते हैं प्लैनेट, चौकोर या पिरामिड क्यों नहीं? जानें कैसे काम करती है ग्रैविटी
नई दिल्ली, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। आपने कभी सोचा है कि हमारी पृथ्वी के साथ ही स्पेस में मौजूद सभी ग्रह गोल ही क्यों होते हैं? वे क्यूब, पिरामिड या किसी अन्य आकार के क्यों नहीं होते? इसका सीधा संबंध गुरुत्वाकर्षण से है, जो ब्रह्मांड में हर वस्तु के आकार और संरचना को तय करने में अहम भूमिका निभाता है।
गुरुत्वाकर्षण हर ग्रह को सभी तरफ से बराबर खींचता है, जिसकी वजह से उनका आकार गेंद जैसा गोल हो जाता है। सौर मंडल के सभी ग्रह अलग-अलग आकार और आकृति के हैं। कुछ छोटे चट्टानी हैं तो कुछ विशाल गैसीय। लेकिन एक बात सभी में समान है, वे सभी गोल हैं। फिर चाहे वे छोटे हों या बड़े।
गुरुत्वाकर्षण ही वह शक्ति है जो ग्रहों को क्यूब, पिरामिड या किसी अन्य आकार में नहीं, बल्कि गोल बनाने पर मजबूर करती है। बिना गुरुत्वाकर्षण के ब्रह्मांड में कोई भी बड़ा पिंड गोल नहीं हो पाता।
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा इस बारे में विस्तार से जानकारी देता है, जिसके अनुसार, स्पेस में धूल, गैस और छोटे-छोटे पत्थर आपस में टकराते रहते हैं। धीरे-धीरे ये टुकड़े एक साथ जुड़ते जाते हैं। जब इनमें काफी मात्रा में पदार्थ इकट्ठा हो जाता है, तो उनमें अपना खुद का गुरुत्वाकर्षण पैदा हो जाता है। यह गुरुत्वाकर्षण इतना मजबूत हो जाता है कि वह आसपास के सभी छोटे टुकड़ों को अपनी ओर खींच लेता है। जब ग्रह पर्याप्त बड़ा हो जाता है, तो वह अपने रास्ते में आने वाले सभी कणों को साफ कर लेता है।
गुरुत्वाकर्षण ग्रह के केंद्र से हर दिशा में बराबर खींचता है। ठीक उसी तरह जैसे साइकिल के पहिये की तीलियां केंद्र से किनारों को खींचती हैं। इस बराबर खिंचाव की वजह से ग्रह का आकार तीन आयामी गोले जैसा हो जाता है। अगर कोई हिस्सा बाहर निकला हुआ होता है, तो गुरुत्वाकर्षण उसे अंदर की ओर खींच लेता है। इसी प्रक्रिया से ग्रह गोलाकार बनते हैं।
खास बात है कि सभी ग्रह पूरी तरह गोल नहीं होते हैं। ज्यादातर ग्रह काफी हद तक गोल होते हैं, लेकिन कुछ में थोड़ा अंतर होता है। बुध और शुक्र सबसे ज्यादा गोल हैं, लगभग कंचे जैसी पूर्ण गोलाकारता रखते हैं। बृहस्पति और शनि जैसे विशाल गैसीय ग्रहों में थोड़ा अंतर दिखता है। ये अपनी धुरी पर बहुत तेजी से घूमते हैं। घूमने की वजह से इनकी भूमध्य रेखा के पास का हिस्सा थोड़ा बाहर की ओर उभर आता है। इसे ‘इक्वेटोरियल बल्ज’ या भूमध्यरेखीय उभार कहते हैं। जब कोई चीज तेज घूमती है, तो उसके बाहरी हिस्से को ज्यादा तेजी से चलना पड़ता है। गुरुत्वाकर्षण इसे अंदर खींचता रहता है, लेकिन घूमने का बल इसे बाहर की ओर धकेलता है। शनि सबसे ज्यादा उभरा हुआ है, उसकी भूमध्य रेखा ध्रुवों से 10.7 प्रतिशत ज्यादा चौड़ी है।
वहीं, बृहस्पति में यह 6.9 प्रतिशत है। ये बास्केटबॉल की तरह थोड़े चपटे दिखते हैं। पृथ्वी और मंगल छोटे हैं और धीरे घूमते हैं, इसलिए इनमें उभार बहुत कम है। पृथ्वी में भूमध्य रेखा सिर्फ 0.3 प्रतिशत ज्यादा चौड़ी है, जबकि मंगल में 0.6 प्रतिशत है। यूरेनस 2.3 प्रतिशत और नेपच्यून 1.7 प्रतिशत इनके बीच की स्थिति में हैं।
--आईएएनएस
एमटी/पीएम
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