नालंदा में एक कमरे से मिला मां-बेटी का शव, पति को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही पुलिस
बिहार शरीफ, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। बिहार के नालंदा जिले के खुदागंज थाना क्षेत्र के एक घर के कमरे से पुलिस ने मां और बेटी का शव संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद किया है। इस मामले में पुलिस ने मृतक महिला के पति को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
Ganga Saptami 2026: गंगा सप्तमी पर पढ़ें मां गंगा के धरती पर अवतरित होने की कहानी, पढ़े रोचक कथा
Ganga Saptami 2026: सनातन धर्म में गंगा मां को पवित्र माना गया है. हर साल गंगा सप्तमी मनाई जाती है. साल 2026 में गंगा सप्तमी का पर्व वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जा रही है. सप्तमी तिथि 23 अप्रैल, गुरुवार को है. बता दें कि गंगा सप्तमी के दिन माता गंगा भगवान विष्णु के चरणों से निकलकर स्वर्ग में प्रकट हुई थी. इसके बाद गंगा दशहरा पर वह धरती पर उतरी थी. गंगा सप्तमी पर गंगा स्नान, पूजा, दान और व्रत करने का विशेष महत्व होता है. अगर आप गंगा सप्तमी का व्रत रख रहे हैं तो इस कथा का पाठ जरूर करें.
गंगा सप्तमी व्रत कथा (Ganga Saptami Vrat Katha)
पौराणिक काल में भागीरथ नामक एक पराक्रमी राजा हुआ करता था. महर्षि कपिल की क्रोध की ज्वाला में जलकर भस्म हो गए थे और उन्हें कभी भी मुक्ति नहीं मिल पाई. उनके पूर्वजों को गंगा के जल से ही मुक्ति मिल सकती थी, जिसके लिए देवी गंगा को धरती पर लाना जरूरी था.
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राजा भागीरथ की कठोर तपस्या
पौराणिक कथा के अनुसार, देवी गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए राजा भागीरथ ने कठोर तपस्या की थी, जिसे देखकर मां गंगा प्रसन्न हुईं थी और उनसे वरदान मांगने के लिए कहा. राजा ने मां से धरती पर आने का आग्रह किया, जिससे उनके पूर्वजों की आत्मा को शांति मिल पाए. मां गंगा धरती पर आने के लिए मान गईं. लेकिन उन्होंने भागीरथ को बताया कि अगर वह स्वर्ग से सीधा पृथ्वी पर आएंगी तो पृथ्वी उनके वेग और गति को सहन नहीं कर पाएगी.
भागीरथ ने की भोलेनाथ की भक्ति
इस समस्या के समाधान के लिए देवी गंगा ने भागीरथ को भगवान शिव की आराधना करने के लिए कहा. भागीरथ शिव भक्ति में पूरी तरह लीन हो गए और इससे प्रसन्न होकर स्वयं महादेव ने उन्हें दर्शन दिए. जब शिव जी ने उन्हें वरदान मांगने के लिए कहा तो उन्होंने अपनी समस्या के बारे में बताया.
महादेव ने अपनी जटाओं में किया गंगा को कैद
भागीरथ की समस्या सुनकर महादेव ने इसका समाधान निकाला और गंगा जी को अपनी जटाओं में कैद कर लिया. फिर जटा से एक लट को खोल दिया जिससे देवी गंगा सात धाराओं में पृथ्वी पर प्रवाहित हुईं. इस प्रकार भागीरथ मां गंगा को धरती पर लाने में और अपने पूर्वजों को मुक्ति दिलाने में सफल रहे.
गंगा सप्तमी पर स्नान-दान का महत्व
गंगा सप्तमी पर गंगा स्नान करने का विशेष महत्व होता है. इस दिन पापों से मुक्ति के लिए गंगा नदी में डुबकी के साथ-साथ तर्पण करना चाहिए. गंगा नदी में सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए. गंगा सप्तमी पर दान करना चाहिए.
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