भारत की अलग-अलग राज्यों में सरकारें अपने नागरिकों के हित में कई लाभकारी और कल्याणकारी योजनाएं चलाती हैं। दक्षिण भारत के राज्य तमिलनाडु में भी तमिलनाडु सरकार द्वारा राज्य के नागरिकों के लिए विवाह योजना शुरू की गई है। कई ऐसे अभिभावक होते हैं, जो अपनी बेटी की शादी का खर्चा उठाने में सक्षम नहीं होते हैं। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा विवाह योजना शुरू की गई हैं। इस योजना का नाम डॉ. मुथुलक्ष्मी रेड्डी निनाईवु अंतरजातीय विवाह योजना है। तो आइए जानते हैं इस योजना के बारे में और इस योजना के लिए मिलने वाले लाभ के बारे में...
डॉ. मुथुलक्ष्मी रेड्डी निनाईवु अंतरजातीय विवाह योजना
राज्य में अंतरजातीय विवाह करने वाले कपल को आर्थिक सहायता देने कि लिए डॉ. मुथुलक्ष्मी रेड्डी निनाईवु अंतरजातीय विवाह सहायता योजना शुरू हुई है। इस योजना को शुरू करने के उद्देश्य अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहन देना है। वहीं समाज में जाति और समुदायों के बीच चलने वाले भेदभाव को कम करना है। इस योजना के जरिए सरकार जोड़ों को आर्थिक सहायता दी जाती है। योजना में लाभ लेने के लिए कुछ पात्रताएं भी तय की गई हैं, जोकि पूरी करना जरूरी होता है।
इस योजना का लाभ लेने के लिए लड़की का कम से कम 10वीं पास होना जरूरी है। वहीं अगर कोई लड़की डिप्लोमा धारी है या फिर स्नातक कर चुका है। जो उसको योजना में ज्यादा राशि मिलेगी। वहीं 10वीं पास को 25,000 रुपए की मदद दी जाती है। वहीं डिप्लोमा या स्नातक करने वाली लड़कियों को 50,000 रुपए की मदद दी जाती है। इसके साथ ही 8 ग्राम सोना दिया जाता है। इस योजना के लिए शादी की डेट से 40 दिन पहले आवेदन करना होता है। वहीं जरूरी डॉक्यूमेंट्स के साथ नजदीकी जन सेवा केंद्र जाकर योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं।
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तमिलनाडु की स्टालिन सरकार द्वारा महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता की योजना शुरू की गई है। इस योजना के जरिए परिवार की महिला मुखिया को हर महीने एक हजार रुपए दिए जाएंगे। बता दें कि इस योजना का नाम 'कलैग्नार मगलिर उरीमई थोगई थिट्टम' है। इस योजना के माध्यम से करीब 1 करोड़ महिलाओं को फायदा मिलेगा। इस योजना को लॉन्च करते हुए सीएम स्टालिन ने कहा कि महिलाओं की भूमिका को हमेशा कम समझा जाता है। महिलाओं के अधिकारों को नजरअंदाज किया जाता है। ऐसे में यह योजना महिलाओं को सशक्त करने में मदद करेगी।
योजना की जानकारी
इस योजना के तहत आवेदन करने वाले परिवार की सालाना आय 2.5 लाख से कम होना चाहिए। इस योजना का लाभ लेने वाले परिवार को प्रति साल 3600 यूनिट से अधिक बिजली खर्च न हो।
वहीं योजना का लाभ लेने वाली महिला की उम्र 21 साल होना जरूरी है। 15 सितंबर 2002 से पहले जन्मी महिलाएं इस योजना का लाभ ले सकती हैं।
इस योजना के लिए फैमिली कार्ड रजिस्ट्रेशन जरूरी है। जिनका फैमिली कार्ड बना है, वह इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। वहीं एक कार्ड पर एक ही लाभार्थी को भुगतान किया जाएगा।
परिवार की महिला मुखिया को इस योजना के तहत 1 हजार रुपए मिलेंगे। जिस महिला का नाम परिवार की मुखिया के रूप में दर्ज होगा, उसके खाते में हर महीने 1 हजार रुपए का भुगतान होगा। वहीं अगर फैमिली कार्ड पर पुरुष का नाम मुखिया के रूप में है, तो पत्नी को लाभार्थी बनाया जाएगा।
अगर किसी फैमिली कार्ड में परिवार के मुखिया की पत्नी का नहीं है, तो किसी दूसरी महिला को लाभार्थी बनाया जा सकता है। हालांकि उसकी उम्र 21 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
परिवार में कोई विधवा, अविवाहित या फिर ट्रांसजेंडर मुखिया है, तो उनको भी इस योजना का लाभ मिलेगा।
सीएम स्टालिन ने कहा था कि यह कलैग्नार का जन्म शताब्दी वर्ष है। जिस कारण इस योजना का नाम उनके नाम पर रखा गया है।
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