अमेरिका-भारत के रिश्ते "थोड़े अस्थिर", फिर भी साझेदारी अनिवार्य: मैकमास्टर
वाशिंगटन, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एचआर मैकमास्टर ने भारत-अमेरिका संबंधों को “कुछ हद तक तनावपूर्ण” बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि वैश्विक चुनौतियों, खासकर चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच दोनों एक-दूसरे के लिए अनिवार्य साझेदार बने हुए हैं।
आईएएनएस से एक विशेष साक्षात्कार में मैकमास्टर ने कहा, “रिश्ते थोड़े ‘रॉकी’ (थोड़े अस्थिर या तनावपूर्ण) रहे हैं, और मेरी राय में ऐसा होना जरूरी नहीं था।” उन्होंने बताया कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दौरान कुछ मतभेद उभरे, जिनमें कूटनीतिक श्रेय और व्यापार से जुड़े मुद्दे प्रमुख थे।
उन्होंने कहा कि ट्रंप को यह महसूस हुआ कि भारत-पाकिस्तान तनाव कम कराने में उनकी भूमिका को पर्याप्त मान्यता नहीं मिली।
मैकमास्टर के अनुसार, व्यापार विवाद लंबे समय से दोनों देशों के बीच एक “पेचीदा” मुद्दा रहा है, हालांकि उन्होंने विश्वास जताया कि इन पर सहयोग के जरिए समाधान निकाला जा सकता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत के रुख को लेकर भी वाशिंगटन में निराशा रही। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के साथ वोट न करने के फैसले ने कुछ सवाल खड़े किए। हालांकि, उन्होंने इसे भारत की रणनीतिक चिंताओं से जोड़ा, खासकर अफगानिस्तान से अमेरिकी वापसी के बाद भरोसे में आई कमी से।
मैकमास्टर ने कहा कि भारत की नीति अक्सर “उलझाव के डर और समर्थन न मिलने के डर” के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस स्थिति में अमेरिका को भारत को मजबूत भरोसा देना चाहिए।
उन्होंने भारत की रूसी सैन्य उपकरणों पर निर्भरता को भी चिंता का विषय बताया। उनके मुताबिक, इससे उन्नत अमेरिकी रक्षा तकनीक साझा करने में हिचकिचाहट रहती है। उन्होंने यूक्रेन युद्ध का हवाला देते हुए रूसी हथियारों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए।
चीन के संदर्भ में उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत एक-दूसरे के लिए समाधान का हिस्सा हैं। उन्होंने हिमालयी सीमा पर चीन की गतिविधियों और आर्थिक दबाव का जिक्र करते हुए इसे साझा चुनौती बताया।
मैकमास्टर ने यह भी कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूती में भारतीय प्रवासी समुदाय और सांस्कृतिक संबंधों की अहम भूमिका है।
उन्होंने भरोसा जताया कि मौजूदा मतभेदों के बावजूद दोनों देशों के रिश्ते दीर्घकाल में मजबूत ही होंगे और भारत-अमेरिका “स्वाभाविक साझेदार” बने रहेंगे।
--आईएएनएस
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Iran के पास चंद घंटों का समय, Donald Trump की चेतावनी- 'समझौता करें या बमबारी के लिए तैयार रहें'
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि बुधवार सुबह तक ईरान किसी ठोस समझौते पर सहमत नहीं होता है, तो अमेरिका फिर से सैन्य हमले शुरू कर देगा। ट्रंप का यह बयान दो सप्ताह के युद्धविराम की समाप्ति से ठीक पहले आया है। सीएनबीसी के ‘‘स्क्वॉक बॉक्स’’ कार्यक्रम में यह पूछे जाने पर कि क्या वह ईरान के साथ युद्धविराम की अवधि बढ़ाएंगे ताकि शांति वार्ता के माध्यम से युद्ध समाप्त करने के लिए कोई समझौता हो सके, ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं ऐसा नहीं करना चाहता।’’
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उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें बातचीत करनी है। और, आप जानते हैं कि एक चीज कहना चाहूंगा...ईरान अपनी स्थिति को काफी मजबूत कर सकता है। अगर वे समझौता कर लेते हैं, तो वे फिर से एक मजबूत राष्ट्र, एक शानदार राष्ट्र बन सकते हैं।’’ ट्रंप ने कहा कि अगर बुधवार को बिना किसी समझौते के युद्धविराम समाप्त हो जाता है, तो वह ईरान पर फिर से हमला शुरू करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं बमबारी करने की उम्मीद कर रहा हूं क्योंकि मुझे लगता है कि यही बेहतर रुख है।’’
राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें लगता है कि अमेरिका हफ्तों से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए ईरान के साथ एक शानदार समझौता करेगा। ईरान के साथ शांति वार्ता के दूसरे दौर से अपनी अपेक्षाओं के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि उनके पास कोई विकल्प नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने उनकी नौसेना को नष्ट कर दिया है, हमने उनकी वायु सेना को नष्ट कर दिया है, हमने उनके नेताओं को हटा दिया है।’’ ट्रंप ने कहा, ‘‘हमने उनके नेताओं को हटा दिया है, जिससे एक तरह से मामला थोड़ा जटिल हो जाता है, लेकिन ये नेता कहीं अधिक तर्कवादी हैं।’’
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उन्होंने कहा, ‘‘यह सत्ता परिवर्तन है, चाहे आप इसे कुछ भी कहें, जो मैंने करने का वादा नहीं किया था, लेकिन मैंने इसे अप्रत्यक्ष रूप से कर दिया है।’’ पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्ला तरार ने मंगलवार शाम कहा कि उनका देश अमेरिका के साथ वार्ता के दूसरे दौर में ईरान की भागीदारी के संबंध में अब भी औपचारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि युद्धविराम बुधवार तड़के चार बजकर 50 मिनट पर समाप्त हो रहा है।
तरार ने कहा, “दो सप्ताह के युद्धविराम की समाप्ति से पहले वार्ता में भाग लेने का ईरान का निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण है।” ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम ने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से बताया कि शांति वार्ता में भागीदारी के संबंध में अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। अमेरिका और ईरान के बीच 11 और 12 अप्रैल को हुई पहले की दौर की वार्ता बेनतीजा समाप्त हो गई, वहीं दूसरे दौर को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
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