पहलगाम : जब ‘जन्नत’ के आंचल पर नफरत की इबारत लिखी गई, एक साल बाद भी सवालों और पीड़ा से घिरा 'मानवतावाद'
एक पत्रकार के तौर पर मैंने कई मोर्चे देखे, कई घटनाओं को परखा है, लेकिन पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को जो कुछ हुआ था, उसे विस्मृत कर पाना शायद इस जीवन में संभव नहीं. उस वीभत्स घटना ने ‘मानवतावाद’ के प्रति मेरे दृष्टिकोण पर गहरा आघात किया. एक साल बाद आज पहलगाम की शीतल हवाओं में चिनार की पत्तों की सरसराहट नहीं, बल्कि चीखों की गूंज है जो जेहन में जीवित है (शायद ताउम्र रहे). पहलगाम की लिद्दर नदी का पानी आज भी उतना ही साफ है, लेकिन उसमें घुली हुई खून की सुर्खी यह गवाही दे रही है कि इंसानों ने ही ऐसा कृत्य किया जिससे इंसानियत हार गई, मर गई और मानवतावाद की चिता जला दी गई. एक संवेदनशील व्यक्ति के रूप में, मैं इस घटना को केवल ‘आतंक’ के चश्मे से नहीं देख पा रहा हूं, यहां मानवतावाद का पूरा ढांचा ही बदलता प्रतीत हो रहा है.
Pahalgam Attack Anniversary Live: 'हम उन्हें याद करते हैं...' पहलगाम की पहली बरसी पर भारत के साथ खड़ा इजरायल
Pahalgam Attack Anniversary Live: पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर देश एक बार फिर शोक, संकल्प और सख्त संदेश के साथ खड़ा नजर आया. 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत पर्यटन स्थल पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए उस दर्दनाक हमले को आज एक साल पूरा हो गया, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भावुक संदेश जारी कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और साफ कहा कि भारत आतंकवाद के आगे कभी नहीं झुकेगा.
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