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क्या बांग्लादेश में लोकतंत्र हो रहा है कमजोर? अवामी लीग पर बैन को लेकर छ‍िड़ी बहस

ढाका, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। बांग्लादेश की संसद में पास किए गए एंटी-टेररिज्म (अमेंडमेंट) बिल के जरिए अवामी लीग पार्टी पर लगाया गया बैन सिर्फ पार्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके समर्थकों को भी किनारे कर रहा है। इससे राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है और लोगों का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा भी कमजोर हो सकता है।

द डिप्लोमैट की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर राजनीतिक पार्टियों पर बैन लगाने का चलन आम हो गया, तो भविष्य में किसी भी पार्टी के साथ ऐसा हो सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सरकार का आवामी लीग पर बैन बढ़ाना कोई हैरानी की बात नहीं है, क्योंकि दोनों पार्टियों के बीच लंबे समय से गहरी दुश्मनी रही है। लेकिन इस फैसले ने लोगों के बीच सवाल खड़े कर दिए हैं,क्या यह फैसला सही वजहों से लिया गया है और क्या ऐसे कानून सब पर बराबरी से लागू होते हैं?

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने भी राजनीतिक दबाव के चलते आवामी लीग और उससे जुड़ी संस्थाओं पर बैन लगाया। इस फैसले को लेकर देश और विदेश दोनों जगह चर्चा हो रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी राजनीतिक पार्टियों पर बैन लगाने के खिलाफ सलाह दी है, क्योंकि यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ माना जाता है।

रिपोर्ट में एक अहम सवाल उठाया गया क‍ि क्या कानून सबके लिए बराबर है? अगर किसी पार्टी को पुराने हिंसा या मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों के आधार पर बैन किया जाता है, तो फिर दूसरी पार्टियों पर, जिन पर ऐसे ही या उससे भी गंभीर आरोप हैं, वही कार्रवाई क्यों नहीं होती?

इस बहस के केंद्र में बांग्लादेश की सबसे बड़ी इस्लामिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी है। 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान इस पार्टी की भूमिका लंबे समय से विवाद का विषय रही। खासतौर पर पाकिस्तानी सेना के साथ सहयोग।

रिपोर्ट के अनुसार, जमात पर आरोप है कि उसने युद्ध के दौरान हुए 30 लाख लोगों के नरसंहार में साथ दिया था। यहां तक कि मौजूदा संसद के पहले सत्र में भी इस पार्टी को उस समय के नरसंहार में पाकिस्तानी सेना का सहयोगी बताया गया था। फिर भी बीएनपी सरकार इस पार्टी पर बैन लगाने पर विचार नहीं कर रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह की चुनिंदा कार्रवाई को लेकर चिंता बढ़ रही है। यह सिर्फ राजनीति का मामला नहीं है, बल्कि न्याय और कानून के बराबरी से लागू होने का सवाल भी है।

अगर किसी पार्टी को पुराने आरोपों के बावजूद चुनाव लड़ने और संसद में जगह बनाने की अनुमति मिलती है, तो फिर दूसरी पार्टी पर सख्त कार्रवाई करना लोगों के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा करता है, क्या यह सच में न्यायसंगत है?

--आईएएनएस

एवाई/डीकेपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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चीन ने नाभिकीय अप्रसार संधि का पालन करने पर राष्ट्रीय रिपोर्ट जारी की

बीजिंग, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। वर्तमान में सदी का परिवर्तन तेजी से हो रहा है और वैश्विक रणनीतिक सुरक्षा ढांचे में गहन समायोजन हो रहा है। शीतयुद्ध की विचारधारा और प्रभुत्ववाद व बदमाशी फिर से उभर रही है। इससे क्षेत्रीय मुठभेड़ और शस्त्रीकरण स्पर्द्धा बिगड़ रही है और अंतर्राष्ट्रीय शस्त्र नियंत्रण व अप्रसार प्रणाली पर बुरा असर पड़ा है।

वैश्विक रणनीतिक स्थिरता के सामने गंभीर खतरा मौजूद है। कुछ देशों ने पूर्ण रणनीतिक लाभ की तलाश करने के लिए गुटीय संघर्ष भड़काया, हर मोड़ पर बल का प्रयोग किया और बड़े पैमाने पर गठबंधन से हटे व समझौतों का उल्लंघन किया। यह अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को कमजोर करने और दुनिया में उथल-पुथल मचाने का सबसे बड़ा कारण बना।

चीन शांतिपूर्ण विकास के रास्ते पर हमेशा कायम रहता है, मानव जाति के साझा मूल्य को बनाए रखता है, सक्रियता से मानव जाति साझे भविष्य वाले समुदाय का निर्माण बढ़ाता है और वैश्विक विकास पहल, वैश्विक सुरक्षा पहल, वैश्विक सभ्यता पहल व वैश्विक शासन पहल का कार्यान्वयन करता है। चीन विश्व शांति व सुरक्षा की गारंटी करता है और वैश्विक रणनीतिक संतुलन व स्थिरता को बढ़ावा देता है। चीन सक्रियता से वैश्विक सुरक्षा शासन में सुधार बढ़ाता है और अंतर्राष्ट्रीय हथियार नियंत्रण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण रचनात्मक बल है।

चीन निष्पक्ष, सहकारी, संतुलित और प्रभावी हथियार नियंत्रण की विचारधारा पर कायम रहता है और गहन रूप से हथियार नियंत्रण के संदर्भ में वैश्विक शासन में भाग लेता है। चीन लगातार वैश्विक हथियार नियंत्रण कार्य में योगदान देता रहेगा। इसके लिए चीनी विदेश मंत्रालय ने 20 अप्रैल को नाभिकीय अप्रसार संधि का पालन करने पर राष्ट्रीय रिपोर्ट जारी की।

इसमें परमाणु निरस्त्रीकरण से संबंधित राष्ट्रीय उपाय, परमाणु अप्रसार से संबंधित राष्ट्रीय उपाय और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग से संबंधित राष्ट्रीय उपाय का वितरण किया गया।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

--आईएएनएस

एबीएम/

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