गुजरात: दाहोद में शादी समारोह में फूड पॉइजनिंग के बाद 184 लोग हॉस्पिटल से डिस्चार्ज
दाहोद, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। दाहोद में एक शादी समारोह से जुड़ी सामूहिक बीमारी के बाद गुजरात सरकार ने जिला अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इस बीमारी से सैकड़ों लोग प्रभावित हुए हैं और मंगलवार तक 34 लोग अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पंशेरिया ने बताया कि यह घटना सोमवार शाम को एक निजी समारोह में हुई और पुष्टि की कि प्रभावित लोगों का इलाज सरकारी अस्पतालों में चल रहा है।
उन्होंने आईएएनएस को बताया कि यह घटना कल शाम एक निजी समारोह में हुई। प्रभावित मरीजों का इलाज सिविल अस्पताल में चल रहा है। मैंने जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट एक-दो दिनों में जमा कर दी जाएगी।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि अब तक 184 लोगों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि हल्के लक्षणों वाले अन्य लोगों का इलाज स्थानीय अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में किया गया।
घटना का विवरण देते हुए दाहोद के जाइडस अस्पताल के रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर डॉ. राजीव दामोर ने बताया कि शादी समारोह में लगभग 200 मेहमान शामिल हुए थे।
उन्होंने कहा कि कल शाम दाहोद में एक शादी समारोह था, जिसमें लगभग 200 लोग शामिल हुए थे। पेट दर्द, दस्त और उल्टी से गंभीर रूप से प्रभावित लोगों को जाइडस अस्पताल रेफर कर दिया गया।
डॉक्टरों ने बताया कि कार्यक्रम में भोजन करने के तुरंत बाद मरीजों ने पेट दर्द, दस्त और उल्टी जैसे लक्षण बताना शुरू कर दिया, जिसके चलते बड़े पैमाने पर चिकित्सा सहायता शुरू की गई।
मामलों की संख्या बढ़ने पर कई लोगों को एम्बुलेंस और निजी वाहनों से अस्पतालों में ले जाया गया।
दाहोद के महामारी अधिकारी डॉ. नयन जोशी ने पुष्टि की कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) जांच में शामिल हो गया है।
उन्होंने कहा कि एफएसएसएआई के अधिकारी फिलहाल घटनास्थल पर मौजूद हैं और राज्य अधिकारियों को नमूने एकत्र करने में सहायता कर रहे हैं। जांच के नतीजे जल्द ही साझा किए जाएंगे।
अधिकारियों ने संदिग्ध खाद्य विषाक्तता के कारण का पता लगाने के लिए शादी स्थल से खाद्य पदार्थों के नमूने प्रयोगशाला विश्लेषण के लिए एकत्र किए हैं।
पूर्व रिपोर्टों में बताया गया था कि प्रभावित लोगों की संख्या सैकड़ों में पहुंच गई है, जिनमें से कई को जिले के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती और आपातकालीन देखभाल की आवश्यकता पड़ी है।
किसी की मौत की खबर नहीं है और अधिकांश मरीजों की हालत स्थिर बताई जा रही है।
--आईएएनएस
एमएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
कराची से महिला के अपहरण पर बीवाईसी नेता सबीहा बलूच ने पाकिस्तानी सेना की निंदा की
क्वेटा, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) की नेता सबीहा बलूच ने पाकिस्तानी सेना के विरोध में आवाज उठाते हुए बलूच महिला को गायब करने का आरोप लगाया। नेता सबीहा ने सेना की कड़ी निंदा करते हुए इसे एक बढ़ते व्यवस्थित पैटर्न का हिस्सा बताया है।
बलूच कार्यकर्ता ने बताया कि एक गृहिणी हसीना बलूच को 16 अप्रैल की रात कराची में उनके घर से अगवा कर लिया गया था। उन्होंने कहा कि बलूच महिलाओं का गायब होना अब कोई असामान्य घटना नहीं रह गई है, बल्कि यह एक सोची-समझी नीति का हिस्सा है।
इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए सबीहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय कानून बिल्कुल साफ है। जबरन गायब करना मानवता के खिलाफ अपराध है। किसी व्यक्ति से गुप्त और बिना संपर्क वाली हिरासत में लिया गया बयान या कबूलनामा कानूनी तौर पर बेकार होता है। यह सब दबाव में लिया जाता है, सबूत नहीं होता।”
उन्होंने आगे कहा कि जबरन गायब होने से सभी व्यक्तियों की सुरक्षा पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा, नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय अनुबंध (आईसीसीपीआर), और पाकिस्तान का संविधान स्पष्ट रूप से ऐसी प्रथाओं पर रोक लगाते हैं।
सबीहा ने कहा कि इतने साफ कानून होने के बावजूद, जिम्मेदार लोग जवाबदेही से बच रहे हैं और उल्टा बीवाईसी, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और इन मुद्दों को उठाने वालों के खिलाफ प्रचार अभियान चला रहे हैं।
सबीहा ने हसीना की तुरंत और बिना शर्त रिहाई की मांग करते हुए कहा, “यह साफ-साफ कह देना जरूरी है: कोई भी बदनाम करने की कोशिश हमें चुप नहीं करा सकती। हम सच्चाई को सामने लाते रहेंगे और बोलते रहेंगे।”
बलोच वीमेन फोरम (बीडब्ल्यूएफ) ने भी इस घटना की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि बिना किसी कानूनी प्रक्रिया और पारदर्शिता के इस तरह लोगों को उठाया जाना बहुत गंभीर कानूनी और इंसानी चिंता का विषय है।
बीडब्ल्यूएफ ने कहा, “बलोच महिलाओं के बढ़ते अपहरण और जबरन गायब किए जाने के मामले एक खतरनाक स्थिति दिखाते हैं। ये न सिर्फ मानवाधिकारों का उल्लंघन हैं, बल्कि परिवारों को लंबे समय तक दर्द, डर और अनिश्चितता में छोड़ देते हैं, जहां उन्हें न न्याय मिलता है, न जवाबदेही।”
इस संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों से अपील की कि वे कानून का पालन करें और खासकर महिलाओं के साथ इस तरह के गैरकानूनी काम न हों। अब समय आ गया है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इस बढ़ती समस्या को गंभीरता से लें और इस पर ध्यान दें।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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