पीएलआईएसएफपीआई से फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री की क्षमता बढ़ी और रोजगार के अधिक अवसर पैदा हुए : केंद्र
नई दिल्ली, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम फॉर फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री (पीएलआईएसएफपीआई) से देश की फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री की क्षमता में वृद्धि हुई है और साथ ही रोजगार एवं निर्यात को बढ़ावा मिला है। यह जानकारी सरकार की ओर से मंगलवार को दी गई।
केंद्र ने आधिकारिक बयान में कहा कि इस स्कीम के कारण फूड प्रोसेसिंग और प्रिजर्वेशन क्षमता में 34 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष की बढ़ोतरी हुई है। पीएलआईएसएफपीआई के तहत लाभार्थी कंपनियों को 2,162.55 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं।
इस स्कीम के तहत सरकार ने 165 आवेदनों को मंजूरी दी है और इसने 9,207 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित किया है। इससे करीब 3.39 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा हुए हैं जो कि निर्धारित लक्ष्य 2.5 लाख से काफी अधिक है।
केंद्र ने बताया कि पीएलआईएसएफपीआई से एमएसएमई को काफी सपोर्ट मिला है और 165 में से 69 आवेदक एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) थे।
इसके अतिरिक्त, मुख्य अनुमोदित आवेदकों से जुड़ी 40 कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स थीं, जो कि एमएसएमई श्रेणी के अंतर्गत आती हैं, जो मूल्य श्रृंखला में उनके एकीकरण को दर्शाती हैं।
केंद्र ने बताया कि 20 पात्र एमएसएमई को 13.26 करोड़ रुपए का इसेंटिव दिया गया है। साथ ही कहा कि 10,900 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ वित्त वर्ष 2021-22 से लेकर वित्त वर्ष 2026-27 के बीच लागू की गई पीएलआईएसएफपीआई स्कीम का लक्ष्य 33,494 करोड़ रुपए के प्रोसेस्ड फूड का उत्पादन करना है।
हाल के वर्षों में भारत के फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में लगातार वृद्धि देखी गई है, जिसके तहत सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) 2014-15 में 1.34 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 2023-24 में 2.24 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जैसा कि पहले संशोधित अनुमानों में बताया गया है।
वैश्विक स्तर पर इसकी बढ़ती उपस्थिति कृषि निर्यात में प्रोसेस्ड फूड पदार्थों के निर्यात की हिस्सेदारी में परिलक्षित होती है, जो 2014-15 में 13.7 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 20.4 प्रतिशत हो गई है।
प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम फॉर फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री (पीएलआईएसएफपीआई) का उद्देश्य विनिर्माण को बढ़ावा देना, लघु एवं मध्यम उद्यमों के बीच नवाचार को प्रोत्साहित करना और भारतीय खाद्य उत्पादों की वैश्विक ब्रांडिंग का समर्थन करना है।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
अल्लू अर्जुन को बड़ी राहत: दिल्ली हाईकोर्ट ने एआई और डीपफेक से उनकी पहचान के गलत इस्तेमाल पर लगाई रोक
नई दिल्ली, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। तेलुगु सिनेमा के सुपरस्टार अल्लू अर्जुन को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए कई कंपनियों और प्लेटफॉर्म्स को उनके नाम, चेहरा, आवाज और पहचान से जुड़ी किसी भी चीज का बिना अनुमति इस्तेमाल करने से रोक दिया है। यह आदेश खासतौर पर आज के दौर में तेजी से बढ़ रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डीपफेक टेक्नोलॉजी को ध्यान में रखते हुए दिया गया है।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस तुषार राव गेडेला की एकल पीठ ने की। अल्लू अर्जुन ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर कई ई-कॉमर्स वेबसाइट्स, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और कुछ अन्य संस्थाओं पर आरोप लगाया था कि वे उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। उनकी अनुमति के बिना उनके नाम से सामान बेचा जा रहा है और इंटरनेट पर गलत और भ्रामक कंटेंट फैलाया जा रहा है।
अल्लू अर्जुन ने याचिका में बताया कि कुछ लोग एआई तकनीक का इस्तेमाल कर उनकी आवाज की नकल कर रहे हैं और फेक कॉल जैसी चीजें तैयार कर रहे हैं। इसके अलावा, कुछ जगहों पर उनकी छवि का उपयोग करके आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री भी बनाई जा रही थी। इस तरह की गतिविधियां उनके काम और छवि पर भी असर डाल रही हैं।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अल्लू अर्जुन देश के एक बड़े और सम्मानित कलाकार हैं। उन्होंने सालों की मेहनत से अपनी अलग पहचान बनाई है और तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें आइकन स्टार के नाम से जाना जाता है।
कोर्ट ने उनके करियर का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने फिल्म विजेता से बतौर बाल कलाकार शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने कई हिट फिल्में दीं और पुष्पा: द राइज और पुष्पा 2: द रूल जैसी फिल्मों से उन्हें देश और दुनिया में बड़ी पहचान मिली।
जस्टिस गेडेला ने कहा कि अल्लू अर्जुन की पहचान से जुड़ी हर चीज, जैसे उनका नाम, चेहरा, आवाज, बोलने का तरीका, डायलॉग, हावभाव और स्टाइल उनकी खास पहचान है और इसे बिना अनुमति इस्तेमाल करना गलत है।
इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि अल्लू अर्जुन ने अपने नाम और ब्रांड से जुड़े कई ट्रेडमार्क रजिस्टर कराए हुए हैं। ऐसे में किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा उनका गलत इस्तेमाल करना सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है, और इस पर रोक लगाना जरूरी है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पहली नजर में यह साफ है कि कुछ लोग उनकी पहचान का गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहे थे। ऐसे मामलों में अगर तुरंत रोक नहीं लगाई जाती, तो इससे अभिनेता को ऐसा नुकसान हो सकता है, जिसकी भरपाई पैसे से भी नहीं हो सकती।
फैसले में साफ तौर पर कहा गया कि कोई भी व्यक्ति या संस्था अल्लू अर्जुन के नाम, तस्वीर, आवाज या किसी भी पहचान का इस्तेमाल निजी या व्यावसायिक फायदे के लिए नहीं कर सकती। यह रोक डिजिटल और ऑफलाइन दोनों तरह के प्लेटफॉर्म्स पर लागू होगी। इसमें एआई, जनरेटिव एआई, मशीन लर्निंग, डीपफेक और फेस मॉर्फिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल भी शामिल है।
कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि जिन वेबसाइट्स और लिंक पर ऐसा कंटेंट मौजूद है, उन्हें 72 घंटे के अंदर हटाया जाए। साथ ही प्लेटफॉर्म्स को यह जिम्मेदारी दी गई है कि भविष्य में अगर ऐसा कोई कंटेंट सामने आता है, तो उसे तुरंत ब्लॉक किया जाए।
दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले को 14 जुलाई को जॉइंट रजिस्ट्रार के सामने दलीलें पूरी करने के लिए और 24 सितंबर को कोर्ट के सामने आगे की सुनवाई के लिए लिस्ट किया है।
--आईएएनएस
पीके/पीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation




















