पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (POK) में प्रदर्शनकारियों के साथ झड़प के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने एक ब्रिटिश नागरिक की गोली मारकर हत्या कर दी। इस बीच, पाकिस्तान के अवैध कब्ज़े वाले इस इलाके में जारी अशांति के बीच एक और ब्रिटिश नागरिक को मीरपुर की जेल में दो महीने से ज़्यादा समय से हिरासत में रखा गया है। ये हत्याएं और गिरफ्तारियां ऐसे समय में हुई हैं जब 1948 से पाकिस्तान के अवैध कब्ज़े वाले इस भारतीय इलाके में महीनों से विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों की अगुवाई प्रतिबंधित 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) कर रही है और प्रदर्शनकारी आर्थिक राहत और ज़्यादा राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं। लंदन के अख़बार द गार्डियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पीटरबरो (लंदन से 119 किलोमीटर उत्तर में स्थित एक शहर) के रहने वाले मोहम्मद अख्तर की 9 जून को हत्या कर दी गई। वह उस समय कोटली में थे, जो उस इलाके के पास है जहां पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच बड़े पैमाने पर झड़पें हुई थीं।
50 साल के अख्तर के परिवार ने अखबार को बताया कि POK में आर्थिक और चुनावी सुधारों की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों की भीड़ पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की। परिवार का आरोप है कि अख्तर की मौत सुरक्षा बलों की गोलीबारी की वजह से हुई। अख्तर के कज़िन मोहम्मद साद ने बताया कि UK का नागरिक होने के बावजूद अख्तर कोटली में था, लेकिन वह प्रदर्शनों में हिस्सा नहीं ले रहा था। उसे अपने घर के पास एक आवारा गोली लगी। साद ने द गार्डियन को बताया उस दिन सुरक्षा बलों ने फायरिंग की थी और वह [अख्तर] एक आवारा गोली का शिकार हो गया।" उन्होंने आगे बताया कि उनके कज़िन अख्तर की छाती के एक तरफ गोली लगी थी। साद ने कहा कि परिवार ने ब्रिटिश अधिकारियों के सामने यह मामला नहीं उठाया, क्योंकि वे PoK में पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं करा पाए थे और उन्हें डर था कि अगर मामले पर ज़्यादा ध्यान दिया गया तो उन्हें निशाना बनाया जा सकता है।
जून से PoK में कैद ब्रिटिश नागरिक
'द गार्डियन' की रिपोर्ट के मुताबिक, नॉटिंघम शहर के रहने वाले एक और ब्रिटिश नागरिक, वकास आरिफ को 5 जून को हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद हिरासत में लिया गया था और वह दो महीने से ज़्यादा समय से मीरपुर की जेल में बंद हैं। आरिफ के परिवार ने 'द गार्डियन' को बताया कि उन्होंने प्रदर्शनों में हिस्सा नहीं लिया था। उनकी बहन सुमेरा ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बल और रेंजर्स उनके घर में घुसे और उनके भाई को हिरासत में ले लिया। उन्होंने कहा उन पर कोई आरोप नहीं है। उन्होंने कुछ नहीं किया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि विरोध प्रदर्शनों को कमज़ोर करने की कोशिश में कई और लोगों को भी जेल में डाला गया है। आरिफ की पत्नी, वारिशा कम्पुलवी ने कहा कि हिरासत में लिए जाने के बाद से ब्रिटिश अधिकारी उनसे सीधे संपर्क नहीं कर पाए हैं। 26 जून को यूके के विदेश कार्यालय से कम्पुलवी को भेजे गए एक ईमेल में कहा गया कि कांसुलर स्टाफ़ ने जेल में पाकिस्तानी अधिकारियों से संपर्क किया था और उन्हें बताया गया कि आरिफ़ की सेहत ठीक है, हालाँकि वे उनसे सीधे बात नहीं कर पाए थे।
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