ज्यादातर महिलाओं को व्हाइट डिस्चार्ज या सफेद पानी की समस्या रहती है। अक्सर महिलाएं समझ नहीं पाती कि इसे कैसे कंट्रोल करें। असल में कई लोग दवाइयों के साथ-साथ डाइट पर ध्यान नहीं देते हैं, जबकि खान-पान का सीधा असर इस समस्या पर पड़ता है। ऐसी कई चीजों हैं जिनके खाने से समस्या और भी बढ़ सकती है।
यदि आप बार-बार होने वाले डिस्चार्ज की समस्या से परेशान हैं, तो जरूरी है कि अपनी डाइट में थोड़े बदलाव करें। इस लेख हम आपको बताएंगे कि किन चीजों को अपनी डाइट में शामिल नहीं करना चाहिए। आइए आपको बताते हैं कौन-सी 5 चीजें, जिनको भूलकर भी सेवन नहीं करना चाहिए।
डाइट कंट्रोल क्यों जरूरी है?
व्हाइट डिस्चार्ज केवल एक साधारण समस्या नहीं है, बल्कि यह शरीर में हो रहे किसी आंतरिक असंतुलन का संकेत भी हो सकता है। गलत खान-पान की आदतें इस समस्या को और बढ़ा सकती हैं, इसलिए संतुलित और सही आहार लेना बहुत जरूरी है।
अनानास
अनानास की तासीर काफी एसिडिक होती है, जो शरीर में गर्मी बढ़ा सकती है। इसके अधिक सेवन से वजाइनल डिस्चार्ज ज्यादा हो सकता है और जलन या इरिटेशन भी महसूस हो सकती है।
मशरूम
असल में मशरूम एक प्रकार का फंगस है, जो कुछ मामलों में यीस्ट (कैंडिडा) की ग्रोथ को बढ़ाता है और नम व ठंडी तासीर के कारण डिस्चार्ज बढ़ सकता है। यदि पहले से यीस्ट इंफेक्शन है, तो इसका सेवन भूलकर भी न करें।
पत्तागोभी और फूलगोभी
इन दोनों सब्जियों की तासीर ठंडी और नमी बढ़ाने वाली होती है, जिससे शरीर में सूजन बढ़ सकती है, वजाइनल डिस्चार्ज ज्यादा हो सकता है और गैस व ब्लोटिंग की समस्या भी हो सकती है।
कद्दू
कद्दू की सब्जी ज्यादातर लोग कम खाना पसंद करते हैं, लेकिन आपको यह सब्जी अधिक पसंद है। आप कद्दू की सब्जी खाते हैं, तो सफेद पानी समस्या ज्यादा बढ़ सकती है।
लौंग
वैसे लौंग का प्रयोग सबसे ज्यादा मसाला में किया जाता है। अगर आप लौंग का सेवन अधिक मात्रा में करते हैं, तो यह वजाइनल पीएच बैलेंस को बिगाड़ सकता है। इससे इंफेक्शन बढ़ने का खतरा रहता है, जलन और असहजता हो सकती है।
व्हाइट डिस्चार्ज को कंट्रोल करने के टिप्स
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
- डाइट प्रोबायोटिक फूड्स शामिल करें।
- अधिक मीठा और जंक फूड खाने से बचें।
- साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें।
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Rubika Liyaquat Show: पश्चिम बंगाल की सियासत इस वक्त पूरी तरह महिला वोट बैंक के इर्द-गिर्द घूम रही है. एक तरफ हैं ममता बनर्जी जिनकी जीत की सबसे बड़ी ताकत महिला वोटर्स रही हैं, और दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली बीजेपी, जो अब महिला आरक्षण और योजनाओं के दम पर इस समीकरण को बदलना चाहती है. लोकसभा में संविधान संशोधन बिल गिरने के बाद मुद्दा और गरम हो गया है. पीएम मोदी ने बंगाल में महिला आरक्षण को बड़ा चुनावी हथियार बनाया, तो ममता बनर्जी ने इसे गुमराह करने की कोशिश बताया. एक रिपोर्ट बताती है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में करीब 53% महिलाओं ने ममता बनर्जी का साथ दिया, जबकि बीजेपी को सिर्फ 33% महिला वोट मिले. यानी साफ है दीदी की जीत की नींव में महिलाओं का बड़ा रोल रहा है. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती… बीजेपी ने भी पिछले कुछ सालों में महिलाओं को लेकर बड़ी रणनीति बनाई है। उज्ज्वला योजना, घर-घर शौचालय, नल का जल, महिलाओं के बैंक खाते इन योजनाओं ने महिला वोटर्स के साथ एक सीधा कनेक्शन बनाया है. और अब उसी कनेक्शन को बंगाल में मजबूत करने की कोशिश हो रही है. अब पूरा चुनाव महिला आरक्षण बनाम परिसीमन के नैरेटिव पर टिक गया है. सवाल सीधा है क्या बीजेपी महिला वोट में सेंध लगा पाएगी, या फिर दीदी का मजबूत कनेक्शन एक बार फिर भारी पड़ेगा? क्योंकि बंगाल में जीत की चाबी… महिलाओं के हाथ में है.
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