I-PAC ने ममता को 1 लाख एजेंट दिए, अब बंद:टीएमसी की रणनीति बना रही फर्म पर ईडी के शिकंजे से हड़कंप
पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान से 3 दिन पहले नया ‘खेला’ शुरू हो गया है। यहां तृणमूल कांग्रेस और सीएम ममता बनर्जी का चुनावी कैंपेन संभाल रही फर्म ‘आई-पैक’ का कोलकाता के विधाननगर स्थित दफ्तर दो दिन से बंद है। सूत्रों के अनुसार इसके एचआर ने 1300 कर्मियों को काम पर न आने का लेटर भेजा है। दरअसल, तृणमूल की बूथ लेवल की गतिविधि से लेकर नेताओं की सभाएं, रैलियां, सब कुछ तय करने में आईपैक अहम भूमिका निभा रही है। बंगाल में पार्टी के मौजूदा करीब 33% विधायकों के टिकट काटने के फैसले के पीछे भी इसी का सर्वे आधार था। इसने बंगाल के 93 हजार पोलिंग बूथों के लिए एक लाख शैडो एजेंट्स तैयार किए थे। तृणमूल भले ही इसके बंद होने की खबरों को खारिज कर रही है, लेकिन मतदान से ठीक पहले संगठन और कार्यकर्ता असमंजस में आ गए हैं। हालांकि भास्कर के सवाल पर पार्टी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा- हम संसद में दूसरी बड़ी विपक्षी पार्टी हैं। 5 एजेंसियों के साथ काम कर रहे हैं। सभी ठीक हैं। पार्टी के एक अन्य नेता ने बताया कि टीएमसी संगठन 4 स्तर पर काम कर रहा है। ऐसे समझें... तृणमूल के लिए आईपैक इतनी जरूरी क्यों टीएमसी की हाईकोर्ट में याचिका इस बीच, टीएमसी ने आशंका जताई है कि उसके 800 नेताओं, कार्यकर्ताओं को केंद्रीय सुरक्षा बल एहतियातन गिरफ्तार कर सकते हैं। इसे लेकर पार्टी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर तुरंत सुनवाई की मांग की है। पार्टी को यह भी आशंका है कि केंद्रीय बल राज्य के पुलिस थानों को कब्जे में ले सकते हैं। 23 अप्रैल को राज्य में पहले चरण के तहत 152 सीटों पर वोटिंग होनी है। चुनाव प्रचार 21 को खत्म हो जाएगा। ----------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… तमिलनाडु में ₹1,200 करोड़+ के कैश-गोल्ड और फ्रीबीज जब्त:PM मोदी पर आचार संहिता उल्लंघन का आरोप, चुनाव आयोग को 700 नागरिकों ने लेटर लिखा तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्यभर में 1,200 करोड़ रुपए से ज्यादा की नकदी, सोना-चांदी, फ्रीबीज, शराब और ड्रग्स जब्त किए हैं। इसमें ₹169.85 करोड़ कैश, ₹650.87 करोड़ के सोना-चांदी शामिल हैं। पूरी खबर पढ़ें…
MP में 31% महिला कलेक्टर, दक्षिणी राज्यों में 39%:प्रशासन में भी महिलाओं को बड़ी जिम्मेदारियां देने में राज्य पीछे
देश में महिलाओं को 33% आरक्षण का कानून लागू होने का इंतजार है। हालांकि, प्रशासनिक ढांचे में महिलाओं की भूमिका की बात करें तो यहां भी महिलाओं को बड़ी जिम्मेदारियां देने में राज्य पीछे हैं। दक्षिण भारत के कई राज्यों में महिला कलेक्टरों की हिस्सेदारी 35 से 39% तक पहुंच चुकी है, जबकि हिंदी पट्टी में मध्यप्रदेश 31% के साथ सबसे आगे है। छोटा राज्य होने के बावजूद सिक्किम में भी यह आंकड़ा 33% तक है। वहीं हिंदी पट्टी में तस्वीर अपेक्षाकृत कमजोर है। मध्यप्रदेश 55 जिलों में 17 महिला कलेक्टरों (करीब 31%) के साथ इस क्षेत्र में सबसे आगे है। यह हिंदी पट्टी का इकलौता बड़ा राज्य है, जहां आंकड़ा 30% के पार है। ओडिशा (3%) और तेलंगाना (39%) के बीच करीब 10 गुना का अंतर है। महिला कलेक्टरों में यूपी-झारखंड पीछे तेलंगाना 39% तमिलनाडु 38% केरल 36% आंध्र प्रदेश 35% सिक्किम 33% कर्नाटक 32% मध्यप्रदेश 31% मेघालय 27% मिजोरम 27% प.बंगाल 26% बिहार 18% उत्तर प्रदेश 16% हरियाणा 18% गुजरात 18% झारखंड 16% ओडिशा 8% --------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… संजय कुमार का कॉलम:महिला आरक्षण पर निर्मित शंकाओं का समाधान जरूरी यह तो स्पष्ट ही है कि महिला आरक्षण विधेयक के क्रियान्वयन को लेकर भले कुछ आशंकाएं, शर्तें और चिंताएं हों, लेकिन विपक्ष की ओर से सुनाई देने वाली तीखी आवाजें महिला आरक्षण नहीं, परिसीमन विधेयक को लेकर हैं। पूरी खबर पढ़ें…
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 














.jpg)







