Jharkhand: Ramgarh में भट्ठी विस्फोट से 9 मजदूर झुलसे, दो की हालत गंभीर
रामगढ़, नौ अगस्त झारखंड के रामगढ़ जिले में रविवार को एक निजी इस्पात संयंत्र की भट्ठी में विस्फोट होने से कम से कम नौ श्रमिक झुलस गए। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि यह घटना रविवार दोपहर कुजू क्षेत्र के मुरपा गांव में हुई।
मुख्य फैक्टरी निरीक्षक मनीष सिन्हा ने बताया कि गंभीर रूप से झुलसे दो श्रमिकों को रांची के एक निजी अस्पताल में रेफर किया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘संयंत्र की भट्ठी में विस्फोट होने के बाद गर्म धातु के छींटे पड़ने से कुछ कर्मचारी झुलस गए। हजारीबाग के फैक्टरी निरीक्षक को इस मामले की जांच करने और जल्द से जल्द विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।’’ घटना में झुलसे सभी श्रमिकों को रामगढ़ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अस्पताल के डॉ. सौरभ कुमार ने बताया कि झुलस गए नौ लोगों को अस्पताल लाया गया था, जिनमें से दो की हालत गंभीर थी और उन्हें रांची के अस्पताल रेफर कर दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, घटना में झुलसे श्रमिकों की पहचान रामगढ़ जिले के कुंजीलाल रविदास, परमेश्वर कुमार महतो, रमेश ठाकुर, राजेंद्र महतो और संजय प्रसाद, हजारीबाग के राजेंद्र महतो और रितेश राणा, पटना के धनंजय सिंह और दरभंगा (बिहार) के विजय यादव के रूप में की गई है। रामगढ़ के श्रम अधीक्षक अनिल रंजन ने कहा कि विभाग के अधिकारी संयंत्र का दौरा कर श्रमिक सुरक्षा उपायों का जायजा लेंगे।
Nashik-Pune Railway मार्ग में बदलाव का विरोध, Satyajeet Tambe हिरासत में लिए गए
नासिक, नौ अगस्त महाराष्ट्र के नासिक जिले के विभिन्न हिस्सों में रविवार को हजारों लोगों ने नासिक-पुणे सेमी हाई-स्पीड रेलमार्ग के प्रस्तावित मूल मार्ग में बदलाव नहीं करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया और राजमार्ग पर यातायात बाधित कर दिया। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा शामिल थे। पुलिस ने सिन्नर में राजमार्ग पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले स्थानीय विधान परिषद सदस्य सत्यजीत तांबे और कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
तनाव उस समय बढ़ गया, जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने तांबे को ले जा रहे पुलिस वाहन को रोकने की कोशिश की, जिससे तीखी बहस हुई। पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट और नासिक के सांसद राजाभाऊ वाजे भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। नासिक-पुणे रेल मार्ग का विवाद मुख्य रूप से नारायणगांव और संगमनेर से होकर जाने वाले सीधे और छोटे रूट को रद्द करने के प्रस्ताव पर केंद्रित है।
यह कदम पुणे जिले में मौजूद जायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (जीएमआरटी) के तकनीकी सिग्नलों में संभावित बाधा उत्पन्न होने की चिंताओं के कारण उठाया गया है। इसके बजाय, सरकार ने इस मार्ग को अहिल्यानगर और शिरडी से होकर ले जाने का प्रस्ताव दिया है, जिससे स्थानीय स्तर पर जबरदस्त विरोध शुरू हो गया है। महाराष्ट्र सरकार ने पुणे-नासिक सेमी-हाई-स्पीड रेलवे अलाइनमेंट के जीएमआरटी पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करने के लिए परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनिल काकोडकर की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।
आंदोलन के दौरान महाराष्ट्र के आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन ने तांबे से फोन पर बात की। स्थानीय नेताओं ने बताया कि महाजन द्वारा लिखित आश्वासन दिए जाने की घोषणा के बावजूद पुलिस ने तांबे और अन्य प्रदर्शनकारियों को समृद्धि राजमार्ग की ओर जाने से रोक दिया। तांबे ने कहा, यह किसी राजनीतिक दल का आंदोलन नहीं है, बल्कि वर्षों पुरानी लोगों की मांग पर शुरू किया गया जन आंदोलन है।
नासिक-पुणे रेल मार्ग का निर्माण उसी मार्ग पर किया जाना चाहिए, जैसा मूल रूप से प्रस्तावित था। हम किसी के दबाव में या किसी भी कारण से मार्ग बदलने का प्रयास स्वीकार नहीं करेंगे।
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