फिजिकल हेल्थ- ब्लड टेस्ट से पता चलेगा लंग-कैंसर का रिस्क:इलाज होगा आसान, डॉक्टर से जानें इस ब्लड टेस्ट से जुड़े हर सवाल का जवाब
‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ (WHO) के मुताबिक, लंग कैंसर दुनिया में सबसे ज्यादा डायग्नोज होने वाले कैंसरों में से एक है। यह कैंसर से होने वाली मौतों का प्रमुख कारण भी है। हाल ही में जर्नल ‘Cell’ में पब्लिश एक नई रिसर्च ने लंग कैंसर के इलाज में एक नई उम्मीद जगाई है। वैज्ञानिकों ने ब्लड में 14 ऐसे प्रोटीन की पहचान की है, जिनसे लंग कैंसर डायग्नोज होने से 5 साल से पहले जोखिम का पता लगाया जा सकता है। इस तकनीक के सफल होने पर लंग कैंसर के ट्रीटमेंट में बड़ी मदद मिलेगी। इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में इस ब्लड टेस्ट की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. राजित चनाना, डायरेक्टर, सीनियर कंसल्टेंट, ऑन्कोलॉजी, धर्मशिला नारायणा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- क्या सचमुच एक ब्लड टेस्ट से भविष्य में कैंसर का पता चल सकेगा? जवाब- अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि एक सिंपल ब्लड टेस्ट भविष्य में होने वाले कैंसर की 100% सटीक भविष्यवाणी कर सकता है, लेकिन हाल की स्टडी से इस दिशा में उम्मीद जगी है। इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- यह टेस्ट कैंसर पकड़ता है या सिर्फ कैंसर के खतरे का अनुमान लगाता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- यह टेस्ट कितने साल पहले कैंसर का जोखिम बता सकता है? जवाब- यह टेस्ट करीब 5 साल पहले ही संकेत दे सकता है कि किसी व्यक्ति में लंग कैंसर विकसित होने का रिस्क बढ़ा हुआ है या नहीं। सवाल- क्या यह ब्लड टेस्ट मार्केट में उपलब्ध है? जवाब- नहीं, यह ब्लड टेस्ट अभी आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं है। यह तकनीक अभी रिसर्च और क्लिनिकल वैलिडेशन के चरण में है। सवाल- कैंसर होने और कैंसर का जोखिम होने में क्या फर्क है? जवाब- ग्राफिक में दोनों के बीच के फर्क देखिए- सवाल- अगर रिपोर्ट में हाई रिस्क आए तो क्या इसका मतलब है कि कैंसर जरूर होगा? जवाब- नहीं, इसका मतलब यह है कि उसमें लंग कैंसर का रिस्क ज्यादा है। ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह पर एक्स्ट्रा टेस्ट, रेगुलर स्क्रीनिंग की जरूरत पड़ सकती है। ताकि शुरुआती चरण में ही समस्या का पता लगाया जा सके। सवाल- अगर रिपोर्ट नॉर्मल आए तो क्या भविष्य में कैंसर का रिस्क पूरी तरह खत्म हो जाता है? जवाब- नहीं, इससे भविष्य में कैंसर का रिस्क पूरी तरह खत्म नहीं होता है। उम्र, स्मोकिंग की आदत, फैमिली हिस्ट्री और दूसरे फैक्टर्स रिस्क बढ़ा सकते हैं। सवाल- किन लोगों के लिए यह टेस्ट सबसे ज्यादा उपयोगी हो सकता है? जवाब- मंजूरी के बाद यह उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी हो सकता है, जिन्हें लंग कैंसर का रिस्क ज्यादा है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या धूम्रपान करने वालों को इसका सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा? जवाब- हां, अगर भविष्य में यह ब्लड टेस्ट इस्तेमाल में आता है, तो इसका सबसे ज्यादा फायदा स्मोकर्स को मिलेगा। दरअसल, लंग कैंसर के अधिकांश मामलों का संबंध स्मोकिंग से होता है। इससे डॉक्टर्स को समय रहते निगरानी और इलाज में मदद मिलेगी। सवाल- क्या नॉन-स्मोकर्स के लिए भी ये टेस्ट उपयोगी हो सकता है? जवाब- हां, यह टेस्ट नॉन-स्मोकर्स के लिए भी उपयोगी होगा। दरअसल, कई नॉन-स्मोकर्स में भी लंग कैंसर का रिस्क होता है। इसकी कई वजहें हैं- इन हाई रिस्क ग्रुप के लिए भी यह टेस्ट फायदेमंद साबित हो सकता है। सवाल- क्या परिवार में लंग कैंसर की हिस्ट्री हो तो ये टेस्ट जरूर कराना चाहिए? जवाब- फिलहाल इस टेस्ट को रेगुलर कराने की सिफारिश नहीं है। ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह से उचित स्क्रीनिंग और जांच करानी चाहिए। सवाल- लंग कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं? जवाब- कई मामलों में इसका पता देर से चलता है। हालांकि कुछ शुरुआती संकेत दिखाई दे सकते हैं। ग्राफिक में देखिए- सवाल- भारत में लंग कैंसर कितना कॉमन है? जवाब- लंग कैंसर भारतीय पुरुषों में सबसे कॉमन कैंसर है। यह कैंसर से होने वाली कुल मौतों में लगभग 8% के लिए जिम्मेदार है। चिंता की बात यह है कि ज्यादातर मरीजों में बीमारी का पता एडवांस स्टेज में चलता है, जिससे मृत्यु दर 80-90% तक पहुंच जाती है। सवाल- कौन सी आदतें लंग कैंसर के रिस्क को बढ़ाती हैं? जवाब- कुछ आदतें और लाइफस्टाइल से जुड़े फैक्टर लंग कैंसर का रिस्क बढ़ा सकते हैं। ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या एयर पॉल्यूशन भी लंग कैंसर का कारण बन सकता है? जवाब- हां, प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (PM2.5), धुआं और हार्मफुल केमिकल लंबे समय तक लंग्स में जाकर सेल्स को नुकसान पहुंचा सकते हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) भी एयर पॉल्यूशन को लंग कैंसर का कारण मानता है। सवाल- लंग कैंसर से बचाव के लिए क्या सावधानियां बरतें और लाइफस्टाइल में क्या सुधार करें? जवाब- कुछ सावधानियां अपनाकर कैंसर के रिस्क को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ग्राफिक में देखिए- कुल मिलाकर, इस ब्लड टेस्ट से समय पर स्क्रीनिंग, निगरानी और इलाज शुरू करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल लंग कैंसर से बचाव के लिए धूम्रपान से दूरी, प्रदूषण से बचाव, हेल्दी लाइफस्टाइल और नियमित हेल्थ चेकअप ही सबसे प्रभावी उपाय हैं। …………………. फिजिकल हेल्थ से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- फूड प्रिजर्वेटिव से हार्ट डिजीज का रिस्क: डॉक्टर से जानें- हाई प्रिजर्वेटिव्स फूड की लिस्ट, खरीदने से पहले लेबल पढ़ें पैकेज्ड और अल्ट्राप्रोसेस्ड फूड हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। इन फूड्स को लंबे समय तक खाने योग्य बनाए रखने के लिए इनमें अलग-अलग प्रिजर्वेटिव मिलाए जाते हैं। ये प्रिजर्वेटिव फूड की शेल्फ लाइफ बढ़ाते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
जरूरत की खबर- सोया चाप बैटर में लोटता दिखा वर्कर:जानें FSSAI के हाइजीन रूल्स, रेस्त्रां में खाने से पहले बरतें 11 सावधानियां
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ। इसमें एक शर्टलेस वर्कर गीले फर्श पर रखे सोया चाप के बैटर में लोटता हुआ नजर आया। वीडियो कथित तौर पर एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का है। इस घटना ने फूड हाइजीन और फूड सेफ्टी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हर दिन लाखों लोग पैकेज्ड फूड खरीदते हैं, ऑनलाइन खाना ऑर्डर करते हैं और रेस्टोरेंट में खाना खाते हैं। वे यह भरोसा करते हैं कि खाना बनाने से लेकर परोसने तक साफ-सफाई और फूड सेफ्टी के मानकों का पालन किया गया होगा। लेकिन ऐसे वीडियो लोगों की चिंता बढ़ा देते हैं। यही नहीं, आए दिन देश के अलग-अलग हिस्सों से मिलावटी खाने, गंदे माहौल में फूड तैयार करने और खराब हाइजीन से जुड़े मामले सामने आते रहते हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए फूड क्वालिटी और साफ-सफाई के प्रति जागरूक रहना जरूरी है। इसलिए 'जरूरत की खबर' में आज फूड हाइजीन की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. संचयन रॉय, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- अनहाइजीनिक तरीके से बनाए गए फूड के क्या हेल्थ रिस्क हो सकते हैं? जवाब- अगर हाइजीन का ख्याल न रखा जाए और खाना गंदगी में बने तो ऐसे में बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से पनपते हैं। ये खाने को दूषित कर देते हैं। इससे फूड पॉइजनिंग और आंतों का संक्रमण समेत कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों, प्रेग्नेंट महिलाओं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में रिस्क ज्यादा होता है। सभी हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- किन गलतियों से फूड कंटैमिनेशन का रिस्क बढ़ जाता है? जवाब- खाना बनाने, स्टोर करने और परोसने के दौरान हाइजीन मेंटेन न करने से फूड कंटैमिनेशन का रिस्क बढ़ता है। जैसेकि- सवाल- सोया चाप के अलावा बाहर के किन फूड्स में खराब हाइजीन का रिस्क होता है? जवाब- ऐसे फूड्स, जो बड़े पैमाने पर तैयार किए जाते हैं, उनके दूषित होने का रिस्क ज्यादा होता है। ऐसे फूड्स की लिस्ट ग्राफिक में देखिए- सवाल- इन फूड आइटम्स में जोखिम ज्यादा क्यों होता है? जवाब- इन्हें तैयार और स्टोर करने की प्रक्रिया लंबी होती है। अगर किसी भी स्टेप में साफ-सफाई या फूड सेफ्टी के नियमों का पालन न हो तो खाना दूषित हो सकता है। इसकी मुख्य वजहें हैं- सवाल- किसी आउटलेट या रेस्टोरेंट में खाने से पहले किन बातों का ध्यान रखें? जवाब- इस दौरान कुछ बुनियादी चीजें जरूर चेक करें। इससे साफ-सफाई और फूड हाइजीन का अंदाजा लगाया जा सकता है। ग्राफिक में सेफ्टी चेकलिस्ट देखिए- सवाल- सोया चाप खरीदने से पहले किन बातों का ध्यान रखें? जवाब- ये सुनिश्चित करने का कोई तरीका नहीं है कि सोया चाप सेफ है या नहीं। इसलिए- सवाल- क्या किसी साफ-सुथरे, अच्छे होटल में भी सोया चाप खाना सेफ नहीं है? जवाब- नहीं, सिर्फ होटल का साफ-सुथरा दिखना इस बात की गारंटी नहीं है कि सोया चाप सेफ है। दरअसल सोया चाप एक अल्ट्राप्रोसेस्ड फूड है। इसे कई स्टेप्स में तैयार किया जाता है- फैक्ट्री में रेस्टोरेंट में इन स्टेप्स में कहीं भी कंटैमिनेशन का रिस्क हो सकता है। इसलिए बाहर सोया चाप खाना सुरक्षित नहीं है। सवाल- FSSAI के अनुसार, किसी भी रेस्टोरेंट के लिए कौन-से हाइजीन रूल्स फॉलो करना जरूरी है, वरना उनका लाइसेंस कैंसिल हो सकता है? जवाब- FSSAI ने इसके लिए कई नियम तय किए हैं। जरूरी हाइजीन रूल्स ग्राफिक में देखिए- सवाल- FSSAI के अनुसार, फूड हैंडलर्स को किन हाइजीन नियमों का पालन करना अनिवार्य है? जवाब- फूड हैंडलर्स को बुनियादी साफ-सफाई का ख्याल रखना अनिवार्य है। FSSAI ने इसके लिए कई रूल्स तय किए हैं। ग्राफिक में देखिए- सवाल- नियमों के उल्लंघन पर क्या कार्रवाई हो सकती है? जवाब- उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर फूड सेफ्टी विभाग अलग-अलग कार्रवाई कर सकता है। जैसेकि- सवाल- किसी रेस्टोरेंट में गंदगी दिखे तो क्या करें? जवाब- ऐसी स्थिति में वहां खाना न खाएं। जरूरत पड़ने पर इसकी फोटो या वीडियो सबूत के तौर पर रखें और रेस्टोरेंट मैनेजमेंट से शिकायत करें। अगर समस्या गंभीर हो तो राज्य के फूड सेफ्टी विभाग या FSSAI के ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट’ पोर्टल/एप पर शिकायत दर्ज करें। सवाल- अगर खाने के बाद कोई हेल्थ प्रॉब्लम हो तो क्या करें? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- अनहाइजीनिक फूड की शिकायत कहां और कैसे करें? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- …………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- स्कूलों के बाहर जंक फूड पर बैन: बच्चों को अनहेल्दी खाने से कैसे रोकें, हेल्दी ईटिंग हैबिट सिखाने के 8 टिप्स पिछले दिनों महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए स्कूलों और उनके आसपास 50 मीटर के दायरे में जंकफूड की दुकानों पर रोक लगा दी। अब महाराष्ट्र में स्कूलों के भीतर, बाहर और आसपास वड़ा पाव, समोसा, पेस्ट्री, बर्गर, मोमोज जैसे जंक फूड नहीं मिलेंगे। पूरी खबर पढ़िए…
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