Kuber Devta Ki Aarti: अक्षय तृतीया पर की जाती है रावण के भाई कुबेर की पूजा! आज जरूर पढ़ें आरती
Kuber Devta Ki Aarti: अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर कुबेर देव की पूजा करने की परंपरा इसलिए मानी जाती है क्योंकि वे धन और वैभव के देवता माने जाते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन किया गया हर शुभ कार्य 'अक्षय' यानी कभी समाप्त न होने वाला फल देता है, इसलिए कुबेर पूजा से प्राप्त धन और समृद्धि स्थायी मानी जाती है. कुबेर भगवान को यक्षो का राजा और शिव जी का द्वारपाल माना जाता है. वे रावण के सौतेले भाई हैं. अक्षय तृतीया के दिन उन्हें शिव जी ने उन्हें कोषाध्यक्ष बनाया था. इसलिए, धनतेरस और अक्षय तृतीया पर इनकी पूजा करते हैं. आइए पढ़ते हैं कुबेर देवता की आरती और मंत्र.
आरती श्री कुबेर जी की। Kuber Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे,स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरे।
शरण पड़े भगतों के,भण्डार कुबेर भरे॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे...॥
दैत्य दानव मानव से,कई-कई युद्ध लड़े॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे...॥
स्वर्ण सिंहासन बैठे,सिर पर छत्र फिरे, स्वामी सिर पर छत्र फिरे।
योगिनी मंगल गावैं,सब जय जय कार करैं॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे...॥
गदा त्रिशूल हाथ में,शस्त्र बहुत धरे, स्वामी शस्त्र बहुत धरे।
दुख भय संकट मोचन,धनुष टंकार करें॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे...॥
भांति भांति के व्यंजन बहुत बने,स्वामी व्यंजन बहुत बने।
मोहन भोग लगावैं,साथ में उड़द चने॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे...॥
बल बुद्धि विद्या दाता,हम तेरी शरण पड़े, स्वामी हम तेरी शरण पड़े
अपने भक्त जनों के,सारे काम संवारे॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे...॥
मुकुट मणी की शोभा,मोतियन हार गले, स्वामी मोतियन हार गले।
अगर कपूर की बाती,घी की जोत जले॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे...॥
यक्ष कुबेर जी की आरती,जो कोई नर गावे, स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत प्रेमपाल स्वामी,मनवांछित फल पावे॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे...॥
॥ इति श्री कुबेर आरती ॥
कुबेर देव जी की आरती करने के लाभ
- कुबेर देव जी की आरती करने से धन, ऐश्वर्य और समृद्धि प्राप्त होती है.
- कुबेर जी की आरती करने से साधक को हर संकट से और बाधाओं से मुक्ति मिलती है.
- नियमित रूप से कुबेर भगवान की आरती करने से मानसिक शांति और संतोष मिलता है.
- आरती का नियमित रूप से पाठ करने पर शारीरिक और मानसिक बल मिलता है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
भारत और उज़्बेकिस्तान ने शुरू किया संयुक्त सैन्य अभ्यास, डस्टलिक-2026 के जरिए क्षेत्रीय सुरक्षा पर जोर
Dustlik-2026: भारत और उज़्बेकिस्तान की सेनाओं ने साझा उद्भयास का नया दौर शुरू किया हैं. उज़्बेकिस्तान के नामांगन स्थित गुरुमसराय ट्रेनिंग एरिया में यह युद्धभ्यास चल रहा है जिसमें दोनों देशों की सेनाएं क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाते हुए अपने युद्ध कौशल को नई धार दे रही हैं. इस बार अभ्यास का फोकस ऐसे इलाकों में संयुक्त सैन्य अभियानों को बेहतर बनाना है जहां भौगोलिक चुनौतियां ज्यादा होती हैं. दोनों देशों की सेनाएं मिलकर ऑपरेशनल प्लानिंग, टैक्टिकल समन्वय और विशेष ऑपरेशन की रणनीतियों पर काम कर रही हैं, खासतौर पर गैर-कानूनी सशस्त्र समूहों से निपटने के परिदृश्य में.
सैनिकों ने आधुनिक युद्ध कौशल का उम्दा प्रदर्शन
इस युद्धभ्यास के दौरान भारत और उज़्बेक सैनिकों ने एक दूसरे के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए कई जटिल सैन्य गतिविधियों को अंजाम दिया. इसमें उन्नत फायरिंग तकनीक, ड्रोन के जरिए निगरानी, क्लोज कॉम्बैट, शहरी इलाकों में ऑपरेशन, स्नाइपर ट्रेनिंग और कठिन परिस्थितियों में नेविगेशन जैसी गतिविधियां शामिल रहीं. इसके अलावा, युद्ध के दौरान घायल सैनिकों को सुरक्षित निकालने और दुश्मन के ठिकानों पर सटीक कार्रवाई जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी अभ्यास किया गया.
संयुक्त युद्धाभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिकों ने शारीरिक क्षमता और टीम भावना पर भी फोकस किया है ताकि सिर्फ युद्ध कौशल ही नहीं, बल्कि सैनिकों की फिटनेस और टीमवर्क को मजबूत किया जा सके. इसके लिए रनिंग, योग, कैलिस्थेनिक्स और अन्य ट्रेनिंग सेशंस भी आयोजित किए गए. इससे दोनों सेनाओं के बीच आपसी तालमेल और विश्वास को बढ़ावा मिला है.
युद्धभ्यास के अगले फेज में कॉम्बैट जोन में होगा ट्रायल
आने वाले दिनों में यह अभ्यास और ज्यादा जटिल मिशनों की ओर बढ़ेगा. इसमें हेलिकॉप्टर आधारित ऑपरेशन, लक्षित हमले, संयुक्त कमांड सिस्टम की स्थापना और विशेष ऑपरेशन प्रक्रियाओं का परीक्षण शामिल होगा.
क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अहम कदम
इस संयुक्त अभ्यास के जरिए भारतीय सेना और उज़्बेक आर्मी के बीच न केवल सामरिक तालमेल बढ़ेगा, बल्कि भविष्य में किसी भी संयुक्त ऑपरेशन के लिए तैयारियां भी मजबूत होंगी. यह पहल क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा सहयोग के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण बताई जा रही हैं. दोनों देशों के बीच यह सातवां युद्धभ्यास है.
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