दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग का राष्ट्रपति भवन में किया गया औपचारिक स्वागत
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग और उनकी पत्नी किम हे-क्युंग का सोमवार को राष्ट्रपति भवन के सामने औपचारिक स्वागत किया गया। इस दौरान भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के आने पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। पारंपरिक कपड़ों में दक्षिण कोरिया का राष्ट्रीय झंडा और तिरंगा लिए बच्चों ने भी राष्ट्रपति ली का स्वागत किया।
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली रविवार को तीन दिन के सरकारी दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे। कॉर्पोरेट मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने नई दिल्ली एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति ली और फर्स्ट लेडी किम ही क्यूंग का स्वागत किया।
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने रविवार को राष्ट्रपति ली से मुलाकात की। डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति ली जे म्युंग से मिलकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं, क्योंकि वे भारत का अपना स्टेट विजिट शुरू कर रहे हैं। कई क्षेत्रों में भारत-कोरिया संबंधों को गहरा करने की उनकी प्रतिबद्धता को महत्व देता हूं।
डॉ. जयशंकर ने भरोसा जताया कि पीएम मोदी के साथ उनकी बातचीत हमारी खास रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी।
राष्ट्रपति ली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा कर लिखा, दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला और बहुत तेजी से बढ़ता हुआ देश। अगर आप ध्यान से देखें, तो सच में ऐसे कई मौके हैं जिनसे दोनों देशों को फायदा होगा, बिना किसी दबाव या जबरदस्ती के। आइए, हम भारत के साथ मिलकर एक शानदार भविष्य की शुरुआत करें, एक ऐसा देश जो शांति और लोकतंत्र पसंद करता है। मैं उम्मीद करता हूं सब कुछ अच्छे से सम्पन्न होगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति का भारत दौरा दोनों देशों के बीच स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
जायसवाल ने एक्स पर पोस्ट किया था, कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति ली जे म्युंग का भारत के राजकीय दौरे पर नई दिल्ली आने पर बहुत गर्मजोशी से स्वागत है। यह राष्ट्रपति ली का भारत का पहला दौरा है।
--आईएएनएस
केके/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
स्वस्थ लिवर है सेहतमंद जीवन की नींव, रोजाना करें ये 10 आसान योगासन
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। लिवर हमारे शरीर का फिल्टर होता है जो खून को साफ करता है, पाचन में मदद करता है और कई जरूरी रसायनों का संतुलन बनाए रखता है। अगर लिवर कमजोर हो जाए तो थकान, पाचन खराब होना, त्वचा संबंधी समस्याएं और कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे में योग एक बहुत अच्छा सहारा बन सकता है।
स्वस्थ लिवर के लिए योगिक प्रबंधन एक बहुत ही सरल, प्राकृतिक और प्रभावी तरीका है जिससे हम अपने शरीर के इस महत्वपूर्ण अंग को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं। सबसे पहले बात करते हैं कुंजल क्रिया की। यह एक शुद्धिकरण प्रक्रिया है जिसमें गुनगुने पानी को पीकर उल्टी के माध्यम से पेट की सफाई की जाती है। इससे पेट और लिवर पर जमा विषैले पदार्थ बाहर निकलते हैं और शरीर हल्का महसूस करता है।
इसके बाद त्रिकोणासन आता है। इस आसन में शरीर त्रिकोण की तरह बनता है। यह लिवर और पाचन तंत्र को सक्रिय करता है और पेट की चर्बी कम करने में भी मदद करता है। गोमुखासन भी बहुत उपयोगी है। इसमें शरीर की मांसपेशियों में खिंचाव आता है और यह लिवर के आसपास रक्त संचार को बेहतर करता है। इससे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।
शशकासन (खरगोश की मुद्रा वाला आसन) मन को शांत करता है और पेट के अंगों पर हल्का दबाव डालकर पाचन क्रिया को सुधारता है। पश्चिमोत्तानासन में आगे की ओर झुककर शरीर को खींचा जाता है। यह लिवर और पेट के अंगों की मालिश जैसा प्रभाव डालता है और पाचन शक्ति बढ़ाता है।
अर्धमत्स्येन्द्रासन एक बहुत प्रभावी ट्विस्टिंग पोज है। यह लिवर को डिटॉक्स करने में मदद करता है क्योंकि इसमें पेट के अंदर के अंगों की अच्छी तरह से मालिश होती है। भुजंगासन (कोबरा पोज) लिवर को सक्रिय करता है और पेट के अंगों में रक्त संचार बढ़ाता है। यह आसन कमर दर्द में भी राहत देता है।
धनुरासन शरीर को धनुष की तरह मोड़ता है और यह लिवर तथा पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। इससे भूख भी संतुलित रहती है। कपालभाति प्राणायाम लिवर के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसमें तेज सांस छोड़ने की प्रक्रिया से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलते हैं और लिवर की कार्यक्षमता बढ़ती है।
अंत में ध्यान (मणिपुर चक्र) करना बहुत महत्वपूर्ण है। मणिपुर चक्र को ऊर्जा और पाचन शक्ति का केंद्र माना जाता है। इस पर ध्यान करने से मानसिक शांति मिलती है और पाचन तंत्र तथा लिवर दोनों संतुलित रहते हैं।
--आईएएनएस
पीआईएम/पीएम
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