रेलवे की यात्रियों के लिए समर स्पेशल ट्रेन, यूपी-बिहार के पैसेंजर्स को मिलेगी सुविधा
गर्मी की छुट्टी में ट्रैवल करने वाले यात्रियों की संख्या काफी बढ़ जाती है। कोई अपने घर वापस आता है, कोई ननिहाल जाता है तो कोई घूमने फिरने का प्लान बनाता है। इस वजह से भीड़ काफी बढ़ जाती है और ट्रेनों में लंबी वेटिंग देखने को मिलती है। कई बार ऐसा होता है कि बहुत कोशिश करने के बाद भी टिकट नहीं मिल पाती।
आजकल जब व्यक्ति कहीं की भी टिकट बुक करने बैठता है तो उसके सामने एक लंबी वेटिंग लिस्ट खुल जाती है। अब लोगों को इसी परेशानी से छुटकारा दिलाने के लिए रेलवे ने कुछ समर स्पेशल ट्रेन शुरू की है। इन ट्रेनों की मदद से पहले से चल रही ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट कम होगी और यात्रियों को आने जाने में सुविधा मिलेगी। चल जान लेते हैं कि यह ट्रेन कहां चलाई जाएगी और किस सुविधा मिलने वाली है।
कहां चलेगी समर स्पेशल ट्रेन
ये सुविधा वेस्टर्न रेलवे ने अपने यात्रियों के लिए शुरू की है। गुजरात और पूर्वी भारत को जोड़ा जाएगा। अप्रैल 2026 से यह ट्रेनिंग शुरू हो रही है जिसके चलते यात्रियों को वेटिंग लिस्ट का सामना नहीं करना पड़ेगा। चलिए आपको इन ट्रेन की जानकारी दे देते हैं।
बटवा-हावड़ा समर स्पेशल
ये ट्रेन 20 और 26 अप्रैल को वटवा से 4 बजकर 45 मिनट पर निकलेगी और तीसरा दिन सुबह 9:00 हावड़ा पहुंचेगी।
वापसी में यह ट्रेन 22 और 28 अप्रैल को चलेगी। हावड़ा से यह शाम 7 बजे निकलेगी और तीसरे दिन दोपहर 12:15 पर वटवा पहुंचेगी।
साबरमती आसनसोल समर स्पेशल ट्रेन
ट्रेन नंबर 09431 20 26 अप्रैल को साबरमती से रात 10:55 पर निकलेगी और तीसरे दिन दोपहर 1:15 पर आसनसोल पहुंचेगी।
वापसी में यह ट्रेन 22 और 28 अप्रैल को चलाई जाएगी। ट्रेन संख्या 09432 शाम 4:20 पर आसनसोल से चलेगी और तीसरे दिन सुबह 7:15 पर साबरमती पहुंचेगी।
For the convenience of passengers and to meet the travel demand, Western Railway to run a pair of Special Trains between Valsad and Durgapur.
The booking date for Train no. 09143 will open from 20.04.2026 at all the PRS counters and IRCTC website.
For detailed information… pic.twitter.com/Yq7GruIQSB
— Western Railway (@WesternRly) April 19, 2026
क्या रहेगा रूट
ये समर स्पेशल ट्रेन रास्ते में पड़ने वाले सभी बड़े स्टेशन पर रुकेगी। इनमें यात्रा करने वाले यात्रियों को खास सुविधाएं दी जाएगी और किराया भी स्पेशल होगा। अगर आप भी इस रूट पर यात्रा का प्लान कर रहे हैं तो इन स्पेशल ट्रेनों के बारे में पता कर सकते हैं।
महाकुंभ की चर्चित हर्षा रिछारिया ने लिया सन्यास! बनीं ‘हर्षानंद गिरि’
एक समय सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बनाने वाली हर्षा रिछारिया अब पूरी तरह बदल चुकी हैं। प्रयागराज महाकुंभ में सुर्खियों में आईं यह चेहरा अब आध्यात्म के रास्ते पर चल पड़ा है।
अक्षय तृतीया जैसे शुभ दिन पर उज्जैन के मौनतीर्थ आश्रम में उन्होंने सन्यास लेकर नया जीवन शुरू किया। यह फैसला केवल एक व्यक्ति का निजी निर्णय नहीं, बल्कि आज के समय में आध्यात्म की ओर बढ़ते झुकाव की एक बड़ी मिसाल भी है।
हर्षा रिछारिया बनीं हर्षानंद गिरि
अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर हर्षा रिछारिया ने सन्यास लेकर अपने जीवन का नया अध्याय शुरू किया। पंचायती निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि महाराज ने उन्हें दीक्षा दी और नया नाम ‘हर्षानंद गिरि’ प्रदान किया। यह नाम केवल पहचान नहीं, बल्कि एक नई जिम्मेदारी और आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत का प्रतीक है।
सन्यास की पूरी प्रक्रिया
सन्यास लेना कोई साधारण प्रक्रिया नहीं होती, इसके पीछे गहरी धार्मिक परंपराएं और नियम होते हैं। हर्षानंद गिरि को भी सन्यास परंपरा के अनुसार शिखा और दंड की विधि कराई गई। इसके साथ ही तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध जैसे कर्म भी कराए गए। ये सभी विधियां इस बात का प्रतीक हैं कि व्यक्ति अपने पुराने सांसारिक जीवन को पूरी तरह त्याग कर नए आध्यात्मिक जीवन में प्रवेश कर रहा है।
हर्षानंद गिरि का संकल्प
सन्यास लेने के बाद हर्षानंद गिरि ने अपने जीवन के उद्देश्य को साफ शब्दों में बताया। उन्होंने कहा कि अब उनका पूरा जीवन धर्म, संस्कृति और समाज की सेवा के लिए समर्पित रहेगा। यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि एक बड़ा संकल्प है, जिसमें अनुशासन, त्याग और सेवा का मार्ग शामिल है।
महाकुंभ से मिली पहचान
हर्षा रिछारिया पहली बार प्रयागराज महाकुंभ के दौरान चर्चा में आई थीं। उस समय उन्हें निरंजनी अखाड़े की पेश्वाई में रथ पर बैठे देखा गया था, जिससे वह सोशल मीडिया और धार्मिक हलकों में चर्चा का विषय बन गईं। महाकुंभ के बाद से ही उनके आध्यात्मिक झुकाव की झलक मिलने लगी थी, जो अब सन्यास के रूप में सामने आई है।
सिंहस्थ 2028 से पहले बड़ा कदम
उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ 2028 से पहले उनका सन्यास लेना एक अहम संकेत माना जा रहा है। ऐसे बड़े धार्मिक आयोजनों से पहले साधु-संतों की संख्या और उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। हर्षानंद गिरि का इस समय सन्यास लेना उनके आध्यात्मिक सफर की गंभीरता को दर्शाता है।
ग्लैमर की दुनिया से दूरी
आज के समय में जब ज्यादातर लोग शोहरत और लाइमलाइट की ओर भागते हैं, ऐसे में हर्षा रिछारिया का यह फैसला अलग नजर आता है। उन्होंने सोशल मीडिया, मॉडलिंग और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया को छोड़कर पूरी तरह आध्यात्म को अपनाया है। यह बदलाव दिखाता है कि जीवन में कभी भी दिशा बदली जा सकती है और सही मार्ग चुना जा सकता है।
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