चीन में वीपीएन और विदेशी साइट्स की पहुंच पर लग सकती है रोक: रिपोर्ट
बीजिंग, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी नागरिक कई विदेशी ऑनलाइन साइट्स का एक्सेस खो सकते हैं, जहां से उन्हें पढ़ाई से जुड़ी जानकारी, बिना सेंसर की खबरें और मनोरंजन मिलता है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग खुद इस तरह की पहुंच को खत्म करने की मुहिम को बढ़ावा दे रहे हैं।
बिटर विंटर की रिपोर्ट के मुताबिक, चाइना डिजिटल टाइम्स ने कुछ अंदरूनी नोटिस साझा किए हैं, जिनसे चिंता बढ़ गई है कि जिन तरीकों से लोग अभी बिना सेंसर वाला इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें जल्द ही पूरी तरह ब्लॉक किया जा सकता है।
अभी तक लोग वीपीएन और एयरपोर्ट (राउटर से जुड़े खास डिवाइस) का इस्तेमाल करके खुले इंटरनेट तक पहुंच बना रहे थे, लेकिन एक टेलीकॉम पार्टनर ने एक क्षेत्रीय कंटेंट डिलीवरी कंपनी को निर्देश दिया है कि वे अपने बिजनेस क्लाइंट्स के लिए सभी अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन बंद कर दें। साथ ही, उनके कंट्रोल में आने वाले हर आईपी एड्रेस से चीन के बाहर जाने वाला ट्रैफिक ब्लॉक करना होगा।
इस नोटिस में यह भी कहा गया है कि ग्राहक अपने सिस्टम से वीपीएन, प्रॉक्सी या ऐसे किसी भी टूल के निशान हटा दें, जो पाबंदियों को बायपास करने में मदद करते हैं।
अगर कोई इन निर्देशों का पालन नहीं करता तो उसका कनेक्शन तुरंत काट दिया जाएगा, डेटा भी खो सकता है और कोई रिफंड नहीं मिलेगा।
एक और दस्तावेज के मुताबिक, उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बड़ी टेलीकॉम कंपनियों की बैठक बुलाई थी, जिसमें बिना अनुमति के देश के बाहर जाने वाले डेटा कनेक्शन पर और सख्ती करने की बात हुई। खास तौर पर डेडिकेटेड लाइनों पर ध्यान दिया गया, जिनसे बिना सरकारी मंजूरी के भी जानकारी देश के बाहर जा सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि चीन में वीपीएन से जुड़े नियम थोड़े अस्पष्ट हैं, और आम लोगों को अब तक सिर्फ कभी-कभी जुर्माना ही भरना पड़ा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह साफ नहीं है कि साइबर क्राइम कानून के नए ड्राफ्ट में इसे पूरी तरह अपराध बनाया जाएगा या नहीं, लेकिन हाल की सरकारी और कॉर्पोरेट नोटिस से लगता है कि बिना नए कानून के भी सख्ती बढ़ने वाली है।
अगर ये नए नियम पूरी तरह लागू होते हैं, तो ग्रेट फायरवॉल और भी मजबूत हो जाएगा, जिससे चीन का इंटरनेट एक बंद दुनिया जैसा बन जाएगा। और जैसा अक्सर होता है, इसका असर सबसे पहले आम लोगों पर ही पड़ेगा। उन पर जो सिर्फ सरकार की ओर से दिखाए गए कंटेंट से ज्यादा देखना और समझना चाहते हैं।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
सरकार ने एक दिन में 53.5 लाख एलपीजी सिलेंडर डिलीवर किए, 98 प्रतिशत बुकिंग डिजिटल माध्यम से हुईं
नई दिल्ली, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। भले ही पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने रविवार को कहा कि घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की डिलीवरी बिना किसी रुकावट के जारी है। एक ही दिन में 53.5 लाख से ज्यादा सिलेंडरों की डिलीवरी की गई, जिससे नागरिकों को ईंधन की निर्बाध उपलब्धता का भरोसा दिलाया गया है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, बुकिंग के मुकाबले घरेलू एलपीजी की डिलीवरी सामान्य बनी हुई है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 18 अप्रैल, 2026 को 53.5 लाख से अधिक घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की डिलीवरी की गई, और एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप पर सिलेंडरों की कमी की कोई रिपोर्ट नहीं मिली।
सरकार ने घरों तक सप्लाई को प्राथमिकता दी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मौजूदा संकट के दौरान खाना पकाने का जरूरी ईंधन उपलब्ध रहे।
डिजिटल माध्यमों को अपनाने में भी काफी बढ़ोतरी हुई है; लगभग 98 प्रतिशत एलपीजी बुकिंग ऑनलाइन की जा रही हैं, जबकि 93 प्रतिशत से अधिक डिलीवरी अब डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) के जरिए प्रमाणित की जा रही हैं ताकि सिलेंडरों का गलत इस्तेमाल या हेरफेर रोका जा सके।
सप्लाई के मोर्चे पर, सरकार ने घरेलू एलपीजी, पीएनजी और सीएनजी सेगमेंट के लिए 100 प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित की है।
कमर्शियल एलपीजी के लिए, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, दवा कंपनियों, स्टील, ऑटोमोबाइल और कृषि जैसे जरूरी क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर आवंटन दिया गया है।
इसके अलावा, प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलोग्राम वाले फ्री ट्रेड एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई दोगुनी कर दी गई है; यह फैसला मार्च महीने में खपत के पिछले पैटर्न के आधार पर लिया गया है।
एलपीजी की मांग पर दबाव कम करने के लिए, केरोसिन और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधन भी उपलब्ध कराए गए हैं। कोयला मंत्रालय ने कोल इंडिया और सिंगरेनी कोलियरीज जैसी प्रमुख कोयला उत्पादक कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे राज्यों को दिए जाने वाले कोयले के आवंटन में बढ़ोतरी करें, ताकि छोटे और मध्यम उपभोक्ताओं तक इसकी सप्लाई सुनिश्चित हो सके।
राज्यों को यह सलाह भी दी गई है कि वे घरेलू और कमर्शियल, दोनों तरह के उपभोक्ताओं के लिए नए पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराने में मदद करें।
कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई बढ़ाकर संकट से पहले के स्तर का लगभग 70 प्रतिशत कर दिया गया है, जिसमें सुधारों से जुड़े आवंटन भी शामिल हैं।
मार्च के मध्य से अब तक, 1.67 लाख मीट्रिक टन से अधिक कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई की जा चुकी है, जो 19 किलोग्राम वाले 88 लाख से अधिक सिलेंडरों के बराबर है।
इस बीच, ऑटो एलपीजी की मांग में भी तेजी आई है; अप्रैल महीने में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों की औसत दैनिक बिक्री में फरवरी के मुकाबले काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सरकार ने कहा कि वह स्थिति पर लगातार बारीकी से नजर रखे हुए है, और घरेलू बाजारों में स्थिरता बनाए रखते हुए ऊर्जा की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
--आईएएनएस
एससीएच
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