भारतीय जहाजों पर फायरिंग के बाद बलूच नेता ने पाकिस्तान की भूमिका पर उठाए सवाल, क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंता
नई दिल्ली, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के ट्रांजिट को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। बीते दिन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की तरफ से भारत का झंडा लगे हुए दो जहाजों पर गोलीबारी की घटना सामने आने के बाद बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने ईरान की आलोचना की।
मीर यार बलूच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, बलूचिस्तान रिपब्लिक उस फायरिंग की घटना की कड़ी निंदा करता है जिसमें ईरान की नेवी ने दो भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से पश्चिम की ओर धकेल दिया था। कमर्शियल शिपिंग, खासकर भारतीय झंडे वाले वीएलसीसी सुपरटैंकर के खिलाफ बल का इस्तेमाल एक खतरनाक बढ़ोतरी दिखाता है। यह इलाके की स्थिरता और जरूरी ग्लोबल ट्रेड रूट की सुरक्षा के लिए खतरा है। घटना के दौरान भारतीय झंडे वाला सुपरटैंकर लगभग 2 मिलियन बैरल इराकी तेल ले जा रहा था।
बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता ने हाल ही में पाकिस्तान के जनरल असीम मुनीर के ईरान दौरे का जिक्र करते हुए कहा, यह घटना खास तौर पर चिंता की बात है क्योंकि यह घटना तेहरान से आसिम मुनीर के लौटने के कुछ ही समय बाद हुई। इस तरह की घटनाओं से समुद्री तनाव को बढ़ाने में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं, जबकि वह खुद को अमेरिका और ईरान के बीच शांति और सीजफायर के लिए एक मध्यस्थ के तौर पर पेश कर रहा है।
बीते दिन भारतीय झंडे वाले जहाजों पर हुई गोलीबारी के बाद भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली को विदेश सचिव विक्रम मिस्री के साथ बैठक के लिए बुलाया गया था।
बैठक के दौरान, भारत ने घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की, हालांकि टैंकर और चालक दल सुरक्षित बताए जा रहे हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता द्वारा शनिवार शाम जारी एक बयान में कहा गया है कि नई दिल्ली में स्थित ईरान के राजदूत को विदेश मंत्रालय ने विदेश सचिव के साथ बैठक के लिए बुलाया था। बैठक के दौरान विदेश सचिव ने होर्मुज में हुई इस घटना पर भारत की गहरी चिंता व्यक्त की।
बयान में आगे कहा गया कि उन्होंने व्यापारिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को भारत द्वारा दिए जाने वाले महत्व को रेखांकित किया और याद दिलाया कि ईरान ने पहले भी भारत आने वाले कई जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान किया था।
व्यापारिक जहाजों पर गोलीबारी की इस गंभीर घटना पर अपनी चिंता दोहराते हुए विदेश सचिव ने राजदूत से आग्रह किया कि वे ईरान के अधिकारियों को भारत का दृष्टिकोण बताएं और स्ट्रेट से भारत आने वाले जहाजों को सुगम बनाने की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पुनः आरंभ करें।
--आईएएनएस
केके/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
गौतम अदाणी ने अक्षय तृतीया पर तरंगा जैन मंदिर में पूजा की
मेहसाणा, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी और उनकी पत्नी डॉ. प्रीति अदाणी अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर रविवार को गुजरात के तरंगा पहाड़ियों में स्थित अजीतनाथ भगवान श्वेतांबर जैन देरासर मंदिर गए और वहां पूजा की।
मेहसाणा जिले के खेरालू तालुका में स्थित दाभोड़ा हेलीपैड पर सुबह लगभग 7:45 बजे पहुंचने पर, दंपति का जैन समुदाय के सदस्यों ने स्वागत किया और फिर वे पहाड़ी मंदिर की ओर रवाना हुए। मंदिर में श्रद्धालु सुबह से ही इकट्ठा होना शुरू हो गए थे, क्योंकि यह दिन विभिन्न परंपराओं में विशेष रूप से पवित्र माना जाता है।
जैन धर्म के दूसरे तीर्थंकर भगवान अजितनाथ को समर्पित यह मंदिर 12वीं शताब्दी का है और सोलंकी शासक राजा कुमारपाल से जुड़ा हुआ है। यह जैन समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना जाता है।
गौतम अदाणी ने मंदिर परिसर में समय बिताने से पहले गर्भगृह में प्रार्थना की। इस दौरान अदाणी दंपति ने कैंटीन का भी संक्षिप्त दौरा किया, जहां तीर्थयात्री अपनी यात्रा के दौरान एकत्रित होते हैं।
इस यात्रा के दौरान, अदाणी ने मंदिर के न्यासी सचिन अशोकभाई शाह से मुलाकात की और तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाओं में सुधार लाने की योजनाओं पर चर्चा की, जिसमें मंदिर की स्थापत्य और आध्यात्मिक अखंडता को संरक्षित करते हुए पहुंच और सुविधाओं को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
अक्षय तृतीया को हिंदू और जैन पंचांगों में सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है, जो समृद्धि, नई शुरुआत और दान-पुण्य से जुड़ा है। जैन परंपरा में, यह वह दिन है जब ऋषभनाथ ने लंबे उपवास के बाद अपना पहला दान ग्रहण किया था, जिससे तपस्वियों को भोजन देने की प्रथा की स्थापना हुई।
इससे पहले हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर, अदाणी और उनके परिवार ने भारत के सबसे प्रमुख हिंदू तीर्थ स्थलों में से एक, अयोध्या के राम मंदिर में पूजा-अर्चना की थी।
--आईएएनएस
एबीएस/
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