PM Modi Foreign Visits 2026: प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरों पर कितना हुआ खर्च? राज्यसभा में सरकार ने दिया पूरा ब्यौरा
PM Modi Foreign Visits 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2026 के विदेश दौरों पर हुए खर्च का आधिकारिक ब्यौरा सरकार ने राज्यसभा में पेश किया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस साल अब तक पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर करीब 74.5 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। सरकार ने इसी जवाब में अप्रैल 2021 से दिसंबर 2025 के बीच भारत में आए 381.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के आंकड़े भी साझा किए।
2026 में पीएम मोदी के विदेश दौरों पर कितना हुआ खर्च?
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों पर लगभग 74.5 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। यह जानकारी गुरुवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब के जरिए साझा की गई। सरकार ने साल-वार और यात्रा-वार खर्च का ब्यौरा भी सदन में रखा है।
राज्यसभा में किस सवाल के जवाब में सरकार ने यह जानकारी दी?
राज्यसभा में सांसद संजय सिंह और डॉ. वी. शिवदासन ने 2021 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों का देशवार और यात्रा-वार खर्च, इन दौरों के दौरान हुए समझौतों (MoUs) और उनसे जुड़े प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का विवरण मांगा था। इसके जवाब में विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा ने लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
पीएम मोदी के विदेश दौरों को लेकर सरकार ने क्या कहा?
सरकार ने कहा कि प्रधानमंत्री की उच्च-स्तरीय विदेश यात्राएं भारत के द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक संबंधों को मजबूत करने का अहम माध्यम हैं। इन दौरों के दौरान हुए समझौतों से टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, व्यापार एवं निवेश, रक्षा, ऊर्जा सहयोग और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को बढ़ावा मिला है।
अप्रैल 2021 से भारत को कितना FDI मिला?
सरकार के अनुसार, अप्रैल 2021 से दिसंबर 2025 के बीच भारत को 381.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्राप्त हुआ। यह आंकड़ा पूरे देश में इस अवधि के दौरान आए कुल FDI को दर्शाता है।
क्या किसी विदेश दौरे से जुड़े FDI का अलग-अलग ब्यौरा दिया गया?
नहीं। सरकार ने यह नहीं बताया कि किसी विशिष्ट विदेश दौरे, समझौता ज्ञापन (MoU) या निवेश वादे के जरिए कितना FDI प्राप्त हुआ। राज्यसभा में साझा किया गया 381.8 बिलियन डॉलर का आंकड़ा अप्रैल 2021 से दिसंबर 2025 के बीच भारत में आए कुल FDI का है।
UPA सरकार के दौर की विदेश यात्राओं के खर्च से कैसे हुई तुलना?
विदेश मंत्रालय ने अपने जवाब में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल के कुछ विदेश दौरों का खर्च भी बताया। सरकार के अनुसार, ये उस समय के वास्तविक खर्च हैं और इनमें महंगाई या मुद्रा विनिमय दर में बदलाव का कोई समायोजन नहीं किया गया है।
- 2011: अमेरिका यात्रा - 10.74 करोड़ रुपये
- 2013: रूस यात्रा - 9.96 करोड़ रुपये
- 2011: फ्रांस यात्रा - 8.33 करोड़ रुपये
- 2013: जर्मनी यात्रा - 6.02 करोड़ रुपये
कुल मिलाकर, राज्यसभा में सरकार के जवाब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों पर हुए खर्च और भारत में आए कुल FDI के आधिकारिक आंकड़े सामने आए हैं। हालांकि, सरकार ने किसी विशेष विदेश दौरे या MoU के बदले मिले निवेश का अलग-अलग ब्योरा साझा नहीं किया है। ऐसे में इन विदेश यात्राओं के प्रत्यक्ष आर्थिक प्रभाव का स्वतंत्र आकलन इन आंकड़ों के आधार पर नहीं किया जा सकता।
FAQ
Q1. 2026 में पीएम मोदी के विदेश दौरों पर कितना खर्च हुआ?
Ans: विदेश मंत्रालय के अनुसार, 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों पर लगभग 74.5 करोड़ रुपये खर्च हुए।
Q2. यह जानकारी कहां दी गई?
Ans: विदेश मंत्रालय ने राज्यसभा में सांसद संजय सिंह और डॉ. वी. शिवदासन के सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी।
Q3. अप्रैल 2021 से भारत को कितना FDI मिला?
Ans: सरकार के अनुसार, अप्रैल 2021 से दिसंबर 2025 के बीच भारत को 381.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्राप्त हुआ।
Q4. क्या सरकार ने बताया कि किस विदेश दौरे से कितना FDI आया?
Ans: नहीं। सरकार ने किसी विशेष विदेश दौरे, MoU या निवेश वादे को FDI से सीधे नहीं जोड़ा। केवल कुल FDI का आंकड़ा साझा किया गया।
CJP Campaign: CJP की कोर टीम की बैठक, संस्थापक अभिजीत दीपके ने बेरोजगारी के खिलाफ देशव्यापी अभियान का किया ऐलान
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में CJP की कोर टीम की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसके बाद संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने देश में बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे एक देशव्यापी मुद्दा बनाने का बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में छात्रों के साथ-साथ जिस बड़ी संख्या में बेरोजगार युवाओं ने हिस्सा लिया, उसने इस समस्या की गंभीरता को पूरी तरह उजागर कर दिया है।
दीपके के अनुसार, देश में विकराल रूप लेती बेरोजगारी अब किसी एक व्यक्ति की निजी समस्या नहीं रही, बल्कि यह पूरे राष्ट्र के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।
Chhatrapati Sambhajinagar, Maharashtra: Cockroach Janta Party (CJP) founder Abhijeet Dipke announced a nationwide public outreach campaign beginning in September and urged citizens, particularly the youth, to join CJP and become part of the movement pic.twitter.com/3ez5mkqFV7
— IANS (@ians_india) August 6, 2026
#WATCH | Chhatrapati Sambhaji Nagar, Maharashtra | Cockroach Janta Party (CJP) Founder Abhijeet Dipke says, "Institutional accountability is in a dangerous situation in our country today. This is a dangerous sign for our democracy. Earlier, voters used to choose a government.… pic.twitter.com/W1kMLjWtI9
— ANI (@ANI) August 6, 2026
जंतर-मंतर के प्रदर्शन का संदेश और देशव्यापी अभियान की रूपरेखा
अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन ने यह संदेश दे दिया है कि रोजगार की मांग केवल छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के हर वर्ग के युवा को प्रभावित कर रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए CJP ने इस मुद्दे को देश के हर राज्य और हर जिले तक पहुंचाने का फैसला किया है।
#WATCH | Chhatrapati Sambhaji Nagar, Maharashtra | On being asked if he will start a political party, Cockroach Janta Party (CJP) Founder Abhijeet Dipke says, "Our movement was successful because people rose above their own ideologies and political party lines to come together… pic.twitter.com/xQqgNBjzKk
— ANI (@ANI) August 5, 2026
इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए संगठन की ओर से विभिन्न स्थानों पर बैठकें, जनसंवाद, युवा सम्मेलन और जनजागरण अभियान चलाए जाएंगे। उनका मानना है कि जब तक इस ज्वलंत मुद्दे पर सरकार के खिलाफ व्यापक जनदबाव नहीं बनाया जाएगा, तब तक इसका ठोस समाधान निकलना बहुत कठिन होगा।
युवाओं से शांतिपूर्ण एकजुटता की अपील और नीति निर्माण में बदलाव की मांग
देश के युवाओं से आह्वान करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि उन्हें अपने अधिकारों और रोजगार के हक के लिए शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक तरीके से एकजुट होना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण और देश के विकास में युवा रीढ़ की हड्डी समान हैं, इसलिए उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना सरकार की सबसे पहली और मुख्य जिम्मेदारी होनी चाहिए।
उन्होंने पूरा विश्वास जताया कि यदि देश का युवा वर्ग संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद करेगा, तो सरकार को विवश होकर बेरोजगारी को राष्ट्रीय नीति निर्माण के केंद्र में लाना ही होगा।
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