अगरकर का कार्यकाल बढ़ा, 2027 वनडे वर्ल्डकप तक टीम चुनेंगे:इनके रहते में भारत ने 3 ICC खिताब जीते; रोहित-कोहली जैसे दिग्गजों का संन्यास
BCCI ने चीफ सिलेक्टर अजित अगरकर का कार्यकाल एक साल बढ़ा दिया है। अब वे 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप तक इस पद पर बने रहेंगे। BCCI के एक वरिष्ठ अधिकारी ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया कि अगरकर का कार्यकाल रिन्यू किया गया है, एक्सटेंड नहीं। वे अपनी परफॉर्मेंस के आधार पर चौथे साल के लिए पद पर बने रहेंगे। BCCI के नियमों के मुताबिक, सिलेक्टर अधिकतम चार साल तक पद पर रह सकता है। इससे पहले मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि अगरकर ने खुद BCCI से अपना कार्यकाल 2027 वनडे वर्ल्ड कप बढ़ाने की मांग की थी। बोर्ड ने 2023 में दो साल के लिए अगरकर को चीफ सिलेक्टर बनाया था। 2025 में उन्हें पहले ही एक साल का एक्सटेंशन मिल चुका था। अब उनका कार्यकाल 2027 तक के लिए रिन्यू किया जा रहा है। इस तरह अगरकर कुल चार साल चीफ सिलेक्टर रहेंगे। कार्यकाल में भारत के नाम दो टी-20 वर्ल्ड कप और एक चैंपियंस ट्रॉफी अजित अगरकर का अब तक का कार्यकाल बेहद सफल रहा। अक्टूबर 2023 से मार्च 2026 के बीच उनके द्वारा चुनी गई भारतीय टीमों ने चार ICC टूर्नामेंट्स के फाइनल में जगह बनाई। इनमें से भारत ने तीन खिताब अपने नाम किए। 2024 और 2026 में दो टी-20 वर्ल्ड कप और 2025 में ICC चैंपियंस ट्रॉफी। इसके अलावा, टीम इंडिया 2023 के वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में भी पहुंची थी, जहां उसे ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार का सामना करना पड़ा। कोहली-रोहित के संन्यास और शमी को बाहर करने जैसे कड़े फैसले अगरकर की अगुवाई वाली कमेटी ने कई कड़े और बड़े फैसले लिए। इसमें सबसे प्रमुख विराट कोहली और रोहित शर्मा के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की प्रक्रिया को संभालना और सीनियर तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से बाहर करना था। वहीं 2026 टी-20 वर्ल्ड कप टीम से टेस्ट और वनडे कैप्टन शुभमन गिल को ड्रॉप करके ईशान किशन जैसे इन-फॉर्म खिलाड़ी को मौका देने जैसे बड़े फैसले भी लिए। 2027 वनडे वर्ल्ड कप के लिए कंटिन्यूटी पर फोकस अगला वनडे वर्ल्ड कप 2027 में होना है। BCCCI चाहता है कि टीम की कोर और चयन प्रक्रिया में स्थिरता बनी रहे। अगरकर का कार्यकाल बढ़ने का मतलब है कि वे अगले वर्ल्ड कप के लिए टीम तैयार करने के मिशन पर काम जारी रखेंगे। बोर्ड का मानना है कि इस समय चयन समिति के नेतृत्व में बदलाव करना टीम की लय को बिगाड़ सकता है। 349 इंटरनेशनल विकेट ले चुके हैं अगरकर करियर में 349 इंटरनेशनल विकेट ले चुके हैं। उन्होंने टेस्ट में 58, वनडे में 288 और टी-20 इंटरनेशनल में 3 विकेट लिए हैं। देखें उनके 3 रिकॉर्ड्स...
वर्ल्ड नंबर-1 आर्यना सबालेंका ने कराया फोटोशूट:टेनिस की ‘शेरनी’ का ग्लैमरस अवतार, कहा- खिलाड़ी न होती तो मॉडल बनती
टेनिस कोर्ट पर अपनी चीखों और विरोधी को चीरते बेसलाइन शॉट्स के लिए मशहूर वर्ल्ड नंबर-1 आर्यना सबालेंका इन दिनों एक अलग ही अवतार में नजर आ रही हैं। हाल ही में ‘एस्क्वायर’ मैगजीन की कवर स्टार बनीं बेलारूस की सबालेंका ने बेहद ग्लैमरस फोटोशूट कराया है। नीले रंग के विशालकाय फर कोट और हाई हील्स में उनकी तस्वीरें काफी वायरल हो रही हैं। इस दौरान दिए इंटरव्यू में 27 साल की सबालेंका ने खुद को दोहरी शख्सियत वाली इंसान बताया। उन्होंने कहा, ‘कोर्ट पर मैं बहुत आक्रामक और भावुक होती हूं। यह मेरे खेल की जरूरत है, लेकिन कोर्ट से बाहर मैं बिल्कुल अलग इंसान हूं, जो शांत है, जिसे गले मिलना पसंद है और जो शांति की तलाश में है।’ जब उनसे पूछा गया कि अगर वह टेनिस खिलाड़ी नहीं होतीं तो क्या करतीं? इस पर सबालेंका कहा, ‘शायद बॉक्सिंग या फिर मॉडलिंग। शायद प्लस-साइज मॉडल! मैं उसमें बहुत अच्छी होती। मुझे अपनी आक्रामकता निकालने के लिए जीवन के अंत तक कुछ न कुछ ऐसा करना होगा जिसमें बहुत ऊर्जा लगे।’ फाइटिंग स्पिरिट पिता की देन सबालेंका की इस फाइटिंग स्पिरिट के पीछे पिता सर्गेई का हाथ है, जो खुद एक पेशेवर हॉकी खिलाड़ी थे। साल 2019 में मात्र 43 साल की उम्र में मेनिन्जाइटिस के कारण उनका अचानक निधन हो गया था। सबालेंका ने कहा, ‘मेरे पिता ने मुझे सिखाया कि चाहे कुछ भी हो जाए, मजबूत रहना है, सकारात्मक रहना है और जीवन में मस्ती करना नहीं छोड़ना है। जब मैंने उन्हें खोया, तब टेनिस ने ही मुझे बचाया। अगर टेनिस नहीं होता, तो पता नहीं आज मैं कहां होती।’ रोना-भावनाओं को बाहर निकालना जरूरी सबालेंका के अनुसार, दुख से उबरने का सबसे अच्छा तरीका है खुद को काम में झोंक देना, लेकिन साथ ही रोना और अपनी भावनाओं को बाहर निकालना भी जरूरी है। इंटरव्यू में सबालेंका ने 2022 के उस दौर का भी जिक्र किया, जब वे सर्विस करना भूल गई थी। उन्होंने इसे एक बुरा सपना बताया। उन्होंने कहा, ‘कल्पना कीजिए, आप जीवन भर एक ही काम कर रहे हैं और अचानक एक दिन आप गेंद को सही से फेंक भी नहीं पा रहे। वह समय इतना कठिन था कि मैं हार मानने वाली थी। लेकिन उस दौर ने मुझे इतना मजबूत बनाया कि अब मुझे भरोसा है कि अगर मेरी सर्विस खराब भी हो जाए, तब भी मैं मैच जीत सकती हूं।’
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 















.jpg)






