भारत का बैंकिंग सेक्टर मजबूत, एसेट क्वालिटी और क्रेडिट मांग से मिल रहा सपोर्ट : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत का बैंकिंग सेक्टर मजबूत बना हुआ है और इसे एसेट क्वालिटी में सुधार, मजबूत कैपिटल बेस, रिटेल और एसएमई क्षेत्र में क्रेडिट की मांग और निजी पूंजीगत खर्च में रिकवरी से सपोर्ट मिल रहा है। यह जानकारी एक सर्वेक्षण में रविवार को दी गई।
फिक्की और इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) के सर्वेक्षण में कहा गया है कि निकट भविष्य में बैंकिंग क्षेत्र में वृद्धि को लेकर दृष्टिकोण व्यापक रूप से सकारात्मक है, जिसे मजबूत बैलेंस शीट, स्थिर आर्थिक गतिविधियों और अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर मांग का समर्थन प्राप्त है।
सर्वेक्षणकर्ताओं का मानना है कि आने वाले महीनों में वर्तमान मौद्रिक नीति व्यापक रूप से स्थिर रहेगी, जिससे संकेत मिलता है कि मौजूदा नीतिगत ढांचा विकास और मुद्रास्फीति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए उपयुक्त रूप से समायोजित है।
सर्वेक्षण में केवल सहकारी बैंकों के सभी उत्तरदाताओं ने 25 आधार अंकों की ब्याज दर वृद्धि की उम्मीद जताई।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि क्रेडिट मांग को लेकर उम्मीदें सकारात्मक बनी हुई हैं, और बैंक नॉन-फूड क्रेडिट मांग में निरंतर वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं।
वहीं,सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसबी) भविष्य को लेकर विशेष रूप से आश्वस्त दिखाई देते हैं, जो बेहतर एसेट क्वालिटी, मजबूत पूंजी स्थिति और कॉरपोरेट लोन में बढ़ती रुचि को दर्शाता है।
सर्वेक्षण में निजी बैंकों ने क्रेडिट वृद्धि के प्रति संतुलित और चयनात्मक दृष्टिकोण प्रदर्शित किया, जबकि विदेशी बैंकों ने कॉरपोरेट और संस्थागत क्षेत्रों में अपने केंद्रित निवेश के अनुरूप मध्यम आशावाद दिखाया।
क्षेत्रीय रूप से, सेवा और खुदरा क्षेत्रों से लोन मांग क्रेडिट वृद्धि का एक प्रमुख चालक बने रहने की उम्मीद है। सेवा क्षेत्र के दृष्टिकोण में विस्तार की मजबूत उम्मीदें झलकती हैं, जिन्हें रियल एस्टेट, वित्तीय सेवाओं, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन से संबंधित उद्योगों की गतिविधियों का समर्थन प्राप्त है।
लगभग 46 प्रतिशत प्रतिभागियों को उम्मीद है कि कुल नॉन-फूड क्रेडिट वृद्धि 11 प्रतिशत से 13 प्रतिशत के बीच रहेगी।
रिटेल लोन भी मजबूत रहने का अनुमान है, जो बैंकिंग क्षेत्र के विकास के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में इसकी भूमिका को और मजबूत करेगा।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) के लिए लोन की मांग विशेष रूप से मजबूत रहने की उम्मीद है, क्योंकि सर्वेक्षण में शामिल लोगों ने इस क्षेत्र में निरंतर विस्तार के प्रति उच्च विश्वास व्यक्त किया है। यह छोटे उद्यमों में बेहतर व्यावसायिक गतिविधि, क्रेडिट चैनलों के अधिक औपचारिक होने और एमएसएमई के विकास को समर्थन देने पर नीतिगत जोर को दर्शाता है।
बैंकों ने साइबर सुरक्षा जोखिम को अपने सामने सबसे बड़ी चुनौती बताया। जनवरी से फरवरी 2026 के बीच किए गए इस सर्वेक्षण में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, निजी क्षेत्र के बैंकों, विदेशी बैंकों, लघु वित्त बैंकों और सहकारी बैंकों सहित कुल 24 बैंकों ने भाग लिया।
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एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
क्या है 'कॉमन योग प्रोटोकॉल'? जो शरीर को रखते हैं चुस्त-दुरुस्त और तंदुरुस्त
नई दिल्ली, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस अब कुछ ही हफ्तों दूर है। 21 जून 2026 को मनाए जाने वाले इस विशेष दिन की तैयारी शुरू करने का यह सबसे अच्छा समय है। अगर आप योग की दुनिया में नए हैं या अपनी दिनचर्या में योग शामिल करना चाहते हैं, तो कॉमन योग प्रोटोकॉल (सीवाईपी) से बेहतर शुरुआत और कुछ नहीं हो सकता।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इसे विशेष रूप से शुरुआती लोगों के लिए डिजाइन किया है। यह प्रोटोकॉल शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखने और मन को तंदुरुस्त बनाने का आसान और प्रभावी तरीका है। सबसे पहले जानते हैं कि कॉमन योग प्रोटोकॉल क्या है?
कॉमन योग प्रोटोकॉल (सीवाईपी) एक मानकीकृत 45 मिनट का योग अभ्यास कार्यक्रम है। इसे सभी उम्र के लोगों के लिए आसान बनाया गया है। इसका उद्देश्य योग को आम लोगों तक पहुंचाना है ताकि वे स्वास्थ्य, शांति और सद्भाव का लाभ उठा सकें। इसे ब्रेथ, स्ट्रेच और ट्रांसफॉर्म के सिद्धांत पर आधारित कहा जाता है- यानी सांस की सही प्रक्रिया, शरीर की मांसपेशियों को खींचना और इससे व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव लाना।
यह प्रोटोकॉल मुख्य रूप से चार चरणों में बांटा गया है, जो शरीर को लचीला बनाने और योगासन करने के लिए तैयार करते हैं। पहला है आगे और पीछे झुकना व खिंचाव, यह शरीर के सामने और पीछे की मांसपेशियों को स्ट्रेच करता है। दूसरा है दाईं और बाईं ओर झुकना व खिंचाव, जो कमर और साइड की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। तीसरा दाईं-बाईं ओर घुमाव है, जो गर्दन, कंधे और शरीर को घुमाकर जोड़ों की लचीलापन को बढ़ाता है। चौथा है गर्दन को चारों ओर घुमाना, जो गर्दन की मांसपेशियों को आराम देता है।
इनके बाद चालन क्रियाएं या शिथिलिकरण यानी लूजिंग प्रैक्टिस की जाती है। इसमें ग्रीवा चालन (गर्दन), कंधों का संचालन, कटि चालन (कमर) और घुटनों का संचालन शामिल है। ये क्रियाएं शरीर के उन जोड़ों को लचीला बनाती हैं जो योगासन के दौरान ज्यादा काम में आते हैं। नियमित अभ्यास से सर्वाइकल की समस्या, तनाव, शरीर में खिंचाव, पीठ दर्द और सांस की परेशानियां कम होती हैं। साथ ही मन शांत होता है, एकाग्रता बढ़ती है और स्वास्थ्य सुधरता है। इन क्रियाओं को 5 से 10 बार दोहराना चाहिए। खड़े होकर या बैठकर दोनों तरीकों से किया जा सकता है।
--आईएएनएस
एमटी/एएस
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