नौकरी में ग्रोथ चाहिए? अक्षय तृतीया पर पहनें माणिक्य, मिलेगा सूर्य का आशीर्वाद
अक्षय तृतीया हिंदू धर्म का ऐसा पर्व है, जिसे सबसे शुभ दिनों में गिना जाता है। इस दिन किए गए हर शुभ कार्य का फल कभी खत्म नहीं होता। इसलिए लोग इस दिन सोना-चांदी खरीदते हैं, पूजा करते हैं और नई शुरुआत करते हैं।
लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अक्षय तृतीया सिर्फ खरीदारी का दिन नहीं है, बल्कि यह जीवन की समस्याओं को दूर करने का भी सुनहरा मौका होता है। खासकर अगर आपकी कुंडली में सूर्य कमजोर है या नौकरी में बार-बार परेशानी आ रही है, तो यह दिन आपके लिए बेहद खास साबित हो सकता है।
कमजोर सूर्य क्यों बनता है परेशानी का कारण?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली में सूर्य का मजबूत होना बहुत जरूरी माना जाता है। सूर्य आत्मविश्वास, करियर, पद और सम्मान का कारक होता है। जब सूर्य कमजोर होता है, तो व्यक्ति को नौकरी में स्थिरता नहीं मिलती। कई बार मेहनत के बावजूद सफलता हाथ नहीं लगती। ऐसे लोगों को बार-बार नौकरी बदलनी पड़ती है या प्रमोशन में देरी होती है। इतना ही नहीं, कमजोर सूर्य होने पर पिता से संबंध भी कमजोर हो सकते हैं और जीवन में मानसिक तनाव बढ़ सकता है। इसलिए सूर्य को मजबूत करना बहुत जरूरी होता है।
अक्षय तृतीया पर माणिक्य पहनना क्यों होता है शुभ?
ज्योतिष के अनुसार, माणिक्य रत्न सूर्य ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। इसमें सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा होती है, जो व्यक्ति के जीवन में आत्मविश्वास और सफलता लाती है। इस साल अक्षय तृतीया पर कई शुभ योग बन रहे हैं, जैसे अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और गजकेसरी योग। इसके साथ ही यह दिन रविवार को पड़ रहा है, जो सूर्य देव को समर्पित होता है। ऐसे खास संयोग में माणिक्य धारण करने से इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। इससे नौकरी में आ रही समस्याएं दूर हो सकती हैं और करियर में नई शुरुआत हो सकती है।
माणिक्य रत्न कैसे बदल सकता है आपकी किस्मत?
जब कोई व्यक्ति माणिक्य रत्न धारण करता है, तो धीरे-धीरे उसके जीवन में बदलाव आने लगते हैं। सबसे पहले उसका आत्मविश्वास बढ़ता है। काम करने की ऊर्जा और उत्साह में सुधार होता है। इसके साथ ही निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत होती है। नौकरी में आ रही अड़चनें कम होती हैं और नई संभावनाएं सामने आती हैं। कई लोगों को बेहतर नौकरी के अवसर भी मिलते हैं। इसके अलावा समाज में सम्मान बढ़ता है और व्यक्ति का व्यक्तित्व भी निखरने लगता है। यही कारण है कि माणिक्य को सफलता का रत्न माना जाता है।
अक्षय तृतीया पर माणिक्य पहनने की सही विधि
माणिक्य धारण करने से पहले सही विधि जानना बहुत जरूरी है, ताकि इसका पूरा लाभ मिल सके। रविवार के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें। फिर माणिक्य रत्न को गंगाजल या कच्चे दूध से शुद्ध करें। इसके बाद सूर्य मंत्र का 108 बार जाप करें,
“ॐ ह्राम् ह्रीम् ह्रौं सः सूर्याय नमः” जाप पूरा होने के बाद इस रत्न को दाहिने हाथ की अनामिका उंगली में धारण करें। ध्यान रखें कि माणिक्य कम से कम 5 से 7 रत्ती का होना चाहिए।
कौन लोग जरूर अपनाएं यह उपाय?
अगर आप नौकरी में परेशान हैं, प्रमोशन नहीं मिल रहा या बार-बार असफलता मिल रही है, तो यह उपाय आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। जिन लोगों का आत्मविश्वास कमजोर है या जो करियर में ठहराव महसूस कर रहे हैं, उन्हें अक्षय तृतीया पर माणिक्य जरूर धारण करना चाहिए। हालांकि, किसी भी रत्न को पहनने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी होता है, ताकि यह आपके लिए सही साबित हो।
Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।
समय रैना के नाना को मारने की धमकी मिली थी:आतंकियों की हिट लिस्ट में थे, स्थानीय कश्मीरी मुसलमानों ने जान बचाई थी
कॉमेडियन समय रैना ने हाल ही में बताया कि 1990 के दशक में कश्मीर में उग्रवाद के दौरान उनके नाना को जान से मारने की धमकी मिली थी। हालांकि, स्थानीय कश्मीरी मुसलमानों की मदद के चलते उनकी जान बच गई थी। समय ने ‘दॉस्टकास्ट’ यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में कश्मीर में उग्रवाद और कश्मीरी पंडितों के पलायन के प्रभाव पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि उनके परिवार को भी रातोंरात कश्मीर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। कॉमेडियन ने बताया, उनके नाना सोमनाथ कौल एक जाने-माने डॉक्टर थे और उनका नाम आतंकियों की हिट लिस्ट में था। उन्हें जान से मारने के लिए चिट्ठी जारी की गई थी। चिट्ठी में लिखा गया था- ‘यहां से चले जाओ, नहीं तो कल जान ले लेंगे।’ इस घटना के बाद समय का परिवार बहुत डर गया था। हालांकि, समय ने यह भी बताया कि उनके नाना की इलाके में बहुत इज्जत थी। वो कई लोगों का मुफ्त इलाज करते थे, इसलिए लोग उन्हें बहुत मानते थे। इसलिए वहां के कश्मीरी मुसलमानों ने उनके नाना को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की। उन्होंने आतंकियों को कहा था कि वह उनके साथ ऐसा नहीं कर सकते। लेकिन आतंकवादियों ने समय के परिवार को तुरंत कश्मीर छोड़ने के लिए कहा। जिसके बाद रातों-रात सबने अपना सामान एक वैन में रखा और घर छोड़ दिया। उन्होंने अपने बचपन पर पड़े असर का जिक्र करते हुए कहा कि इस घटना ने उनकी पहचान और मानसिक स्थिति पर गहरा प्रभाव डाला। उन्होंने कहा कि उनकी पीढ़ी आज भी कश्मीर जाने में डर महसूस करती है। रैना ने यह भी बताया कि उनकी मां जब कई साल बाद कश्मीर गईं, तो वहां की बदली परिस्थितियां देखकर इमोशनल हो गईं और रो पड़ीं।
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