Akshaya Tritiya 2026: आज है अक्षय तृतीया का पावन पर्व, जानें खरीदारी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
Akshaya Tritiya 2026: सनातन धर्म में वैशाख मास को परम कल्याणकारी मास माना जाता है. इस महीने के हर दिन को पर्व की तरह मनाया जाता है. वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया पर्व मनाया जाता है. इस दिन भगवान लक्ष्मीनारायण की शास्त्र विधि से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इस तिथि को खरीदारी करने का विशेष महत्व बताया गया है. अक्षय तृतीया पर सोना-चांदी, तांबा आदि शुभ धातुएं खरीदने से माता लक्ष्मी की कृपा मिलती है. घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है.
अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त भी माना जाता है. इस तिथि में किसी भी शुभ काम को करने के लिए मुहूर्त दिखने की जरुरत नहीं होती है. अक्षय तृतीया पर किए गये विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार, जनेऊ संस्कार, नया व्यापार शुरु करना बेहद शुभ माना जाता है. इस साल अक्षय तृतीया पर बेहद शुभ संयोग बन रहे हैं. ज्योतिष और धर्म के नजरिए से इस साल पूजा-पाठ, दान और खरीदारी करने से कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होगी. आइए जानते हैं इस साल क्या शुभ संयोग बन रहे हैं. किस मुहूर्त में पूजा और खरीदरी करें
अक्षय तृतीया की पूजा का मुहूर्त (Akshaya Tritiya 2026 Puja Shubh Muhurat)
अक्षय तृतीया पर्व पर शुभ मुहूर्त में पूजा करने पर ही पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है. 19 अप्रैल को पूजा का मुहूर्त सुबह 10 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक रहेगा.
अक्षय तृतीया क्यों है अबूझ मुहू्र्त?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन ग्रह-नक्षत्र की स्थिति बेहद शुभ होती है. इस दिन सूर्य और चंद्रमा अपनी उच्च राशि में होते हैं. जिसकी वजह से हर काम में शुभ फलों की प्राप्ति होती है. हमारे शास्त्रों में साढे तीन अबूझ मुहू्र्त बताए गये हैं. इनमें से एक अक्षय तृतीया को माना जाता है. अबूझ मुहूर्त में कोई भी शुभ काम करने के लिए किसी से पंचांग दिखाकर शुभ मुहूर्त निकलवाने की जरुरत नहीं होती. इस अबूझ मुहूर्त में शुभ और मांगलिक काम करने से कामों में सफलता और शुभता प्राप्त होती है. इसलिए इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार शुरु करना आदि शुभ काम किए जाते हैं.
अक्षय तृतीया पर दुर्लभ संयोग
इस साल बेहद खास संयोग बन रहे हैं. इस दिन रोहणी नक्षत्र, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग रहेगा. इसके साथ ही सूर्य और चंद्रमा अपनी उच्च राशि में होंगे. इस दिन गजकेसरी योग का भी बन रहा है. 19 अप्रैल को धन, ऐश्वर्य और प्रेम के कारक शुक्र अपनी वृषभ राशि में गोचर करेंगे, जिसकी वजह से मालव्य योग बनेगा. धर्म और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस साल इन दिव्य संयोग की वजह से अक्षय तृतीया का पर्व बेहद खास है. इन योग में पूजा-पाठ,दान और खरीदारी करने से कई गुना अधिक फल प्राप्त होगा.
अक्षय तृतीया पर खरीदारी का शुभ मुहूर्त
19 अप्रैल को शुभ मुहूर्त में खरीदारी करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं. धन-धान्य की वृद्धि होती है.
19 अप्रैल को सुबह का मुहूर्त ( चर, लाभ, अमृत लग्न )- सुबह 10 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक.
दोपहर का मुहूर्त ( शुभ योग )- दोपहर 01 बजकर 58 मिनट से दोपहर 03 बजकर 35 मिनट तक.
शाम मुहूर्त ( शुभ, अमृत, चर लग्न )- शाम 06 बजकर 49 मिनट से रात 10 बजकर 57 मिनट तक.
20 अप्रैल का मुहूर्त सुबह 05 बजकर 51 मिनट से 07 बजकर 27 मिनट तक रहेगा.
अक्षय तृतीया की पूजा विधि (Akshaya Tritiya 2026 Puja Vidhi)
19 अप्रैल को सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करें. गंगा, यमुना या पवित्र सरोवर पर स्नान करना बेहद शुभ होता है. स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें उत्तर-पूर्व दिशा में चौकी बिछा कर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. चौकी पर भगवान लक्ष्मीनारायण की स्थापना करें. शालिग्राम शिला हो तो उसकी स्थापना करें. परशुराम जी के श्रीविग्रह की स्थापना करें. भगवान लक्ष्मीनारायण और परशुराम जी का गंगाजल से अभिषेक करें. शालिग्राम शिला का पंचामृत से अभिषेक करें. भगवान का श्रंगार चंदन और सुंगधित फूलों से करें. भगवान विष्णु और शालिग्राम शिला पर तुलसी पत्र अवश्य चढ़ाएं. ऋतु फल और दूध से बने पदार्थों का भोग लगाएं. श्रद्धा भक्ति के साथ आरती करें. पूजा के बाद आसन पर बैठकर ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें. विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें. माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें. भगवान परशुराम के मंत्रों का जाप करें. अपनी सामर्थ्य के अनुसार, दान अवश्य करें.
अक्षय तृतीया पर क्या करें दान?
इस दिन दान का करना बेहद पुण्यकारी माना जाता है. अक्षय तृतीया पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करने से जीवन में सुख-शांति आती है. परिवार में धन-धान्य की वृद्धि होती है. इस दिन जल भरा मटका, खरबूजा, तरबूजा, ककड़ी, मिश्री, सत्तू, पंखा, चटाई, जूता-चप्पल, चावल, नमक, घी, मौसमी फल, छाता आदि का दान करना बेहद शुभ होता है.
अक्षय तृतीया पर्व का महत्व (Akshaya Tritiya 2026 Significance)
शास्त्रों में वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को परम कल्याणकारी बताया गया है. इस दिन भगवान विष्णु ने परशुराम जी के रुप में छठा अवतार लिया. इस तिथि से सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी. वहीं द्वापर युग का समापन हुआ था. भगवान शिव ने इसी तिथि को कुबेर जी को उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवताओं का कोषाध्यक्ष बनाया था. इसी दिन भगवान विष्णु ने नर-नारायण और हयग्रीव अवतार लिया था. इस दिन माता गंगा का अवतरण हुआ था. ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय का जन्म इसी तिथि को हुआ था. इसी तिथि से भगवान गणेश और व्यास जी ने महाभारत ग्रंथ का लेखन शुरु किया था. आदिगुरु शंकराचार्य जी ने कनकधारा स्तोत्र की रचना की थी. इस दिन महाभारत की लड़ाई समाप्त हुई. श्रीबांकेबिहारी जी के चरण दर्शन साल में एकबार इसी तिथि को होते हैं. इनके साथ ही ओर भी कई पौराणिक कथाएं और घटनाएं इस तिथि से जुड़ी हैं. इसलिए अक्षय तृतीया का शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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