'भारत के साथ हमारे संबंध बहुत मजबूत हैं', होर्मुज में हुई गोलीबारी की घटना पर बोले ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि
India-Iran Relationship: भारत और ईरान के संबंध बहुत मजबूत हैं. ये बात भारत में मौजूद ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कही है. उनका ये बयान उस घटना के बाद सामने आया है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास भारतीय ध्वज वाले दो जहाजों पर गोलीबारी की खबर सामने आई. इस घटना के बाद उन्होंने दोनों देशों के संबंधों को मजबूती पर जोर दिया और क्षेत्र में शांति की अपील की.
उन्होंने मीडिया से कहा, "भारत के साथ हमारे संबंध बहुत मजबूत हैं. ईरान और भारत के अच्छे संबंधों से भारत को होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और टैंकरों के आवागमन में लाभ हुआ है. भारत के प्रधानमंत्री की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ बहुत सफल बातचीत हुई और विदेश मंत्री की ईरान के विदेश मंत्री के साथ कई सफल वार्ताएं हुईं."
'ईरान और भारत के संबंध 5000 साल पुराने'
डॉ. इलाही ने आगे कहा, "ईरान और भारत के बीच संबंध 5,000 वर्षों के इतिहास में निहित हैं. ईरानी संस्कृति, सभ्यता, शिक्षा, मानवता और दर्शन के माध्यम से भारत से जुड़े हुए हैं. हमारा संबंध बहुत मजबूत है और आगे भी मजबूत होता रहेगा." इससे पहले, घटना पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, "ईरान और भारत के बीच संबंध बहुत मजबूत हैं, और मुझे इस घटना के बारे में कुछ भी नहीं पता जिसका आपने जिक्र किया है, और हम आशा करते हैं कि सब ठीक हो जाएगा और मामला सुलझ जाएगा."
उन्होंने तनाव कम करने का आह्वान करते हुए कहा कि, "हम यह युद्ध नहीं चाहते. हम शांति चाहते हैं, और हम आशा करते हैं कि दूसरा पक्ष भी शांति का मार्ग अपनाएगा ताकि हम एक शांतिपूर्ण क्षेत्र बना सकें."
नेतन्याहू के गुस्से से घबराए ट्रंप? लेबनान पर हमला रोकने वाले आर्डर के बाद इजरायल की करने लगे तारीफ
वॉशिंगटन, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। ईरान संकट के बीच इजरायल और अमेरिका के बीच गरमागरमी देखने को मिली। बीते दिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लेबनान पर हमले रोकने को लेकर बड़ा बयान दिया, जिससे इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भड़क गए। इसके बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति का नया बयान सामने आया, जिसमें वह इजरायल को यूएस का महान सहयोगी बता रहे हैं।
ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति ने लिखा, चाहे लोग इजरायल को पसंद करें या नहीं, उन्होंने खुद को अमेरिका का एक महान सहयोगी साबित किया है। वे हिम्मत वाले, बोल्ड, लॉयल और स्मार्ट हैं और दूसरों के उलट जिन्होंने लड़ाई और तनाव के समय अपना असली रंग दिखाया है, इजरायल कड़ी मेहनत करता है और जीतना जानता है।
दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने पोस्ट किया कि इजरायल को लेबनान में एयरस्ट्राइक करने से रोक दिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस पोस्ट ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके सलाहकारों को हैरान कर दिया, क्योंकि यह इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर समझौते के टेक्स्ट के बिल्कुल ही उल्टा था। इजरायल ने व्हाइट हाउस से सफाई मांगी।
ट्रंप के बयान से ऐसा लगा कि वह एक ऐसा ऑर्डर दे रहे हैं जिसे मानने के अलावा इजरायल के पास कोई विकल्प नहीं है, हालांकि यह ट्रंप का पुराना पैटर्न रहा है। वह अक्सर किसी भी मामले में सोशल मीडिया पर जाकर इस तरह का वक्तव्य पेश करते हैं, जिससे लगता है कि दूसरे पक्ष के पास अमेरिका की बात मानने के अलावा और कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, “इजरायल अब लेबनान पर बमबारी नहीं करेगा। अमेरिका ने उन्हें ऐसा करने से मना किया है। बहुत हो गया।” इसके अलावा एक्सियोस के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने इस बयान को फिर से दोहराया और कहा, “इजरायल को रुकना होगा। वे इमारतों को उड़ाना जारी नहीं रख सकते। मैं इसकी इजाजत नहीं दूंगा।”
इसके बाद वॉशिंगटन में इजरायली राजदूत येचिएल लीटर समेत इजरायली अधिकारियों ने यह पता लगाना शुरू कर दिया कि क्या अमेरिका की नीति बदल गई है। इसके बाद उन्होंने व्हाइट हाउस से सफाई मांगी और इस बात पर जोर दिया कि ट्रंप का बयान सीजफायर समझौते के उलट है।
एक्सियोस ने अमेरिकी सरकार के अधिकारी से बात की, तो उन्होंने साफ किया कि यह समझौता अटैकिंग मिलिट्री ऑपरेशन पर रोक लगाता है, लेकिन आने वाले या चल रहे खतरों से इजरायल के सेल्फ-डिफेंस के अधिकार को सुरक्षित रखता है।
इसके अलावा अमेरिकी की पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने इजरायल पर निशाना साधा। फॉक्स न्यूज के अनुसार, ईरान के साथ हमलों को लेकर हैरिस ने कहा, यह बात साफ है कि अमेरिका एक ऐसे युद्ध में शामिल हो गया जो अमेरिकी लोग नहीं चाहते। नेतन्याहू ने उन्हें इसमें घसीटा, जिससे अमेरिकी सैनिकों को खतरा हो गया।
--आईएएनएस
केके/वीसी
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