अगले हफ्ते शेयर बाजार में निवेशकों के लिए काफी हलचल रहने वाली है। देश की पांच कंपनियां शुरुआती आईपीओ के जरिए बाजार से कुल 7,443 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में हैं। इनमें धूत ट्रांसमिशन, मोलबायो डायग्नोस्टिक्स, मिल्की मिस्ट डेयरी फूड, शिपरॉकेट और बिहारी लाल इंजीनियरिंग शामिल हैं। इन कंपनियों के निर्गम 10 अगस्त से 12 अगस्त के बीच खुलेंगे।
मौजूद जानकारी के अनुसार, 10 अगस्त को धूत ट्रांसमिशन और मोलबायो डायग्नोस्टिक्स के निर्गम खुलेंगे। इसके अगले दिन यानी 11 अगस्त को मिल्की मिस्ट डेयरी फूड निवेशकों के लिए अपना निर्गम खोलेगी। वहीं 12 अगस्त को शिपरॉकेट और बिहारी लाल इंजीनियरिंग बाजार में उतरेंगी। इन निर्गमों से जुटाई जाने वाली रकम का इस्तेमाल मुख्य रूप से कारोबार बढ़ाने, नई परियोजनाओं पर खर्च, कर्ज चुकाने और दूसरे कंपनी संबंधी कामों में किया जाएगा।
धूत ट्रांसमिशन ने अपने शेयर के लिए 829 से 871 रुपये का मूल्य दायरा तय किया है। कंपनी इस निर्गम से करीब 3,067 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। इसमें 1,400 करोड़ रुपये तक के नए शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि बीसी एशिया इन्वेस्टमेंट्स 15 लिमिटेड और मंगलम कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड समेत मौजूदा हिस्सेदार करीब 1.91 करोड़ शेयर बिक्री के लिए रखेंगे।
गोवा स्थित मोलबायो डायग्नोस्टिक्स ने शेयर का मूल्य दायरा 768 से 807 रुपये तय किया है। कंपनी का निर्गम करीब 904 से 940 करोड़ रुपये का होगा। इसमें 200 करोड़ रुपये तक के नए शेयर और 91.66 लाख तक पुराने शेयरों की बिक्री शामिल है। कंपनी को टेमासेक और मोतीलाल ओसवाल प्राइवेट इक्विटी का समर्थन मिला हुआ है। विश्व बैंक समूह की निजी निवेश संस्था अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम ने भी 20 करोड़ रुपये बतौर शुरुआती निवेश लगाए हैं।
11 अगस्त को मिल्की मिस्ट डेयरी फूड का 1,553 करोड़ रुपये का निर्गम खुलेगा। इसका मूल्य दायरा 133 से 140 रुपये प्रति शेयर रखा गया है। इसमें 1,428 करोड़ रुपये तक के नए शेयर और 125 करोड़ रुपये तक की हिस्सेदारी बिक्री शामिल है। गौरतलब है कि यह किसी भारतीय डेयरी कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा शुरुआती आईपीओ होगा।
12 अगस्त को शिपरॉकेट का 1,617.5 करोड़ रुपये का निर्गम खुलेगा। कंपनी ने शेयर का मूल्य 92 से 97 रुपये तय किया है। इसमें 885.5 करोड़ रुपये तक के नए शेयर और 732 करोड़ रुपये तक पुराने शेयरों की बिक्री होगी। इसके अलावा बिहारी लाल इंजीनियरिंग 302 करोड़ रुपये जुटाने के लिए बाजार में उतरेगी। इसका मूल्य दायरा 271 से 285 रुपये प्रति शेयर है।
इन पांच निर्गमों के साथ 2026 में आईपीओ लाने वाली कंपनियों की संख्या 47 हो जाएगी। वहीं केकेआर समर्थित लीप इंडिया और टेक्नोक्राफ्ट वेंचर्स के निर्गम पहले से खुले हुए हैं। आने वाले दिनों में ब्लैकस्टोन समर्थित होराइजन इंडस्ट्रियल पार्क्स, गाजा कैपिटल समर्थित कंपनी और शंकेश ज्वैलर्स जैसी कंपनियों के भी बाजार में आने की तैयारी है। ऐसे में अगले कुछ दिनों में प्राथमिक बाजार में निवेशकों की गतिविधियां काफी तेज रहने की उम्मीद है।
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देश में छोटी कारों की मांग फिर से बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं और इसका सीधा फायदा वाहन बाजार को मिलने की उम्मीद है। मारुति सुजुकी के चेयरमैन आरसी भार्गव ने कहा है कि अगले पांच वर्षों में भारत में यात्री वाहनों की सालाना बिक्री बढ़कर 61 लाख से 63 लाख इकाई तक पहुंच सकती है। यह वित्त वर्ष 2025-26 में हुई करीब 46.4 लाख वाहनों की बिक्री से लगभग एक तिहाई ज्यादा होगी।
मौजूद जानकारी के अनुसार, कंपनी को छोटी कारों की मांग में आई तेजी और खेल उपयोगिता वाहनों की लगातार मजबूत बिक्री से बाजार के और बढ़ने की उम्मीद है। भार्गव ने कंपनी की सालाना रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष 2030-31 तक वाहन बाजार की तस्वीर पहले लगाए गए अनुमान से काफी बेहतर हो सकती है। खास बात यह है कि पिछले कुछ वर्षों की सुस्ती के बाद छोटी कारों की बिक्री ने फिर रफ्तार पकड़ी है।
गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में मारुति सुजुकी की छोटी कारों की बिक्री में 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। इसके बाद वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में यह वृद्धि बढ़कर 35 प्रतिशत हो गई। कंपनी ने मांग को देखते हुए उन कारों का उत्पादन बढ़ाया है, जिनकी बाजार में ज्यादा मांग है।
कंपनी की कुल बिक्री में भी पहली तिमाही के दौरान 38 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि पूरे वाहन उद्योग की बिक्री 28 प्रतिशत बढ़ी। सितंबर 2025 में माल एवं सेवा कर की दरों में बदलाव के बाद खुदरा मांग में तेजी आई थी। हालांकि मांग बढ़ने के साथ कंपनी के सामने उत्पादन और ग्राहकों की पसंद के बीच अंतर की समस्या भी सामने आई। मार्च 2026 के अंत में कंपनी के पास करीब 1.9 लाख वाहनों की लंबित बुकिंग थी।
भार्गव के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में छोटी कारों की मांग घटने और खेल उपयोगिता वाहनों की लोकप्रियता बढ़ने के कारण उत्पादन व्यवस्था में बदलाव किया गया था। अब कंपनी ऐसी उत्पादन इकाइयां तैयार कर रही है, जहां मांग के अनुसार अलग-अलग मॉडलों को बनाया जा सके।
गुजरात के सानंद में कंपनी 35 हजार करोड़ रुपये के निवेश से नया कारखाना लगा रही है। हरियाणा और गुजरात की अन्य इकाइयों के विस्तार के साथ वित्त वर्ष 2030-31 तक कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता 36.5 लाख वाहन सालाना करने की योजना है।
मारुति सुजुकी के प्रबंध निदेशक हिसाशी ताकेउची ने बताया कि अगले पांच से छह वर्षों में पांच नए खेल उपयोगिता वाहन पेश किए जाएंगे। कंपनी वैकल्पिक ईंधन और स्वच्छ ऊर्जा पर भी जोर दे रही है। इसके लिए चार जैव गैस संयंत्र लगाने को 561 करोड़ रुपये के शुरुआती निवेश को मंजूरी दी गई है। कंपनी वित्त वर्ष 2026-27 में 9 लाख सीएनजी वाहनों की बिक्री का लक्ष्य लेकर चल रही है। ऐसे में छोटी कारों, खेल उपयोगिता वाहनों और स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों की बढ़ती मांग मारुति सुजुकी के अगले विकास दौर की बड़ी वजह बन सकती हैं।
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