Radish Leaves Benefits: मूली ही नहीं, इसके पत्ते भी हैं सेहत का खजाना! 5 फायदे जानकर फेंकना कर देंगे बंद
Radish Leaves Benefits: मूली को सलाद, पराठे और सब्जी के रूप में खाने वाले लोग इसकी जड़ का तो खूब इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अक्सर इसके हरे पत्तों को काटकर फेंक देते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि मूली के पत्ते भी कई पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनमें फाइबर, विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो संतुलित डाइट का हिस्सा बनकर शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचा सकते हैं।
मूली के पत्तों को सब्जी, साग, पराठे या दाल में मिलाकर खाया जा सकता है। इनमें मौजूद पोषक तत्व पाचन से लेकर शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा और हड्डियों की सेहत को सपोर्ट करने में भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, किसी एक खाद्य पदार्थ को किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।
मूली के पत्ते खाने के 5 बड़े फायदे
पाचन के लिए हो सकते हैं फायदेमंद
मूली के पत्तों में डाइटरी फाइबर पाया जाता है। फाइबर पाचन तंत्र को सही तरीके से काम करने में मदद करता है और मल त्याग को सामान्य बनाए रखने में भूमिका निभाता है। डाइट में पर्याप्त फाइबर लेने से कब्ज जैसी समस्या से बचने में मदद मिल सकती है। इसके साथ पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है।
शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं
मूली के पत्तों में विटामिन और मिनरल्स सहित कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। संतुलित आहार में हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करने से शरीर को अलग-अलग जरूरी पोषक तत्व मिल सकते हैं। मूली के पत्तों को दूसरी सब्जियों और दालों के साथ मिलाकर खाने से डाइट में विविधता भी बढ़ती है।
इम्युनिटी को सपोर्ट कर सकते हैं
मूली के पत्तों में विटामिन C समेत कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए जरूरी होते हैं। विटामिन C एंटीऑक्सीडेंट के रूप में भी काम करता है। इसलिए मूली के पत्तों को संतुलित डाइट में शामिल करना शरीर की सामान्य इम्युनिटी को सपोर्ट करने वाला विकल्प हो सकता है।
हड्डियों के लिए उपयोगी डाइट का हिस्सा
हरी पत्तेदार सब्जियां कई जरूरी विटामिन और मिनरल्स का स्रोत हो सकती हैं। मूली के पत्तों को भी इसी तरह की पौष्टिक सब्जियों में शामिल किया जा सकता है। इनमें मौजूद पोषक तत्व हड्डियों और शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली को सपोर्ट करने में योगदान दे सकते हैं। हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम और विटामिन D समेत पूरी डाइट पर ध्यान देना जरूरी है।
वजन मैनेजमेंट में मदद कर सकते हैं
मूली के पत्तों में फाइबर होता है और ये सामान्य तौर पर हल्की, सब्जी आधारित डाइट का हिस्सा बन सकते हैं। फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकता है, जिससे बार-बार खाने की इच्छा को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। वजन मैनेजमेंट के लिए इन्हें कम तेल में पकाकर खाना बेहतर विकल्प है।
मूली के पत्ते कैसे खाएं?
मूली के पत्तों को अच्छी तरह धोकर मिट्टी और गंदगी साफ कर लें। इसके बाद इन्हें बारीक काटकर लहसुन, हरी मिर्च और हल्के मसालों के साथ सब्जी के रूप में बनाया जा सकता है। मूली के पत्तों का साग या पराठा भी तैयार किया जा सकता है। इन्हें दाल में मिलाने से उसका स्वाद और पोषण दोनों बढ़ सकते हैं।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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Sabudana Tikki: बाहर से कुरकुरी, अंदर से बनेंगी सॉफ्ट! ऐसे बनाएं साबूदाना टिक्की, स्वाद सभी को आएगा पसंद
Sabudana Tikki Recipe: साबूदाना टिक्की एक ऐसी स्नैक रेसिपी है, जिसे व्रत के दौरान तो खूब पसंद किया जाता है, लेकिन इसे सामान्य दिनों में भी चाय के साथ या शाम के नाश्ते के तौर पर बनाया जा सकता है। साबूदाने की हल्की चिपचिपी बनावट, उबले आलू और मूंगफली का क्रंच मिलकर इस टिक्की को खास स्वाद देते हैं। सही तरीके से तैयार की जाए तो टिक्की बाहर से सुनहरी और कुरकुरी, जबकि अंदर से नरम बनती है।
अगर साबूदाना टिक्की बनाते समय टिक्की टूट जाती है या तेल में डालते ही बिखरने लगती है, तो इसकी वजह अक्सर साबूदाने में ज्यादा पानी होना या मिश्रण को ठीक से न बांध पाना होती है। कुछ आसान बातों का ध्यान रखकर आप घर पर ही बाजार जैसी स्वादिष्ट टिक्की तैयार कर सकते हैं। आइए जानते हैं इसकी आसान रेसिपी।
साबूदाना टिक्की बनाने के लिए सामग्री
- 1 कप साबूदाना
- 2-3 मध्यम आकार के उबले आलू
- 1/2 कप भुनी और दरदरी कुटी मूंगफली
- 1-2 हरी मिर्च बारीक कटी हुई
- 1 छोटा चम्मच जीरा
- 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
- 1/2 छोटा चम्मच चाट मसाला
- 1 छोटा चम्मच नींबू का रस
- बारीक कटा हरा धनिया
- सेंधा नमक स्वादानुसार
- सेंकने या तलने के लिए तेल
साबूदाना टिक्की बनाने की आसान विधि
साबूदाना भिगोने का सही तरीका
सबसे पहले साबूदाने को 2-3 बार पानी से अच्छी तरह धो लें। इसके बाद इतना पानी डालें कि साबूदाना बस हल्का-सा डूबे। इसे करीब 4-6 घंटे या जरूरत के अनुसार तब तक भिगोएं, जब तक दाने नरम न हो जाएं।
भिगोने के बाद अतिरिक्त पानी बिल्कुल न रहने दें। साबूदाना अगर बहुत गीला होगा तो टिक्की का मिश्रण ढीला पड़ सकता है और टिक्की आसानी से टूट सकती है।
टिक्की का मिश्रण तैयार करें
एक बड़े बाउल में भीगा हुआ साबूदाना डालें। इसमें उबले और अच्छी तरह मैश किए हुए आलू, दरदरी कुटी भुनी मूंगफली, हरी मिर्च, जीरा, सेंधा नमक, लाल मिर्च पाउडर, चाट मसाला, नींबू का रस और हरा धनिया डालें।
सभी चीजों को हाथों से अच्छी तरह मिलाकर एकसार मिश्रण तैयार करें। ध्यान रखें कि मिश्रण न बहुत गीला हो और न ही बहुत सूखा। अगर मिश्रण बहुत ढीला लग रहा है तो थोड़ी और कुटी मूंगफली मिलाई जा सकती है।
ऐसे दें टिक्की का आकार
हाथों पर हल्का तेल लगाकर मिश्रण की छोटी-छोटी लोइयां बनाएं। इन्हें हथेली से दबाकर गोल और चपटी टिक्की का आकार दें। सभी टिक्कियों को एक प्लेट में तैयार करके रख लें।
सुनहरी और कुरकुरी बनाएं
कड़ाही या नॉन-स्टिक पैन को गर्म करें और थोड़ा तेल डालें। टिक्कियों को मध्यम आंच पर रखें और एक तरफ से सुनहरी होने दें। इसके बाद सावधानी से पलटकर दूसरी तरफ भी कुरकुरा और सुनहरा होने तक सेंकें।
अगर आप ज्यादा कुरकुरी टिक्की चाहते हैं तो इसे मध्यम आंच पर थोड़ा ज्यादा समय देकर पकाएं। तेज आंच पर पकाने से बाहर की परत जल्दी ब्राउन हो सकती है, जबकि अंदर का हिस्सा ठीक से गर्म नहीं होगा।
इस तरह करें सर्व
तैयार साबूदाना टिक्की को गरमागरम हरी चटनी, दही या मूंगफली की चटनी के साथ परोसें। व्रत के लिए बनाते समय सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल करें और अपनी व्रत की डाइट के अनुसार सामग्री चुनें।
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