Ali Asgar quit Kapil Sharma Show: फिल्म और टीवी की दुनिया में हंसी के पीछे छिपे दर्द की स्टोरी अक्सर सामने नहीं आ पातीं. टीवी पर ऑडियंस को जो दिखाई देता है, वह सिर्फ मनोरंजन होता है, लेकिन कलाकारों की पर्सनल जिंदगी में कई बार ऐसी सिचुएशन आ जाती हैं जो उन्हें बड़े फैसले लेने पर मजबूर कर देती हैं. कुछ ऐसा ही दर्द मशहूर कॉमेडियन और एक्टर अली असगर (Ali Asgar) ने शेयर किया है. अली ने कपिल शर्मा शो (Kapil Sharma Show) छोड़ने पर बड़ा खुलासा किया है.आइए जानते हैं उन्होंने क्या बताया है-
कपिल शर्मा शो में असगर अली ने दादी का किरदार कई बार निभाया था. इससे वो घर-घर में फेमस हो गए, लेकिन उसी पहचान ने उनकी निजी जिंदगी पर असर डालना शुरू कर दिया. लंबे समय तक उन्होंने इस बात को पब्लिक नहीं किया, लेकिन अब जाकर उन्होंने उस दर्द को शेयर किया है, जिसने उन्हें एक कामयाब शो छोड़ने का फैसला लेने पर मजबूर कर दिया. खास बात यह है कि इस पूरे मामले में उनके बच्चों का जिक्र सबसे ज्यादा इमोशनल कर देता है.
बच्चों को स्कूल में होना पड़ा बुली
हाल ही में एक इंटरव्यू में अली असगर ने बताया कि उनके बच्चों को स्कूल में बुली किया जाता था, क्योंकि वह टीवी पर औरत का किरदार निभाते थे. उन्होंने कहा, 'दीवार फिल्म में छोटे अमिताभ बच्चन साब के हाथ में लिखा था कि मेरा बाप चोर हैं. मेरे बेटे के हाथ में न लिखा हो मेरा बाप औरत है. अली असगर के इस दर्द भरे बयान से साफ झलकता है कि एक पिता के तौर पर यह उनके लिए कितना तकलीफदेह था. बच्चों को इस तरह की बातों का सामना करना पड़ा, जिसने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया.
फीमेल किरदार की पहचान बनी बोझ
कपिल शर्मा के शो में दादी और नानी जैसे किरदार निभाकर अली असगर ने खूब कामयाबी हासिल की. लेकिन यही पहचान धीरे-धीरे उनके लिए बोझ बनती गई. उन्होंने बताया कि उन्हें बार-बार एक ही तरह के किरदार दिए जाते थे, जिससे वह खुद को सीमित महसूस करने लगे थे. उनके मुताबिक, दर्शकों को यह अजीब लग सकता है कि उन्होंने इतनी सक्सेस के बावजूद शो क्यों छोड़ा, लेकिन उस समय उनकी सिचुएशन बिल्कुल अलग थी.
एक ही तरह के रोल से होने लगी थी तकलीफ
कॉमेडियन ने आगे बताया, 'सुनने वालों को ये लगेगा कि ये पागल है. क्यों छोड़ दिया. लेकिन उस वक्त शनिवार और रविवार कॉमेडी सर्कस करते थे. तो उसमें दो-दो एक्ट होता था. दोनों एक्ट में मैं औरत बनता था. रविवार में भी औरत.. तो क्या था कि वहां एक इमेज हो गई थी.' उन्होंने आगे कहा, 'तकलीफ भी होती है न फिर की मुझे सिर्फ ये नहीं करना है क्या, मुझे कुछ और भी करना है. मैं रोज दाल चावल नहीं खाऊंगा. मुझे आज पूरी भाजी भी चाहिए.'
2017 में छोड़ा था शो
बता दें कि अली असगर ने साल 2017 में द कपिल शर्मा शो को अलविदा कह दिया था. उस समय उन्होंने ‘क्रिएटिव डिफरेंस’ को वजह बताया था, लेकिन अब जाकर उन्होंने इसके पीछे की असली वजह बताई है. उनका कहना है कि यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि यही उनका काम और रोजी-रोटी थी. लेकिन बच्चों पर पड़ रहे असर और अपने करियर में एक ही तरह की इमेज बन जाने के वजह उन्हें यह कदम उठाना पड़ा.
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मीडिल ईस्ट में जारी भारी तनाव के बीच एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने वैश्विक कूटनीति और सैन्य गलियारों में खलबली मचा दी है। दावा किया जा रहा है कि पिछले 48 घंटों में चीन के चार विशालकाय कार्गो विमान ईरान के हवाई अड्डों पर गुपचुप तरीके से उतरे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन विमानों ने ईरानी हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले अपने ट्रांसपॉडर्स बंद कर दिए थे ताकि उनकी पहचान और लोकेशन को रडार या सार्वजनिक ट्रैकिंग साइट से छिपाया जा सके। खुफिया सूत्रों का मानना है कि इन विमानों में उन्नत मिसाइल प्रणालियां, ड्रोन, तकनीक और अन्य भारी सैन्य साजो सामान लदे हुए थे। यह घटना सीधे तौर पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस हालिया वादे को चुनौती देती है जिसमें उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आश्वासन दिया था कि चीन ईरान को किसी भी प्रकार के हथियारों की आपूर्ति नहीं करेगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन केवल हथियारों तक ही सीमित नहीं है बल्कि वह ईरान को इनविज़िबल सपोर्ट यानी अदृश्य सैन्य मदद भी दे रहा है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण ईरान को चीन के बीडू सेटेलाइट नेविगेशन सिस्टम का एक्सेस देना है। अमेरिकी जीपीएस विकल्प के रूप में इस्तेमाल हो रहे यह सिस्टम ईरानी मिसाइलों और का कामकाजी ड्रोंस को पिन पॉइंट एक्यूरेसी प्रदान कर रहा है। इसके अलावा हालिया इंटेलिजेंस इनपुट बताते हैं कि ईरान अब चीन के हाई रेजोल्यूशन टू ही उपग्रहों का उपयोग इजरायली और अमेरिकी सैन्य ठिकानों की निगरानी के लिए कर रहा है। यह साझेदारी ईरान की किल चेन को बेहद घातक बना रही है जिससे वह खाड़ी क्षेत्र में किसी भी हलचल का जवाब सेकंडों में देने को सक्षम हो गया है। कुछ ही दिन पहले शी जिनपिंग ने वाशिंगटन को भरोसा दिलाया था कि बीजिंग इस संघर्ष में न्यूट्रल रहेगा। लेकिन कार्गो विमानों की इस गुप्त लैंडिंग ने अमेरिका को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है। ट्रंप प्रशासन के करीबी सूत्रों का कहना है कि अगर इन विमानों में हथियारों की मौजूदगी के पुख्ता सबूत मिलते हैं तो अमेरिका चीन पर अब तक के सबसे कठोर प्रतिबंध लगा सकता है। इसमें चीनी बैंकों को अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणाली से बाहर करना भी शामिल हो सकता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर चीन ने ईरान को अपनी उन्नत जासूसी और नेविगेशन तकनीक के साथ-साथ हथियारों की खेप पहुंचाना जारी रखा तो मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन पूरी तरह से बिगड़ सकता है।
इजराइल के लिए यह स्थिति रेड लाइन के पार है क्योंकि चीनी तकनीक से लेस ईरानी मिसाइलों को रोकना उसके आयरन डोम और एरो डिफेंस सिस्टम के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। उर्मजलडमरू मध्य में चीन की सक्रियता और ईरान को मिल रही सेटेलाइट मदद से वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। फिलहाल बीजिंग ने इन दावों को दुष्प्रचार बताया है लेकिन ट्रांसपंडर बंद कर विमानों का उतरना एक ऐसी कहानी बयां कर रहा है जिसे झुठलाना मुश्किल हो रहा है। क्या बीजिंग की तरफ से वाशिंगटन को सीधी सैन्य चुनौती है? आने वाले कुछ दिन इस सवाल का जवाब तय करेंगे।
मीडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच अमेरिका ने स्टेट ऑफ हुरमोस में नाकेबंदी कर ईरानी जहाजों को इस रास्ते से ना गुजरने देने की धमकी दी है। हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान इस नाकेबंदी को आसानी से चकमा दे रहा है और इस रास्ते से कई जहाजों को बाहर निकाल लाया है। नाकेबंदी लागू होने के बाद से ईरान से जुड़े कई टैंकर रास्ते से गुजर चुके हैं। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया था कि स्टेट ऑफ हु्मोस पर अब अमेरिका का नियंत्रण होगा। इसका मकसद इस नाकेबंदी के जरिए ईरान के तेल और गैस निर्यात को रोकना और इस अहम समुद्री रास्ते पर उसका नियंत्रण कमजोर करना था। 12 अप्रैल को नाकेबंदी की घोषणा हुई और 13 अप्रैल से अमेरिकी नौसेना ने इसे लागू करना शुरू किया। अमेरिका ने उतारे कई युद्धपोत। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार इस ऑपरेशन में 10,000 से ज्यादा सैनिक, मरीन, एयरमैन और एक दर्जन से ज्यादा युद्धपोत और कई विमान तैनात किए गए हैं। पहले 24 घंटों में अमेरिका ने दावा किया था कि कोई जहाज नाकाबंदी पार नहीं कर पाया है और छह व्यापारिक जहाजों को वापस लौटा दिया गया।
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