भारतीय शेयर बाजार में एफआईआई की बिकवाली थमी, वापसी के संकेत; डीआईआई का सपोर्ट बरकरार
नई दिल्ली, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय शेयर बाजार में लंबे समय से जारी बिकवाली के बाद अब विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के रुख में सुधार के शुरुआती संकेत दिखने लगे हैं।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस हफ्ते के आखिरी तीन कारोबारी सत्रों में एफआईआई नेट खरीदार बने, जिससे बाजार में रिकवरी को सपोर्ट मिला और निवेशकों का भरोसा भी बेहतर हुआ।
हालांकि, पूरे हफ्ते के हिसाब से देखें तो एफआईआई का कुल निवेश अब भी करीब 250 करोड़ रुपए नकारात्मक रहा। इसका मतलब है कि मजबूत और लगातार निवेश आने पर ही बाजार में स्थायी सुधार की पुष्टि होगी।
वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की बात करें तो इस दौरान उनका आउटफ्लो करीब 6,300 करोड़ रुपए रहा। इसके बावजूद, विश्लेषकों का मानना है कि डीआईआई अब भी बाजार के लिए एक स्थिर सहारा बने हुए हैं और लंबी अवधि में बाजार को मजबूती देते रहेंगे।
इस हफ्ते रुपए में भी मजबूती देखने को मिली। भारतीय मुद्रा 93.24 के स्तर पर रही, जो करीब 0.15 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है। डॉलर इंडेक्स में कमजोरी और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीदों ने डॉलर की मांग घटाई, जिससे रुपए को सपोर्ट मिला।
एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी ने कहा कि बाजार का सकारात्मक माहौल एफआईआई के निवेश और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की उम्मीदों से भी मजबूत हुआ है, जिससे घरेलू बाजारों में पूंजी का प्रवाह बढ़ा है।
इसके अलावा, पिछले 48 घंटों में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने भी भारत के आयात बिल पर दबाव कम किया है, जिससे रुपए को और मजबूती मिली।
वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में तेज गिरावट तब आई जब ईरान ने घोषणा की कि युद्धविराम के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह खुला है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम के बाद ईरान के विदेश मंत्री के बयान से तेल की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत तक गिरावट आई।
विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल रुपए को सपोर्ट मिल रहा है, लेकिन आगे इसकी मजबूती इस बात पर निर्भर करेगी कि भू-राजनीतिक हालात कैसे बदलते हैं और कच्चे तेल की कीमतें किस दिशा में जाती हैं।
विश्लेषकों के मुताबिक, आने वाले हफ्ते में बाजार का रुख खबरों पर ज्यादा निर्भर रहेगा, लेकिन माहौल फिलहाल सकारात्मक बना हुआ है। निवेशकों की नजर खास तौर पर अमेरिका-ईरान वार्ता के नतीजों पर रहेगी।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
यूएन चीफ गुटेरेस ने भविष्य को अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन से चलाने की अपील की
संयुक्त राष्ट्र, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने नीदरलैंड के हेग में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे रॉ पावर से चलने वाले भविष्य के बजाय कानून के राज से चलने वाला भविष्य चुनें।
स्थानीय समयानुसार शुक्रवार को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) की 80वीं सालगिरह पर, गुटेरेस ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हमारी आंखों के सामने हो रहा है।
संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख ने कहा, ठीक इसलिए क्योंकि इंटरनेशनल सिस्टम इतने दबाव में है कि अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है, खासकर पावर डायनामिक्स बदलने के इस दौर में।
गुटेरेस ने चेतावनी दी कि अंतरराष्ट्रीय कानून को कमजोर करने से वैश्विक स्थिरता की नींव कमजोर होने का खतरा है। उन्होंने चेतावनी दी, जब कानून की जगह ताकत ले लेती है, तो अस्थिरता फैलने लगती है।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, आईसीजे के राष्ट्रपति इवासावा युजी ने भी इन चिंताओं को दोहराया और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों से अलग होने, नियमों का पालन करने में बढ़ते विरोध और बहुपक्षवाद के प्रति बढ़ते संदेह के परेशान करने वाले संकेतों की ओर इशारा किया।
उन्होंने कहा, कोर्ट इन चुनौतियों का जवाब अपना न्यायिक काम करके, अंतरराष्ट्रीय कानून को सख्ती से और अच्छी नीयत से समझाकर और लागू करके देता है।
आईसीजे, यूएन का सबसे बड़ा ट्रिब्यूनल, एकमात्र इंटरनेशनल कोर्ट है जो 193 यूएन सदस्य देशों के बीच विवादों को सुलझाता है।
इसका मतलब है कि यह दुनिया भर में शांति और सुरक्षा में अहम योगदान देता है और देशों को बिना किसी झगड़े के मसलों को सुलझाने का एक तरीका देता है।
आईसीजे 1945 में बना था और हेग के पीस पैलेस में मौजूद है। इसने शुक्रवार को 80वीं सालगिरह मनाने के लिए एक खास मीटिंग की। इस इवेंट में डच किंग विलेम-अलेक्जेंडर के साथ-साथ वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय और डच अधिकारी भी शामिल हुए।
--आईएएनएस
केके/एएस
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