यूएन चीफ गुटेरेस ने भविष्य को अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन से चलाने की अपील की
संयुक्त राष्ट्र, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने नीदरलैंड के हेग में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे रॉ पावर से चलने वाले भविष्य के बजाय कानून के राज से चलने वाला भविष्य चुनें।
स्थानीय समयानुसार शुक्रवार को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) की 80वीं सालगिरह पर, गुटेरेस ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हमारी आंखों के सामने हो रहा है।
संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख ने कहा, ठीक इसलिए क्योंकि इंटरनेशनल सिस्टम इतने दबाव में है कि अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है, खासकर पावर डायनामिक्स बदलने के इस दौर में।
गुटेरेस ने चेतावनी दी कि अंतरराष्ट्रीय कानून को कमजोर करने से वैश्विक स्थिरता की नींव कमजोर होने का खतरा है। उन्होंने चेतावनी दी, जब कानून की जगह ताकत ले लेती है, तो अस्थिरता फैलने लगती है।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, आईसीजे के राष्ट्रपति इवासावा युजी ने भी इन चिंताओं को दोहराया और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों से अलग होने, नियमों का पालन करने में बढ़ते विरोध और बहुपक्षवाद के प्रति बढ़ते संदेह के परेशान करने वाले संकेतों की ओर इशारा किया।
उन्होंने कहा, कोर्ट इन चुनौतियों का जवाब अपना न्यायिक काम करके, अंतरराष्ट्रीय कानून को सख्ती से और अच्छी नीयत से समझाकर और लागू करके देता है।
आईसीजे, यूएन का सबसे बड़ा ट्रिब्यूनल, एकमात्र इंटरनेशनल कोर्ट है जो 193 यूएन सदस्य देशों के बीच विवादों को सुलझाता है।
इसका मतलब है कि यह दुनिया भर में शांति और सुरक्षा में अहम योगदान देता है और देशों को बिना किसी झगड़े के मसलों को सुलझाने का एक तरीका देता है।
आईसीजे 1945 में बना था और हेग के पीस पैलेस में मौजूद है। इसने शुक्रवार को 80वीं सालगिरह मनाने के लिए एक खास मीटिंग की। इस इवेंट में डच किंग विलेम-अलेक्जेंडर के साथ-साथ वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय और डच अधिकारी भी शामिल हुए।
--आईएएनएस
केके/एएस
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बांग्लादेश बार एसोसिएशन चुनावों में भेदभाव का आरोप, राइट्स ग्रुप ने की आलोचना
पेरिस, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने बांग्लादेश बार एसोसिएशन चुनावों में पक्षपातपूर्ण रवैए का हवाला देते हुए अनियमितताओं और भेदभावपूर्ण बर्ताव का आरोप प्रशासन पर लगाया है। इसे एक पैटर्न का हिस्सा बताते हुए दावा किया कि बार एसोसिएशन चुनावों में सिर्फ पॉलिटिकल आइडियोलॉजी को आधार बनाया गया और अवामी लीग के समर्थक माने जाने वाले वकीलों की उम्मीदवारी रद्द कर दी गई।
फ्रांस में जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश (जेएमबीएफ) ने आरोप लगाया कि इन वकीलों को चुनाव में हिस्सा लेने से रोका जा रहा है, और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की सरकार के तहत मुंशीगंज, मैमनसिंह, ठाकुरगांव, पंचगढ़, झलकाठी, खुलना, नरैल और सुनामगंज समेत कई जिलों में बार एसोसिएशन के चुनावों में पुलिस के दखल का हवाला दिया।
गंभीर चिंता जताते हुए, मानवाधिकार संस्था ने ऐसा माहौल सुनिश्ति करने की मांग की जिसमें सभी धर्मों के वकील अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल कर सकें। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की सीधी निगरानी में अंतरराष्ट्रीय स्तर की जांच के जरिए कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल न करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील भी की गई है।
जेएमबीएफ के मुताबिक, ये घटनाएं “कुछ अलग” नहीं हैं, बल्कि “राजनीतिक रूप से अलग-थलग करने की एक सिस्टमैटिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जिसके जरिए न्यायिक समुदाय के एक हिस्से को जानबूझकर पेशेवर और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से बाहर किया जा रहा है।”
संगठन ने कहा कि नतीजतन, स्वतंत्र प्रोफेशनल बॉडी के तौर पर बार एसोसिएशन के बुनियादी चरित्र को कमजोर किया जा रहा है, जिससे न्यायिक प्रणाली के प्रति लोगों का भरोसा कम होने का खतरा पैदा हो रहा है।
राइट्स बॉडी ने जोर देकर कहा कि देश के मौजूदा कानूनी ढांचे और न्याय के बुनियादी सिद्धांतों को देखते हुए ऐसी हरकतें पूरी तरह से मंजूर नहीं हैं।
जेएमबीएफ ने कहा, एक बार एसोसिएशन को एक सेल्फ-गवर्निंग प्रोफेशनल बॉडी (स्वशासी व्यावसायिक निकाय) के तौर पर, तटस्थता, पारदर्शिता और समान अधिकारों के मूल्यों पर काम करना चाहिए। लेकिन हो इसके उलट रहा है। उम्मीदवारों को बिना सुनवाई, बिना किसी जांच या अपना बचाव करने का मौका दिए अयोग्य घोषित किया जा रहा है, जो नेचुरल जस्टिस और ड्यू प्रोसेस के सिद्धांतों का साफ उल्लंघन है। साथ ही, प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से दखल देना पावर का गलत इस्तेमाल है और कानून के राज की अवधारणा को बुरी तरह कमजोर करता है।
जेएमबीएफ ने वकीलों पर दबाव डालने की खातिर “राजनीतिक रूप से संवेदनशील और अस्पष्ट शब्दावली” के इस्तेमाल पर चिंता जताई और चेतावनी दी कि चुनाव अधिकारी अपनी तटस्थता खो रहे हैं और कई मामलों में बिना विरोध के चुनाव इस तरह से कराए जा रहे हैं कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया सिर्फ “मजाक” बनकर रह गई है।
संगठन ने चिंता जताई कि अगर ये ट्रेंड जारी रहा तो, “कानूनी पेशे की आजादी और न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता को गंभीर खतरा पैदा होगा।”
मानवाधिकार संगठन ने संयुक्त राष्ट्र, अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन, बार काउंसिल और कानून के राज के लिए काम करने वाले वैश्विक संस्थानों से बांग्लादेश बार एसोसिएशन की स्थिति पर ध्यान देने और जरूरी कदम उठाने की अपील की।
--आईएएनएस
केआर/
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