पिछले कुछ घंटों से पूरे पाकिस्तान में बता दें कि खौफ का माहौल है। पाकिस्तान जिस तरीके से अपने फैसले ले रहा है उससे यह बिल्कुल साफ है और यह लग रहा है कि उसे यह डर है कि उस पर कभी भी बहुत बड़ा अटैक हो सकता है और इसीलिए ही वो बहुत बुरी तरीके से इस वक्त घबराया हुआ है। भारत से पाकिस्तान इतना डरता है कि वो अब अपनी बौखलाहट को पूरी दुनिया के सामने दिखा रहा है। साफ तौर पर पेश कर रहा है। भारत की असली ताकत का एहसास पाकिस्तान को अब हो गया है क्योंकि अब पाकिस्तान ने एक बेहद ही स्ट्रेटेजिक पॉइंट पर नोटम जारी किया है। नोटम यानी नोटिस टू एयरमैन। बता दें कि पाकिस्तान ने मिसाइल टेस्टिंग को लेकर नोटम यानी कि नोटिस टू एएमएन जारी किया जिसमें 20 अप्रैल से लेकर 21 अप्रैल तक अरब सागर के एक हिस्से को नो फ्लाई ज़ोन घोषित किया गया।
अब जैसे ही पाकिस्तान ने अपना यह कदम उठाया, भारत ने तुरंत जवाब दिया, एक्शन लिया। लेकिन भारत ने अपने अंदाज में से किया। भारत ने पाकिस्तान से दुगने दायरे में नोटम जारी कर दिया है। यानी कि पाकिस्तान को बिल्कुल भी मौका नहीं दिया। जहां पाकिस्तान का एरिया करीब 200 किमी था, वहीं भारत ने करीब 400 किमी का एरिया कवर कर लिया है। यानी यह साफ संदेश दे दिया है पाकिस्तान को कि भारत सिर्फ जवाब नहीं देता। डबल ताकत से धमाका कर देता है। अब समझिए कि यह नोटम क्या होता है? दरअसल नोटम यानी कि नोटिस टू एयरमैन। यह एक आधिकारिक सूचना होती है जो पायलट्स, एयर ट्रैफिक कंट्रोल या फिर एयरलाइंस को दी जाती है कि किस इलाके में उड़ान भरना मना है। कहां सैन्य गतिविधियां चल रही हैं और कहां खतरा हो सकता है। यानी ये सीधे-सीधे एक सुरक्षा अलर्ट होता है ताकि कोई हादसा ना हो।
अब यहां पर आप बड़ा गेम समझिए। बड़ा खेल यह है कि भारत और पाकिस्तान दोनों ने लगभग एक ही समय पर मिसाइल टेस्टिंग के लिए नोट टर्म जारी कर दिया है। लेकिन फर्क आप समझिए फर्क यह है कि भारत का दायरा बड़ा है। टाइमिंग ज्यादा लंबी है और साथ ही अरब सागर में भारत ने अपना एडवांस सर्लांस शिप आईएएस ध्रुव भी तैनात कर दिया है। इसका मतलब बिल्कुल साफ है कि भारत सिर्फ सतर्क नहीं है बल्कि पूरी तैयारी के साथ हर मूवमेंट को हर मूव पर यह नजर रख रहा है। जब दुनिया ईरान संकट और ऊर्जा सप्लाई में उलझी हुई है तब भारत अपनी स्ट्रेटेजिक ताकत को क्वाइटली मजबूत कर रहा है। तो कुल मिलाकर अगर हम समझें तो ये है कि पाकिस्तान ने डर में अपना ये कदम उठाया लेकिन भारत ने उसे एक स्ट्रांग मैसेज में बदल दिया।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के फैसले के बाद चीन के शी जिनपिंग "बहुत खुश" हैं, उन्होंने कहा कि वह अपने चीनी समकक्ष के साथ अपनी बैठक का इंतजार कर रहे हैं। दो बार अमेरिका के राष्ट्रपति रह चुके ट्रंप ने यह भी कहा कि जब दोनों विश्व नेता अगले महीने बीजिंग में मिलेंगे तो "बहुत कुछ हासिल किया जाएगा"। 79 वर्षीय अमेरिकी नेता ने अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर पोस्ट किया, "राष्ट्रपति शी बहुत खुश हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है और/या तेजी से खुल रहा है।" "चीन में हमारी बैठक विशेष और संभावित रूप से ऐतिहासिक होगी। मैं राष्ट्रपति शी के साथ रहने के लिए उत्सुक हूं - बहुत कुछ हासिल किया जाएगा!"
मई में ट्रंप की चीन यात्रा जहां वह जिनपिंग से मुलाकात करेंगे, ने दुनिया का ध्यान खींचा है। 10 साल में यह पहली बार होगा जब कोई मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति चीन का दौरा करेगा। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के अनुसार, ट्रम्प 14 और 15 मई को चीन का दौरा करेंगे; हालांकि चीनी पक्ष ने तारीखों की पुष्टि नहीं की है।
ट्रम्प, जो इस साल के अंत में जिनपिंग की मेजबानी भी करेंगे, मूल रूप से मार्च में चीन की यात्रा करने वाले थे, लेकिन मध्य पूर्व में यूएस-इज़राइल-ईरान युद्ध के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। फिर भी, इस यात्रा से दोनों देशों को बीच के तनाव को कम करने और व्यापार घर्षण से प्रभावित हुए अपने संबंधों को सुधारने का मौका मिलेगा।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान के अनुसार, ट्रम्प की यात्रा को लेकर वाशिंगटन और बीजिंग लगातार संपर्क में हैं, उन्होंने बताया कि "नेता स्तर की कूटनीति" "अपूरणीय रणनीतिक" संबंधों को निर्देशित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इसके अतिरिक्त, चीनी राज्य मीडिया ने दावा किया है कि दोनों पक्षों के अधिकारियों को एक-दूसरे के साथ बातचीत करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है क्योंकि अमेरिका और चीन के बीच वर्षों से लोगों के बीच आदान-प्रदान की कमी बनी हुई है, जो उनके बीच वर्तमान स्थिति का "मूल कारण" है और "ऐसा नहीं होना चाहिए"।
ग्लोबल टाइम्स ने एक संपादकीय में कहा, "इतिहास ने बार-बार दिखाया है कि चीन और अमेरिका दोनों को सहयोग से फायदा होता है और टकराव से नुकसान होता है।" "अमेरिका के प्रति चीन की नीति सुसंगत, स्थिर और पूर्वानुमानित बनी हुई है, जो आपसी सम्मान, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और जीत-जीत सहयोग पर जोर देती है, और द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के लिए एक स्थिर और विश्वसनीय ताकत के रूप में कार्य करती है।"
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