शनिवार सुबह अफगानिस्तान के कुछ हिस्सों में रिक्टर पैमाने पर 5.0 तीव्रता का भूकंप आया, इसके झटके कश्मीर घाटी में भी महसूस किए गए। भूकंपीय आंकड़ों के मुताबिक, भूकंप सुबह करीब 8:24 बजे आया। भूकंप अफगानिस्तान के बदख्शां क्षेत्र में ज़ायबक के पास 36.5536°N और 70.9259°E निर्देशांक पर केंद्रित था। इसकी उत्पत्ति सतह के नीचे लगभग 190 किलोमीटर की गहराई पर हुई, जिससे संभवतः जमीन पर महसूस होने वाली तीव्रता कम हो गई।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि भूकंप से लगभग 477 टन टीएनटी के बराबर ऊर्जा निकली, जो इसकी गहराई के बावजूद भूकंपीय गतिविधि की ताकत को उजागर करती है। भूकंप के समय, भूकंप के केंद्र पर मौसम बादल छाए हुए थे, तापमान लगभग 20.5 डिग्री सेल्सियस और मध्यम आर्द्रता थी।
पूरे कश्मीर में भूकंप के झटके महसूस किये गये
कश्मीर घाटी के कई हिस्सों में निवासियों ने हल्के झटके महसूस किए, हालांकि क्षति या चोट की तत्काल कोई रिपोर्ट नहीं थी।
भूकंप आने पर अपनाई जाने वाली सुरक्षा युक्तियाँ
भूकंप के दौरान जमीन पर गिर जाएं, किसी मजबूत मेज या डेस्क के नीचे छिप जाएं और तब तक रुके रहें जब तक झटके बंद न हो जाएं।
यदि कोई आश्रय उपलब्ध नहीं है तो अपने सिर और गर्दन को अपनी भुजाओं से सुरक्षित रखें।
यदि आप अंदर हैं तो घर के अंदर ही रहें; झटकों के दौरान बाहर न भागें।
खिड़कियों, कांच, दर्पणों और भारी वस्तुओं से दूर रहें जो गिर सकती हैं।
यदि आप बाहर हैं, तो इमारतों, पेड़ों, स्ट्रीट लाइटों और उपयोगिता तारों से दूर किसी खुले क्षेत्र में चले जाएँ।
यदि आप गाड़ी चला रहे हैं, तो पुलों, फ्लाईओवरों और इमारतों से दूर सुरक्षित रूप से रुकें और वाहन के अंदर ही रहें।
भूकंप के बाद
अपनी और दूसरों की चोटों की जाँच करें और यदि आवश्यक हो तो प्राथमिक उपचार प्रदान करें।
यदि आपकी इमारत क्षतिग्रस्त हो गई है तो झटकों की आशंका रखें और सुरक्षित स्थान पर चले जाएं।
यदि आपको रिसाव या क्षति का संदेह हो तो गैस और बिजली बंद कर दें।
क्षतिग्रस्त इमारतों में प्रवेश करने से बचें।
स्थानीय अधिकारियों और आपातकालीन सेवाओं के निर्देशों का पालन करें।
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रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ा भीषण युद्ध अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ा हो गया है जहां बारूद की गंध और भी ज्यादा तीखी होती नजर आ रही है। एक तरफ जहां आसमान से मौत बनकर मिसाइलें बरस रही हैं। वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी देशों की मदद ने रूस का गुस्सा और ज्यादा बढ़ा दिया है। ताजा घटनाक्रम में ब्रिटेन ने यूक्रेन को सैन्य सहायता का अब तक का सबसे बड़ा कवच प्रदान किया है। जिसने क्रेमलीन की परेशानी पर बल डाल दिए हैं। लंदन की ओर से कीव को अत्याधुनिक ड्रोन की एक ऐसी खेप भेजी जा रही है जो युद्ध के मैदान में पासा पलटने का दम रखती है। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि ब्रिटेन द्वारा घोषित अब तक के सबसे बड़े ड्रोन पैकेज की पहली खेप फ्रंट लाइन पर पहुंचनी शुरू हो गई है। यह केवल कुछ 100 या हजार ड्रोन की बात नहीं है बल्कि साल 2026 के अंत तक यूक्रेन को करीब 1 लाख ड्रोन मिलने की उम्मीद है। इनमें स्ट्राइक ड्रोन से लेकर टोही और समुद्री ऑपरेशंस में काम आने वाले एडवांस गैजेट शामिल हैं।
यूक्रेन ने इसके लिए ब्रिटेन का आभार जताते हुए कहा कि यह मदद उनकी रक्षा पंक्ति को टूटने से बचाएगी और दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने में कारगर साबित होगी। ब्रिटेन का यह कदम उसकी उस व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है जिसके तहत वह इस वर्ष यूक्रेन को 3 अरब पाउंड यानी करीब 4 अरब अमेरिकी डॉलर की सैन्य सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है। खास बात यह है कि इस मदद को जी7 की उस विशेष पहल का भी समर्थन प्राप्त है जिसका लक्ष्य यूक्रेन की सैन्य क्षमताओं को पुनर्जीवित करना है। लेकिन इस मदद ने रूस को बुरी तरह से भड़का दिया है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि यूरोपीय देश अब सीधे तौर पर इस विनाशकारी संघर्ष का हिस्सा बनते जा रहे हैं। मॉस्को का तर्क है कि यूक्रेन को हथियारों की सप्लाई करना उसकी सुरक्षा को सुनिश्चित नहीं करेगा बल्कि पूरे यूरोपीय महाद्वीप को एक बड़े युद्ध की आग में धकेल देगा।
वहीं स्कूटनीतिक तनातनी के बीच जमीन पर तबाही का मंजर दहला देने वाला है। बुधवार की काली रात यूक्रेन के लिए किसी भी कयामत से कम नहीं थी। रूस ने एक बार फिर अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए कीव और उसके आसपास के इलाकों को निशाना बना दिया। यह पिछले दो सप्ताह का सबसे भीषण हवाई हमला बताया जा रहा है। राजधानी कीव की रात मिसाइलों की रोशनी और विस्फोटों की गूंज से थरा उठी। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबियाहा के मुताबिक रूस ने करीब 700 ड्रोनों और दर्जनों बैलेस्टिक और क्रूज मिसाइलों के जरिए मौत का तांडव रचा। इस हमले का असर कितना भयावह था इसका अंदाजा हताहतों की संख्या से लगाया जा सकता है।
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