Personal Loan: पर्सनल लोन की एक EMI भी कर दी मिस? जानिए आगे क्या हो सकता
पर्सनल लोन की एक EMI समय पर नहीं भर पाना हमेशा बड़ी वित्तीय परेशानी का संकेत नहीं होता। कभी सैलरी देर से आती है, बिजनेस पेमेंट अटक जाता है या बैंक खाते में पर्याप्त बैलेंस नहीं होने से ऑटो-डेबिट फेल हो जाता है। लेकिन यह सोचकर कि एक EMI ही तो है, अगले महीने दे देंगे, इसे टालना महंगा पड़ सकता है।
सबसे पहले जेब पर पड़ेगा असर
ईएमआई की तय तारीख निकलने के बाद बैंक या एनबीएफसी लोन एग्रीमेंट के मुताबिक लेट फीस, पेनल चार्ज या अतिरिक्त ब्याज वसूल सकता है। इसकी रकम अलग-अलग संस्थानों और लोन की शर्तों पर निर्भर करती है। शुरुआत में यह रकम छोटी लग सकती है, लेकिन भुगतान में ज्यादा देरी होने पर बकाया बढ़ता जाता है।
क्रेडिट स्कोर पर भी पड़ सकता है असर
ईएमआई भुगतान की जानकारी नियमित रूप से क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों को भेजी जाती है। अगर बकाया EMI लंबे समय तक जमा नहीं होती और इसकी रिपोर्टिंग होती है, तो इसका असर आपके क्रेडिट इतिहास पर पड़ सकता है।
इसका नुकसान आगे तब दिख सकता है, जब आप नया पर्सनल लोन, होम लोन या क्रेडिट कार्ड लेने के लिए आवेदन करें। लगातार समय पर EMI चुकाने से क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत होती है, जबकि भुगतान में देरी इसका उल्टा असर डाल सकती है।
बैंक के कॉल और मैसेज आ सकते हैं
ईएमआई मिस होने के बाद बैंक या एनबीएफसी की ओर से कॉल, SMS या दूसरे रिमाइंडर आना सामान्य प्रक्रिया है। अगर भुगतान किसी अस्थायी वित्तीय परेशानी की वजह से रुका है तो लेंडर से बात करना बेहतर है। समस्या छिपाने या कॉल से बचने के बजाय स्थिति स्पष्ट करने से समाधान निकालना आसान हो सकता है।
एक EMI को अगली किस्त तक न खींचें
अगर पहली बकाया EMI अगले महीने तक नहीं चुकाई गई तो दूसरी EMI भी देय हो जाएगी। ऐसे में दो किस्तों का बोझ एक साथ आ सकता है और धीरे-धीरे बकाया बढ़ने लगेगा। इसलिए मिस हुई EMI को जल्द से जल्द चुकाना बेहतर है।
ऑटो-डेबिट फेल होने की वजह भी जांचें
हर बार EMI मिस होने का कारण पैसों की कमी नहीं होता। ई-मैंडेट एक्सपायर होना, तकनीकी समस्या या ऑटो-डेबिट के समय खाते में पर्याप्त बैलेंस नहीं होना भी इसकी वजह हो सकती है। ऐसे में बैंक खाते की जांच करें और जरूरत पड़ने पर लेंडर से संपर्क करें।
इमरजेंसी फंड से बच सकती है परेशानी
मेडिकल खर्च, नौकरी में बदलाव या बिजनेस पेमेंट में देरी जैसी परिस्थितियां अचानक बजट बिगाड़ सकती हैं। ऐसे समय कुछ महीनों की EMI के बराबर इमरजेंसी फंड मददगार हो सकता है।
एक EMI मिस होना वित्तीय संकट नहीं है, लेकिन उसे नजरअंदाज करना समस्या बढ़ा सकता है। बकाया रकम जल्द चुकाएं और बैंक के संपर्क में रहें।
(प्रियंका कुमारी)
HRA Tax Exemption: कैश में किराया देते हैं तो भी मिलेगा HRA टैक्स छूट का फायदा? जानें नियम
कई नौकरीपेशा लोग मकान का किराया कैश में देते हैं। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि क्या बैंक ट्रांसफर या ऑनलाइन पेमेंट का रिकॉर्ड नहीं होने पर भी हाउस रेंट अलाउंस यानी HRA पर टैक्स छूट ली जा सकती है? इसका जवाब है- हां। सिर्फ कैश में किराया देने की वजह से हाउस रेंट अलाउंस का दावा खारिज नहीं होता। हालांकि, किराया वास्तव में दिया गया है, यह साबित करने के लिए सही दस्तावेज होना जरूरी।
कैश में किराया देने पर HRA क्लेम कैसे करें?
अगर आप मकान मालिक को हर महीने कैश में किराया देते हैं तो हर भुगतान की रसीद जरूर लें। रसीद पर कुछ जरूरी जानकारियां होनी चाहिए। जैसे, मकान मालिक का नाम और पता, किराए के मकान का पूरा पता, किस महीने का किराया दिया गया, किराए की रकम, भुगतान का तरीका यानी कैश। इससे जुड़ी सारी रसीदों को सुरक्षित रखना जरूरी है, क्योंकि इनसे किराया भुगतान का रिकॉर्ड तैयार होता है।
रेंट एग्रीमेंट भी रखें
किराए की रसीद के साथ रेंट एग्रीमेंट रखना भी फायदेमंद होता है। इसमें किराए की रकम, मकान का पता, किरायेदार और मकान मालिक की जानकारी जैसी चीजें दर्ज होती हैं। दोनों दस्तावेज साथ होने पर HRA क्लेम के दौरान किराए से जुड़े दावे को साबित करना आसान हो सकता है।
बैंक से कैश निकालने का रिकॉर्ड भी रखें
अगर आप बैंक से पैसे निकालकर मकान मालिक को किराया देते हैं तो कैश विड्रॉल का रिकॉर्ड भी संभालकर रख सकते हैं। हालांकि, सिर्फ बैंक से पैसे निकालने की एंट्री यह साबित नहीं करती कि वही रकम किराए के तौर पर मकान मालिक को दी गई थी।
इसलिए बैंक विड्रॉल रिकॉर्ड को किराए की रसीद और रेंट एग्रीमेंट के साथ रखना ज्यादा बेहतर है।
सालाना 1 लाख से ज्यादा किराया है तो PAN जरूरी
अगर पूरे साल का किराया 1 लाख रुपए से ज्यादा है तो HRA क्लेम करते समय आम तौर पर मकान मालिक का PAN देना जरूरी होता है। इसलिए किराएदार को पहले से मकान मालिक से PAN की जानकारी ले लेनी चाहिए।
HRA लेने वालों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
HRA टैक्स छूट का फायदा लेने के लिए कर्मचारी का वास्तव में किराए के मकान में रहना और किराया देना जरूरी है। फर्जी रसीद या गलत जानकारी देकर HRA क्लेम करने से टैक्स संबंधी परेशानी हो सकती है।
इसलिए कैश में किराया देने वालों के लिए सबसे जरूरी बात है कि हर महीने की भुगतान रसीद लें, उसे सुरक्षित रखें और रेंट एग्रीमेंट समेत किराए से जुड़े सभी दस्तावेज व्यवस्थित रखें। कैश पेमेंट अपने आप में HRA क्लेम को खत्म नहीं करता, लेकिन बिना पर्याप्त सबूत के दावा करना मुश्किल हो सकता है।
(प्रियंका कुमारी)
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