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भारत की ऊर्जा पर आत्मनिर्भरता के लिए न्यूक्लियर पावर जरूरी है: पूर्व अमेरिका ऊर्जा सचिव (आईएएनएस इंटरव्यू)

स्टैनफोर्ड, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका के पूर्व ऊर्जा सचिव और नोबेल पुरस्कार विजेता स्टीवन चू ने कहा कि न्यूक्लियर पावर भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता का आधार बन सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि भूराजनीतिक तनाव ग्लोबल फ्यूल मार्केट की कमजोरियों को सामने ला रहे हैं।

स्टीवन चू ने भारत के साथ क्लीन एनर्जी सहयोग बढ़ाने के समय अमेरिकी एनर्जी पॉलिसी का नेतृत्व किया था। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत रहे हैं और सतत व टिकाऊ लक्ष्यों पर केंद्रित रहे हैं।

उन्होंने न्यूज एजेंसी आईएएनएस को एक इंटरव्यू में बताया, “जब मैं ऊर्जा सचिव था, तो भारत में अपने समकक्षों के साथ मेरे बहुत करीबी और अच्छे संबंध थे। वे उन दिनों सस्टेनेबिलिटी, जलवायु परिवर्तन, इन सभी चीजों को लेकर बहुत गंभीर थे।”

उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि भारत इन आदर्शों के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। शायद अमेरिका में थोड़ी रुकावट आई है, लेकिन मुझे उम्मीद है कि हम इस प्रतिबद्धता पर वापस लौटेंगे।”

चू ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए बड़ी अर्थव्यवस्था को मिलकर काम करना होगा और कहा, भविष्य में दुनिया को आगे ले जाने में भारत, चीन, अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) जैसे बड़े देशों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। ये देश मिलकर ही दुनिया की दिशा तय करेंगे।

भविष्य में सहयोग के क्षेत्र पर, उन्होंने न्यूक्लियर एनर्जी और नई रिएक्टर टेक्नोलॉजी की ओर इशारा किया और कहा, “मुझे लगता है कि भारत ब्रीडर रिएक्टर डेवलप कर रहा है, जो बहुत बढ़िया है। ये फास्ट टर्म रिएक्टर हैं जो कन्वेंशनल सिजन रिएक्टर के लिए बहुत सारा फ्यूल जलाने में मदद करते हैं।”

उन्होंने हाल के झगड़ों को घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई जरूरत से जोड़ा और कहा, “मुझे लगता है कि हाल के युद्धों (यूक्रेन और ईरान) ने एनर्जी सिक्योरिटी, सीमाओं के अंदर एनर्जी एक्सेस को इसका बहुत जरूरी हिस्सा बना दिया है।”

चू ने कहा कि न्यूक्लियर पावर स्टेबल सप्लाई सुनिश्चित करने में साफ फायदा देती है। उन्होंने कहा, “मैं न्यूक्लियर को वहां देखता हूं जहां अपने देश के भीतर ही ईंधन डालकर सीमित स्थान में ऊर्जा उत्पादन किया जा सकता है और इससे लंबे समय तक ऊर्जा मिलती रहती है। इसके विपरीत, प्राकृतिक गैस की उपलब्धता आमतौर पर हफ्तों या अधिकतम कुछ महीनों तक ही मापी जाती है।”

यह पूछे जाने पर कि क्या न्यूक्लियर एनर्जी भारत को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद कर सकती है, चू ने कहा, “हां, जब तक वे यह पता लगा लें कि बजट में, समय पर रिएक्टर कैसे बनाए जाएं।”

उन्होंने एफिशिएंसी के उदाहरण के तौर पर रिएक्टर बनाने के लिए चीन के तरीके का जिक्र किया और कहा, “चीन ने यह पता लगा लिया है। उनके पास दो दर्जन रिएक्टर हैं जो बजट में, समय पर हैं और वे सीखने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं। वे रिएक्टर एक से दो, तीन से चार बनाने के लिए एक ही क्रू का इस्तेमाल करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “दुनिया को इस उदाहरण को फॉलो करना चाहिए। मैं बहुत उत्साहित हूं। मैं फैसले का बहुत बड़ा फैन हूं।”

चू ने न्यूक्लियर वेस्ट के डिस्पोजल को लेकर चिंताओं पर भी बात की और कहा कि इसे तकनीकी नवाचार से मैनेज किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “डिस्पोजल एक हल होने वाली समस्या है।”

उन्होंने नई तकनीक के बारे में बताया जिन पर काम किया जा रहा है और कहा, “मैं एक समूह का सलाहकार हूं जो उन तकनीकों को देखने की कोशिश कर रहा है, जिनका इस्तेमाल ऑयल ड्रिलिंग में एक किलोमीटर नीचे बोरहोल ड्रिल करने के लिए किया जाता है और फिर साइड में न्यूक्लियर डिस्पोजल को बिना किसी मानव के कनस्तरों में जमा करने के लिए किया जाता है।”

उन्होंने कहा कि ऐसे तरीकों से लागत कम हो सकती है और स्टोरेज के विकल्प बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा, “इसमें और भी कई जियोलॉजिकल साइट्स उपलब्ध कराने की क्षमता है। लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि इसकी लागत कम होगी।”

उन्होंने आगे कहा, “मानवयुक्त और मानवरहित अंतरिक्ष उड़ानों के बीच अंतर बहुत बड़ा होता है, यह लगभग दिन और रात जैसा फर्क है। यदि बिना सुरंगों और वेंटिलेशन शाफ्ट बनाए संसाधनों को जमा करना संभव हो सके, तो यह एक बड़ी उपलब्धि होगी।”

चू ने कहा कि ये तरक्की न्यूक्लियर पावर को फिर से शुरू करने की बात को मजबूत करती है। उन्होंने कहा, “मैं न्यूक्लियर को एक नया रूप देते हुए देखने में बहुत दिलचस्पी रखता हूं।”

जीवाश्म ईंधन को लेकर उन्होंने ग्लोबल सप्लाई में अमेरिका की बढ़ती भूमिका पर ध्यान दिया, लेकिन इसके दबदबे को ज्यादा आंकने के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “अमेरिका बड़े पैमाने पर दुनिया में जीवाश्म ईंधन का बड़ा सप्लायर बन गया है।”

साथ ही, उन्होंने ग्लोबल मार्केट के आपस में जुड़े होने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “सिर्फ इसलिए कि अमेरिका अब एक बड़ा खिलाड़ी है, इसका मतलब यह नहीं है कि मिडिल ईस्ट, रूस, ये सभी दूसरे देश इस सप्लाई का हिस्सा हैं। इसलिए हमें दुनिया में थोड़ी और स्थिरता चाहिए।”

गल्फ में संकट की बात करते हुए, चू ने लंबे समय तक चलने वाले आर्थिक प्रभाव की चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि ब्लॉकेड, सब कुछ खत्म हो जाएगा। इसका कोई मकसद नहीं है।”

उन्होंने कहा, “थोड़ी रुकावट के भी लंबे समय तक चलने वाले नतीजे हो सकते हैं। ज्यादातर ऑयल प्रोडक्शन, गैस प्रोडक्शन इंफ्रास्ट्रक्चर को बचाकर रखा गया है। अगर उन्होंने उस पर बमबारी शुरू कर दी, तो यह बहुत बुरा होगा।”

उन्होंने आगे कहा, “लेकिन इसके बिना भी, अर्थव्यवस्था को ठीक होने में महीनों लगेंगे। तेल की कीमतें, गैसोलीन की कीमतें, डीजल फ्यूल की कीमतें, वे एक हफ्ते में कम नहीं होने वाली हैं।”

उन्होंने कंज्यूमर्स को देर से मिलने वाली राहत पर जोर देते हुए कहा, “वे आधे साल में कम हो सकती हैं, लेकिन इसमें वक्त लगेगा।”

चू ने स्थिर व्यापार प्रवाह के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि स्थापित व्यापार पैटर्न में बाधा नहीं डालना बेहद जरूरी है, क्योंकि इन्हीं से असल में दुनिया में बहुत खुशहाली आई है।

भारत सबसे तेजी से बढ़ते बड़े एनर्जी कंज्यूमर्स में से एक है, जहां औद्योगिक विकास और शहरीकरण की वजह से डिमांड तेजी से बढ़ रही है। देश इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करने और लंबे समय के लिए ऊर्जा सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए रिन्यूएबल और न्यूक्लियर पावर समेत अपने एनर्जी मिक्स को बढ़ा रहा है।

--आईएएनएस

केके/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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Akshay Tritiya 2026: अक्षय तृतीया से पहले बार-बार दिख रह हैं ये 5 सपने? तो समझ लें खुलने वाले हैं आपके किस्मत के द्वार

Akshay Tritiya 2026: अक्षय तृतीया हिंदू धर्म का एक बेहद पवित्र और शुभ पर्व माना जाता है. इस दिन को विशेष रूप से सुख, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. "अक्षय" शब्द का अर्थ होता है जो कभी समाप्त न हो. यानी इस दिन किए गए अच्छे कार्यों का फल कभी खत्म नहीं होता, बल्कि बढ़ता ही रहता है. साल 2026 में अक्षय तृतीया कल यानी 19 अप्रैल, रविवार को मनाई जाएगी. इस दिन लोग पूजा-पाठ, दान-पुण्य और धार्मिक कार्य करते हैं. मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कर्म जीवन में खुशहाली और सफलता लेकर आते हैं.

अक्षय तृतीया का आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया का दिन बहुत ही शुभ ऊर्जा से भरा होता है. इस दिन बिना किसी मुहूर्त के भी शुभ कार्य शुरू किए जा सकते हैं. शादी, गृह प्रवेश, नया व्यापार या निवेश जैसे काम इस दिन करना लाभकारी माना जाता है. इस दिन दान करने का विशेष महत्व है. जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या धन देने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है.

अक्षय तृतीया से पहले दिखने वाले शुभ सपने

अक्षय तृतीया से पहले आने वाले सपनों को भी खास माना जाता है. ये सपने भविष्य के संकेत दे सकते हैं. आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ शुभ सपनों के बारे में.

सोना या गहने देखना

अगर सपने में सोना, चांदी या आभूषण दिखाई दें, तो यह धन लाभ का संकेत माना जाता है. यह सपना आर्थिक स्थिति मजबूत होने की ओर इशारा करता है.

मां लक्ष्मी का दर्शन

इसके अलावा अक्षय तृतीया से पहले सपने में देवी लक्ष्मी का कमल के फूल के साथ दिखाई देना बहुत शुभ माना जाता है. यह घर में सुख-समृद्धि और बरकत आने का संकेत होता है.

साफ पानी या बहती नदी

स्वच्छ पानी, नदी या झरना देखने का मतलब है कि जीवन में शांति और सकारात्मक बदलाव आने वाले हैं. यह मानसिक सुकून का भी संकेत देता है.

मंदिर या पूजा-पाठ

अगर सपने में मंदिर या पूजा करते हुए खुद को देखें, तो यह आध्यात्मिक उन्नति का संकेत है. यह बताता है कि आपके जीवन में अच्छे अवसर आने वाले हैं.

सूर्य या तेज रोशनी

उगता हुआ सूर्य या तेज प्रकाश देखना सफलता और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. यह आने वाले समय में प्रगति का संकेत देता है.

सपनों का क्या है महत्व?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सपनों को केवल कल्पना नहीं माना जाता. कई बार ये हमारे जीवन में आने वाली घटनाओं का संकेत भी देते हैं. खासकर अक्षय तृतीया जैसे पवित्र समय में देखे गए सपनों को अधिक महत्व दिया जाता है. हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर सपना सच हो. इन्हें केवल एक संकेत के रूप में समझना चाहिए. इनसे प्रेरणा लेकर सकारात्मक सोच अपनाना बेहद जरूरी है.

अक्षय तृतीया केवल एक पर्व नहीं, बल्कि नई शुरुआत और सकारात्मकता का प्रतीक है. इस दिन किए गए अच्छे काम जीवन में लंबे समय तक शुभ फल देते हैं. साथ ही, इस समय देखे गए शुभ सपने हमें आने वाले अच्छे समय की झलक दिखा सकते हैं. इस खास दिन पर पूजा, दान और अच्छे कर्म करके आप अपने जीवन में सुख और समृद्धि ला सकते हैं.

यह भी पढ़ें: Akshaya Tritiya 2026 Puja Niyam: अक्षय तृतीया पर श्री हरि और मां लक्ष्मी की इस विधि से करें पूजा, घर से दूर होगी नकारात्मक ऊर्जा

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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