नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के आरोपों ने देश भर में हड़कंप मचा दिया है। इस मामले में नामजद आठ आरोपियों में से एक, निदा खान के माता-पिता अब अपनी बेटी के बचाव में उतर आए हैं। उन्होंने दावा किया है कि निदा को एक गहरी राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। इंडिया टुडे टीवी से बात करते हुए निदा खान के पिता और परिजनों ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनके मुख्य दावे निम्नलिखित हैं:
साजिश का आरोप: परिवार का कहना है कि यह पूरा मामला नासिक के स्वयंभू 'गॉडमैन' अशोक खरात के खिलाफ चल रहे बलात्कार के मामले से ध्यान भटकाने के लिए रचा गया है।
गर्भावस्था और मानसिक प्रताड़ना: परिजनों ने बताया कि निदा वर्तमान में गर्भवती हैं और इन झूठे आरोपों के कारण पूरा परिवार गहरे सदमे और मानसिक तनाव में है।
शिकायतकर्ता से कोई संपर्क नहीं: पिता का दावा है कि निदा ने उस शिकायतकर्ता से कभी बात तक नहीं की थी, जिसने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
धार्मिक सद्भाव: माता-पिता ने स्पष्ट किया कि निदा ने कभी किसी को धर्मांतरण के लिए नहीं उकसाया और न ही कभी हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया। उन्होंने कहा, "हमारा परिवार सभी धर्मों का सम्मान करता है।"
निदा खान के पिता ने इंडिया टुडे टीवी को बताया कि उनकी बेटी पर लगे सभी आरोप (शुरुआत में उन्हें TCS नासिक BPO यूनिट की HR हेड बताया गया था) झूठे हैं, और दावा किया कि उनकी बेटी को एक साज़िश के तहत निशाना बनाया जा रहा है।
परिवार के अनुसार, यह मामला अन्य मामलों को दबाने के लिए बनाया गया है, जिसमें नासिक के स्व-घोषित 'गॉडमैन' अशोक खरात से जुड़ा विवाद भी शामिल है, जिसे हाल ही में बलात्कार के आरोपों में गिरफ़्तार किया गया था।
इंडिया टुडे टीवी ने निदा खान के माता-पिता और चाचा से भी बात की, और उन सभी ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि निदा ने तो उस शिकायतकर्ता से बात भी नहीं की थी, जिसने उन पर आरोप लगाए हैं।
परिवार ने बताया कि निदा खान इस समय भिवंडी में अपने ससुराल में रह रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि वह गर्भवती हैं और इन आरोपों के कारण पूरा परिवार परेशान है। माता-पिता ने यह भी कहा कि निदा ने कभी किसी से धर्मांतरण के लिए नहीं कहा और न ही कभी दूसरे धर्मों के देवी-देवताओं के बारे में कोई टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उनका परिवार सभी धर्मों का सम्मान करता है।
इस बीच, पुलिस सूत्रों के अनुसार, नासिक पुलिस ने निदा खान के पति को हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ कर रही है। वह पिछले दो महीनों से अपने पति के साथ मुंब्रा में रह रही थीं। इससे पहले, निदा खान क्रमशः नासिक और भिवंडी में रहती थीं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि उनके पति ने दावा किया कि उन्हें निदा खान की गतिविधियों के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं थी।
यह मामला क्या है?
TCS धर्मांतरण मामले ने पूरे देश को चौंका दिया है। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने एक गिरोह के रूप में काम किया, और मुख्य रूप से 18 से 25 वर्ष की आयु की महिला कर्मचारियों को निशाना बनाया। अब तक नौ FIR दर्ज की गई हैं, जिनमें एक पुरुष कर्मचारी की शिकायत भी शामिल है, जिसने धार्मिक उत्पीड़न और धर्मांतरण के प्रयास का आरोप लगाया है। शिकायतों में हिंदू देवी-देवताओं का अपमान, ज़बरन मांसाहारी भोजन खिलाना, धार्मिक उत्पीड़न और ज़ोर-ज़बरदस्ती, तथा विशिष्ट धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने के लिए दबाव डालना, आदि आरोप शामिल हैं। अब तक आठ लोगों को गिरफ़्तार किया गया है, जिनमें सात पुरुष – दानिश शेख, तौसीफ़ अत्तार, रज़ा मेमन, शाहरुख़ क़ुरैशी, शफ़ी शेख, आसिफ़ आफ़ताब अंसारी और शाहरुख़ शेख – और एक महिला शामिल हैं।
पुलिस ने बताया कि इनमें से कुछ आरोपी कंपनी में ऊँचे पदों पर थे और कथित तौर पर उन्होंने अपने पदों का दुरुपयोग करके सहकर्मियों को परेशान किया। एक अधिकारी ने आरोप लगाया कि निदा ख़ान ने एक महिला कर्मचारी को शिकायत दर्ज करने से रोका और उससे कहा कि "ऐसी चीज़ें तो होती रहती हैं।"
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने इन आरोपों को "बेहद चिंताजनक और परेशान करने वाला" बताया है। उन्होंने कहा कि तथ्यों का पता लगाने और दोषियों की पहचान करने के लिए TCS की COO आरती सुब्रमण्यम के नेतृत्व में एक विस्तृत जाँच की जा रही है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी परमाणु गतिरोध के बीच एक अत्यंत साहसी और चौंकाने वाला दावा किया है, जिसे अब उनकी 'एक्स्कवेटर डिप्लोमेसी' के रूप में देखा जा रहा है। एरिजोना में एक सार्वजनिक मंच से ट्रंप ने घोषणा की कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के भंडार को सौंपने और उसे अमेरिका ले जाने पर सहमत हो गया है। ट्रंप के अनुसार, वे बड़ी खुदाई मशीनों के साथ ईरान जाकर इस परमाणु सामग्री को सुरक्षित रूप से वापस लाएंगे। हालांकि, यह बयान जितना प्रभावशाली है, उतना ही विवादास्पद भी, क्योंकि ईरानी अधिकारियों ने यूरेनियम हस्तांतरण के ऐसे किसी भी समझौते से साफ इनकार कर दिया है। ट्रंप का यह 'बड़ा दांव' एक ओर बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद जगाता है, तो दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी की उनकी धमकी ने सैन्य और आर्थिक तनाव को और गहरा कर दिया है। अब पूरी दुनिया की नजरें पाकिस्तान में होने वाले दूसरे दौर की वार्ता पर टिकी हैं, जहां यह साफ होगा कि ट्रंप का यह दावा हकीकत है या केवल कूटनीतिक दबाव बनाने की एक रणनीति।
डोनाल्ड ट्रंप का चौंकाने वाला दावा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत को लेकर सकारात्मक रुख दिखाते हुए दावा किया है कि ईरान "हर बात पर सहमत" हो गया है। ट्रंप ने विशेष रूप से ईरान के संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के भंडार को लेकर बड़ा बयान दिया। एरिजोना के फीनिक्स में आयोजित 'टर्निंग पॉइंट USA' कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा: "हम ईरान के साथ मिलकर काम करेंगे और वहां से यूरेनियम लाने के लिए बड़ी खुदाई मशीनों (Excavators) का इस्तेमाल करेंगे। हम उसे वापस अमेरिका ले आएंगे।" हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है और यूरेनियम हस्तांतरण की किसी भी बात से इनकार किया है।
पहले दौर की विफलता और बढ़ता विवाद
पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में हुई वार्ता के विफल होने का मुख्य कारण परमाणु कार्यक्रम पर असहमति थी।
अमेरिकी पक्ष: उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने कहा कि ईरान का अमेरिकी मांगों को न मानना विफलता का कारण बना।
ईरानी पक्ष: ईरान ने अमेरिका की मांगों को "अनुचित" करार दिया और कहा कि उनका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उपयोग के लिए है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर बढ़ता तनाव
बातचीत विफल होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी की घोषणा कर दी है। ईरान ने इसे संघर्ष-विराम समझौते का उल्लंघन बताया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अमेरिका अपने वादों से पीछे हटता है, तो ईरान "आवश्यक जवाबी कदम" उठाएगा और इस मामले में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
सोमवार को होने वाली यह संभावित वार्ता वैश्विक तेल आपूर्ति और मध्य-पूर्व की स्थिरता के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि इस बार भी बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुँचती है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी दुनिया भर की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर सकती है।
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