महिला आरक्षण बिल लोकसभा में गिरा, नहीं मिला दो तिहाई बहुमत; जानें पक्ष और विपक्ष ने क्या कहा
महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 को लेकर सदन में चर्चा हुई. इसके बाद सदन में वोटिंग हुई, जिसमें विधेयक परित नहीं हो सका. बिल के पक्ष में 298 वोटे पड़े. वहीं विपक्ष में 230 विपक्ष में वोट पड़े. प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 358 के तहत इस बिल को पास करने के लिए कम से कम दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी. मगर बहुमत नहीं मिल सका. जरूरी बहुमत के लिए 326 वोटों की जरूरत थीं. ऐसे में 131वां संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो पाया.
इसके साथ ही संसदीय राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ऐलान किया है कि दो बिलों पर सदन में आगे चर्चा नहीं होगी. उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को अधिकार देने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेगी. इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने लोकसभा की कार्यवाही को शनिवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा की है.
लोकसभा में 489 सांसदों ने की वोटिंग
महिला आरक्षण विधेयक से जुड़े 131वां संविधान संशोधन बिल संसद में पारित नहीं हो सका. बिल के पक्ष में 298 वोट और विपक्ष में 230 वोट डाले गए. कुल सदन में 489 सांसदों ने मतदान किया.
विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई के बहुमत की जरूरत थी. सदन में 489 सांसद मौजूद थे. इस हिसाब से दो तिहाई 326 की जरूरत होती. बहुमत न मिलने के कारण यह विधेयक 28 वोट से गिर गया.
संसद 21 घंटे तक बहस हुई
बीते 11 सालों के मोदी सरकार के कार्यकाल में ऐसा पहला मौका था जब सरकार सदन में विधेयक को पारित नहीं करवा पाई. इस दौरान बहस पर जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर कई आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष वोट नहीं देगा तो यह बिल गिरेगा, मगर देश की महिलाओं को यह पता चलेगा कि उनके रास्ते की रुकावट कौन है? देश महिलाओं को पता चल जाएगा कि महिला आरक्षण का कौन विरोध कर रहा है? इस दौरान बिल पर करीब 21 घंटे की चर्चा हुई. इस चर्चा में कुल 130 सांसदों ने भाग लिया. इनमें 56 महिला सांसद थीं.
केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में सीटों को बढ़ाया जाना था
संविधान संशोधन बिल के तहत 2011 की जनगणना के आधार पर डिलिमिटेशन के बाद, 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को अपनाने के लिए लोकसभा सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाया जाएगा. इसे बढ़ाकर 850 किया जाना था. महिलाओं के लिए 33 परसेंट आरक्षण को शामिल करने के मामले में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में सीटों को बढ़ाया जाना था. इस बीच राहुल गांधी ने बिल के गिरने पर कहा कि यह महिला आरक्षण विधेयक नहीं था. इस तरह से चुनावी ढांचे को बदलने का प्रयास था. यह संविधान पर हमला था. इसे हमने हरा दिया है.
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कौन होते हैं AOR, जिन्हें CJI से एआई के इस्तेमाल पर मिली वॉर्निंग; कहा-भरोसा अहम
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने शुक्रवार को विधि पेशे के नैतिक दायित्वों पर जोर दिया। उन्होंने कहाकि नए ‘एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड’ (एओआर) को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) या अन्य बाहरी पक्षों को कानूनी कार्य आउटसोर्स करने के खिलाफ चेतावनी दी।
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