Vaishakh Amavasya 2026: वैशाख अमावस्या आज, बन रहा है विशेष संयोग, जानिए पूजन का शुभ मुहूर्त, विधि और धार्मिक महत्व
Vaishakh Amavasya 2026: आज यानी 17 अप्रैल 2026 को वैशाख अमावस्या का त्योहार श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया जा रहा है. वैशाख मास की अमावस्या विशेष मानी जाती है. हर महीने अमावस्या तिथि आती है. अमावस्या तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. इसके साथ ही पितरों के लिए तर्पण-पिंडदान श्राद्ध कर्म किए जाते हैं. शास्त्रों के अनुसार, साल की कुछ अमावस्या को बड़ी अमावस्या कही जाती हैं. इन बड़ी अमावस्या में वैशाख मास की अमावस्या भी आती है. इस साल वैशाख मास की अमावस्या पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं.
वैशाख अमावस्या पर गंगा-यमुना में स्नान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है. भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है. इस अमावस्या पर पितरों के लिए तर्पण करने से पितरों को शांति मिलती है. पितरों के आशीर्वाद से परिवार में सुख-शांति समृद्धि आती है. संतान सुख की प्राप्ति होती है. घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है. आइए जानते हैं आज किस मुहूर्त में पूजा करें.
वैशाख अमावस्या पर शुभ संयोग
पंचाग के अनुसार, वैशाख अमावस्या का पर्व इस साल आज 17 अप्रैल शुक्रवार को मनाया जाएगा. आज दो बेहद शुभ संयोग बन रहे हैं. इस साल वैशाख अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग पूरे दिन रहेगा. वहीं इस दिन सुबह 06 बजकर 29 मिनट से दोपहर 12 बजकर 02 मिनट तक अमृत सिद्धि योग भी रहेगा. इन शुभ योग में भगवान विष्णु, महादेव और पितरों की पूजा करने से कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होगी. इसके साथ ही जीवन के संकटों से छुटकारा मिलेगा.
वैशाख अमावस्या पर स्नान और पूजा का मुहूर्त
वैशाख अमावस्या का पर्व इस साल आज 17 अप्रैल शुक्रवार को मनाना बेहद शुभ होगा. आज स्नान-दान का शुभ मुहूर्त सुबह 05 बजकर 54 मिनट से सुबह 10 बजकर 44 मिनट तक रहेगा. इस मुहूर्त में स्नान-दान और पूजा पाठ करने से पूजा का पूरा फल प्राप्त होगा. सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी.
वैशाख अमावस्या की पूजा विधि (Vaishakh Amavasya 2026 Puja Vidhi)
वैशाख अमावस्या को सूर्योदय से पहले स्नान करें. गंगा-यमुना या पवित्र कुंड-सरोवर में स्नान करना शुभ होता है. कहीं न जा पाए तो घर पर ही स्नान के बाद गंगाजल अपने सिर पर अवश्य डालें. सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करें. भगवान विष्णु की पूजा करें. .चंदन और तुलसी पत्र चढ़ाएं. महादेव का रुद्राभिषेक करें. महादेव पर तुलसी पत्र, बेलपत्र और शमी पत्र चढ़ाएं. पितरों के तर्पण पिंडदान करें. ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें. ऊं नमः शिवाय मंत्र का जाप करें. ऊं पितृदेवाय नमः मंत्र का जाप करें. पीपल वृक्ष पर जल में तिल और गुड़ मिलाकर पितरों का ध्यान करते हुए अर्घ्य दें. अर्घ्य देते समय अपना मुख दक्षिण दिशा की ओर रखें. अपनी सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मण और जरुरतमंद लोगों को दान दें. गाय, कुत्ता, कौवा और चिटिंयों के लिए अन्न दान करें. मछिलयों को आटे की गोलियां खिलाएं.
वैशाख अमावस्या का महत्व (Vaishakh Amavasya 2026 Significance)
शास्त्रों में वैशाख मास की विशेष महिमा बताई गयी है. वैशाख मास का हर दिन पर्व की तरह मनाया जाता है. वैशाख मास की अमावस्या भी बेहद उत्तम मानी जाती है. इस अमावस्या पर स्नान-दान, तर्पण करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. भगवान विष्णु सभी पाप कर्मों से मुक्त कर देते हैं. महादेव सभी दुख-दर्दों से छुटकारा दिला देते हैं. पितरों की कृपा से घर में सुख-शांति आती है. धन-धान्य की वृद्धि होती है. वंश वृद्धि के साथ घर में शुभ और मांगलिक काम होते हैं. इसलिए वैशाख अमावस्या पर हरि और हर दोनों की पूजा के साथ पितरों के लिए तर्पण पिंडदान अवश्य करना चाहिए.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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