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चीन के दो नए स्थल यूनेस्को वैश्विक भू-उद्यान घोषित

बीजिंग, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। चीन के राष्ट्रीय वन एवं घासभूमि प्रशासन के अनुसार, फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित यूनेस्को कार्यकारी बोर्ड के 224वें सत्र में चीन के दो स्थलों (चच्यांग प्रांत का छांगशान भूवैज्ञानिक पार्क और सछ्वान प्रांत का सिगुनियांगशान भूवैज्ञानिक पार्क) को यूनेस्को वैश्विक भू-उद्यान का दर्जा दिया गया है।

इसके साथ ही चीन में ऐसे स्थलों की कुल संख्या बढ़कर 51 हो गई है, जो 24 प्रांतों और हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में फैले हैं।

छांगशान विश्व भू-उद्यान दक्षिण-पूर्वी चीन के चच्यांग प्रांत के छ्यूचो शहर में लगभग 1,043 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। यह स्थल नियोप्रोटेरोज़ोइक युग से लेकर सेनोज़ोइक काल तक के निरंतर भूवैज्ञानिक स्तरों को संजोए हुए है, जो पूर्वी एशिया में करीब एक अरब वर्षों के भूवैज्ञानिक इतिहास की दुर्लभ और सतत श्रृंखला प्रस्तुत करता है। यहां ग्रेप्टोलाइट्स और ट्राइलोबाइट्स जैसे प्राचीन जीवाश्म बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं।

वहीं, सिगुनियांगशान विश्व भू-उद्यान दक्षिण-पश्चिम चीन के सछ्वान प्रांत के आबा तिब्बती और छ्यांग स्वायत्त प्रीफेक्चर की श्याओचिन काउंटी में 2,764 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में स्थित है। यह क्षेत्र छिंगहाई-तिब्बत पठार और सछ्वान बेसिन के संक्रमण क्षेत्र में आता है। यह भू-उद्यान सोंगफ़ान-कान्ज़ी ओरोजेनिक बेल्ट के शिखांग शैली की तहों, शिखांग समूह की टर्बिडाइट फ्लाईश संरचनाओं, छिंगहाई-तिब्बत पठार के पूर्वी छोर की अत्यधिक ऊंची पर्वत चोटियों और अद्वितीय हिमनदी भू-आकृतियों के लिए जाना जाता है।

बता दें कि यह भू-उद्यान प्राचीन टेथिस महासागर के विकास से लेकर छिंगहाई-तिब्बत पठार के पूर्वी हिस्से के उत्थान तक की भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं का महत्वपूर्ण प्रमाण प्रस्तुत करता है, जो वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत मूल्यवान है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

--आईएएनएस

एबीएम/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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Rajya Sabha Deputy Chairman Election: हरिवंश तीसरी बार निर्विरोध चुने जाएंगे, विपक्ष ने नहीं उतारा अपना उम्मीदवार

राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए एनडीए की ओर से उम्मीदवार हरिवंश का लगातार तीसरी बार चुना जाना लगभग तय हो गया है. विपक्ष ने लोकसभा उपाध्यक्ष का पद रिक्त होने और परामर्श की कमी का आरोप लगाते हुए इस चुनाव का बहिष्कार किया है. शुक्रवार सुबह 11 बजे होने वाली इस प्रक्रिया में हरिवंश निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जा सकते हैं.

संसदीय राजनीति में हरिवंश नारायण सिंह लगातार तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए निर्विरोध चुने जाएंगे. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राज्यसभा सचिवालय को उनके समर्थन में अब तक कुल पांच नोटिस मिले हैं. वहीं दिलचस्प बात यह है कि मुख्य विपक्षी खेमे की ओर से किसी भी उम्मीदवार का नामांकन दाखिल नहीं हुआ है. 

विपक्ष ने किया चुनाव का बहिष्कार

हालांकि सदन में हंगामा होने के आसार बने हुए हैं. कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल ने इस पूरी प्रक्रिया के बहिष्कार का फैसला लिया है. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि बीते वर्षों लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद खाली रखना संसदीय परंपराओं का अपमान है. विपक्ष ने एक और मुद्दा उठाया कि राष्ट्रपति की ओर से नामित सदस्य को राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए चुनना इतिहास में पहली बार हुआ है. रमेश ने उम्मीद जताई 'हरिवंश 3.0'  विपक्ष की मांगों को लेकर ज्यादा उदार और संवेदनशील रहेंगे.

प्रस्तावों में दिखी एनडीए की एकजुटता

हरिवंश के पक्ष में सत्ता पक्ष ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है. सदन के नेता जेपी नड्डा ने पहला प्रस्ताव सामने रखा है. इसका समर्थन एस फांगनोन कोन्याक ने किया है. वहीं दूसरा प्रस्ताव भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन की ओर से सामने आया है. इसके साथ केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और आरएलडी नेता जयंत चौधरी ने भी हरिवंश के नाम पर अपना समर्थन दिया है. इन प्रस्तावों में शिवसेना के मिलिंद देवड़ा और आरएलएम के उपेंद्र कुशवाहा जैसे सहयोगी दलों के समस्यों ने भी अपना साथ दिया है. 

देश के पहले नामांकित सदस्य होंगे हरिवंश

हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से उच्च सदन को लेकर मनोनीत किए जाने के बाद हरिवंश इस पद को संभालने वालों में देश के पहले नामांकित सदस्य होंगे. इससे पहले वह जदयू के कोटे से संदन में थे. इस बार पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की खाली सीट पर उनकी सदन में वापसी हुई है.

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