केंद्र ने धोलेरा में भारत का पहला चिप निर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए एसईजेड को दी मंजूरी
नई दिल्ली, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने गुजरात के धोलेरा में टाटा सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर (आईटी/आईटीईएस सहित) के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) स्थापित करने की अधिसूचना जारी कर दी है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी।
यह एसईजेड करीब 66.166 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला होगा और इससे लगभग 21,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। यह परियोजना इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और आईटी-आधारित सेवाओं को समर्थन देने के लिए तैयार की गई है, जिसमें आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और संचालन व लॉजिस्टिक्स को आसान बनाने के लिए विशेष अनुमति प्रणाली भी शामिल होगी। मंत्रालय के अनुसार, यह भारत का पहला चिप निर्माण (फैब्रिकेशन) प्लांट होगा।
सरकार पहले भी सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए एसईजेड कानून में कई बड़े सुधार कर चुकी है। इन सुधारों का उद्देश्य उच्च निवेश को आकर्षित करना, नवाचार को बढ़ावा देना और कारोबार करने में आसानी को बढ़ाना है, ताकि भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर हब बन सके।
3 जून 2025 को जारी अधिसूचना के जरिए एसईजेड नियम, 2006 में अहम बदलाव किए गए। इसके तहत न्यूनतम जमीन की आवश्यकता 50 हेक्टेयर से घटाकर 10 हेक्टेयर कर दी गई। इसके अलावा, जमीन से जुड़े नियमों में लचीलापन, मुफ्त सप्लाई को नेट फॉरेन एक्सचेंज में शामिल करना, और घरेलू बाजार (डीटीए) में बिक्री की अनुमति जैसे कदम भी उठाए गए।
इन सुधारों के बाद एसईजेड बोर्ड ने कई बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इनमें माइक्रोन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का गुजरात के साणंद में सेमीकंडक्टर असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग प्लांट शामिल है, जिसमें लगभग 13,000 करोड़ रुपए का निवेश होगा। वहीं, एक्वस समूह कर्नाटक के धारवाड़ में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग एसईजेड स्थापित कर रहा है।
इसके अलावा सीजी सेमी, कायन्स सेमीकॉन और हुबली ड्यूरेबल गुड्स क्लस्टर जैसे प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई है, जो देश में सप्लाई चेन मजबूत करने, रोजगार बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेंगे।
इन सभी विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) से भारत में एक मजबूत, प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करने की परिकल्पना की गई है। बयान में कहा गया है कि इंडस्ट्री की भागीदारी और नीतिगत समर्थन के साथ ये कदम भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उत्पादन का बड़ा केंद्र बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
वैज्ञानिक बीना पिल्लई देश के प्रमुख बायोटेक संस्थान आरजीसीबी की नई निदेशक नियुक्त
तिरुवनंतपुरम, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। देश के प्रमुख जैव प्रौद्योगिकी संस्थानों में से एक, राजीव गांधी जैव प्रौद्योगिकी केंद्र (ब्रिक-आरजीसीबी) की नई निदेशक के रूप में प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. बीना पिल्लई की नियुक्ति की गई है। यह नियुक्ति केंद्र सरकार की कैबिनेट की नियुक्ति समिति द्वारा स्वीकृत की गई है और उनका कार्यकाल पांच वर्षों का होगा।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान और नवाचार परिषद के तहत कार्यरत आरजीसीबी देश में रोग जीवविज्ञान, ट्रांसलेशनल साइंस और तकनीकी विकास के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में यह नेतृत्व परिवर्तन भारत की बायोटेक्नोलॉजी महत्वाकांक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डॉ. पिल्लई, प्रोफेसर चंद्रभास नारायण का स्थान लेंगी, जिनका कार्यकाल पिछले साल सितंबर में समाप्त हुआ था। वह ऐसे समय में यह जिम्मेदारी संभाल रही हैं, जब संस्थान उच्च प्रभाव वाले नए क्षेत्रों में विस्तार की तैयारी कर रहा है।
वर्तमान में वह सीएसआईआर जीनोमिक्स और इंटीग्रेटिव बायोलॉजी संस्थान (सीएसआईआर-आईजीआईबी) में मुख्य वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत हैं और आरएनए बायोलॉजी तथा न्यूरोनल विकास के क्षेत्र में उनके कार्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है।
उनका शोध आरएनए की भूमिका, प्रारंभिक विकास, न्यूरोजेनेसिस, व्यवहार और रोगों की संवेदनशीलता पर केंद्रित रहा है। उन्होंने मानव रोगों में माइक्रो आरएनए मार्करों की पहचान में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
केरल के कलाडी की रहने वाली डॉ. पिल्लई ने मुंबई के रामनारायण रूइया कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई की और भारतीय विज्ञान संस्थान से इंटीग्रेटेड एमएस-पीएचडी किया। इसके बाद उन्होंने सीएसआईआर-आईजीआईबी में जीनोमिक्स और मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के क्षेत्र में मजबूत शोध कार्यक्रम स्थापित किया।
उनके वैज्ञानिक योगदान के लिए उन्हें नेशनल बायोसाइंस अवॉर्ड, आईएनएसए यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड और सीएसआईआर यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड (बायोलॉजिकल साइंसेज) सहित कई सम्मान मिल चुके हैं।
उनके नेतृत्व में आरजीसीबी में सीजीएमपी मानकों के अनुरूप सुविधा, बायो-मैन्युफैक्चरिंग हब और ऑन्कोलॉजी रेफरल अस्पताल जैसी प्रमुख राष्ट्रीय परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
इस नियुक्ति को भारत की रिसर्च से इनोवेशन तक की प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है और संस्थान के वैज्ञानिक समुदाय ने अत्याधुनिक शोध को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई है।
--आईएएनएस
डीएससी
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