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Bengal Election: वोटिंग से 48 घंटे पहले भी जुड़ सकेगा नाम! जानिए क्या है SC का वो आदेश जिसने बदल दिया वोटिंग का गणित

Bengal Election: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बीच मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और आपत्तियों और SIR प्रक्रिया को लेकर मचे घमासान पर सुप्रीम कोर्ट ने पूर्ण विराम लगा दिया है। शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए यह सुनिश्चित किया है कि कोई भी पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न रहे।

कोर्ट ने साफ कर दिया है कि यदि किसी व्यक्ति को मतदान से महज दो दिन पहले भी अपीलीय ट्रिब्यूनल से 'क्लीन चिट' मिल जाती है, तो उसे आगामी चुनावों में वोट डालने की अनुमति दी जाएगी।

​सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश: 'वोटिंग केवल अधिकार नहीं, भावना है' 
​सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मतदान केवल एक संवैधानिक अधिकार ही नहीं है, बल्कि यह एक भावनात्मक अधिकार भी है। कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि अपीलीय आदेशों को तत्काल लागू करने के लिए एक 'पूरक संशोधित मतदाता सूची' जारी की जाए।

जिन लोगों की अपील पर ट्रिब्यूनल चुनाव से दो दिन पहले तक फैसला सुना देगा, उनके नाम इस सप्लीमेंट्री लिस्ट में जोड़े जाएंगे। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि अपीलीय स्तर पर आपत्तियों के माध्यम से अब पूरी प्रक्रिया को दोबारा खोलने की कोशिश न की जाए, ताकि चुनावी प्रक्रिया में बाधा न आए।

​वोटिंग का शेड्यूल और ट्रिब्यूनल की समय-सीमा 
​सुप्रीम कोर्ट ने अलग-अलग चरणों के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय कर दी है:-

पहले चरण (23 अप्रैल) के लिए: अपीलीय ट्रिब्यूनल 21 अप्रैल तक उन व्यक्तियों की अपील पर फैसला दे देंगे जिनके नाम लंबित हैं। इनकी सप्लीमेंट्री लिस्ट 21 या 22 अप्रैल तक जारी होगी।

दूसरे चरण (29 अप्रैल) के लिए: जिन लोगों की अपील पर 27 अप्रैल तक फैसला आ जाएगा, वे 29 अप्रैल को मतदान कर सकेंगे।

अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद उसी रात मतदाता सूची संबंधित पक्षों को भेज दी जाए ताकि मतदान के दिन कोई तकनीकी दिक्कत न हो।

​ममता बनर्जी ने कहा सच्चाई कि हुई जीत 
​मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का पुरजोर स्वागत किया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, "मुझे अपनी न्यायपालिका पर गर्व है। मैं पिछले कई दिनों से लोगों से धैर्य रखने की अपील कर रही थी। आज सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि साजिश के तहत किसी का वोट नहीं छीना जा सकेगा।"

ममता ने इसे लोकतंत्र की जीत बताते हुए कहा कि जो लोग पात्र मतदाताओं को सूची से बाहर करने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें करारा जवाब मिला है।

​अनुच्छेद 142 और 'SIR' विवाद का अंत 
यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल में चल रही मतदाता सूची के पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) से जुड़ा था, जिसमें 34 लाख से अधिक अपीलें लंबित थीं। इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में जांच करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था।

विपक्ष का आरोप था कि इस प्रक्रिया की आड़ में एक विशेष वर्ग के मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट ने 'पूर्ण न्याय' सुनिश्चित करने के लिए अनुच्छेद 142 का उपयोग कर इस विवाद को सुलझा दिया है।

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