जालौर में ‘काला सोना’ मुर्रा भैंस का कमाल, कम खर्च में मिल रहा ज्यादा दूध, किसानों की आय में जबरदस्त बढ़ोतरी
Murrah Buffalo Dairy farming : पश्चिमी राजस्थान के जालौर जिले में पशुपालन अब तेजी से आय का मजबूत साधन बनता जा रहा है और इसमें मुर्रा भैंस अहम भूमिका निभा रही है. ‘काला सोना’ कहलाने वाली यह नस्ल अपनी अधिक दूध देने की क्षमता और कठिन परिस्थितियों में भी आसानी से ढलने के कारण किसानों की पहली पसंद बन गई है. गर्म और शुष्क जलवायु वाले इस क्षेत्र में जहां पानी और चारे की कमी रहती है, वहां भी मुर्रा भैंस अच्छा उत्पादन दे रही है. डेयरी व्यवसाय से जुड़े किसान बताते हैं कि यह नस्ल लंबे समय तक दूध देती है, जिससे उनकी आमदनी स्थिर बनी रहती है. हरियाणा और पंजाब से आई यह भैंस अब जालौर में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है. बढ़ती मांग और बेहतर उत्पादन के चलते यह किसानों के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन चुकी है.
16 साल की उम्र में कैसे कन्नौज के सम्राट बने हर्षवर्धन, बौद्ध धर्म और प्रयाग से रहा खास नाता, जाने इतिहास
सहर्षवर्धन के जीवन में बड़ा मोड़ तब आया जब उनके पिता प्रभाकर वर्धन का निधन हो गया. इसके बाद उनके बड़े भाई राज्यवर्धन ने राजगद्दी संभाली, लेकिन दुर्भाग्यवश उनकी भी हत्या कर दी गई. इसी दौरान उनकी बहन राज्यश्री के पति ग्रहवर्मन की भी मृत्यु हो गई और राज्यश्री को बंदी बना लिया गया. इन घटनाओं ने हर्षवर्धन को गहराई से प्रभावित किया और उन्होंने अन्याय के खिलाफ खड़े होने का संकल्प लिया.
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