‘एक्वा योग’ से बेहतर होगी सेहत, शारीरिक समस्याओं की छुट्टी तो मिलेगी मानसिक शांति
नई दिल्ली, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। पारंपरिक योग को पानी के साथ जोड़कर किया जाने वाला ‘एक्वा योग’ इन दिनों स्वास्थ्य प्रेमियों के बीच आकर्षण का केंद्र बन गया है। स्वीमिंग पूल या पानी में योगासन करने के शारीरिक व मानसिक अनगिनत लाभ हैं।
एक्वा योग के दौरान लोग पद्मासन, शीर्षासन, शवासन, पश्चिमोत्तानासन और बकासन जैसे आसनों का अभ्यास पानी में करते हैं। एक्वा योग योग की एक आधुनिक शैली है जिसमें योगासन स्वीमिंग पूल में किए जाते हैं। पानी की उत्प्लावन (उछाल) शरीर का वजन कम कर देती है, जिससे जोड़ों पर बहुत कम दबाव पड़ता है। इससे व्यायाम आसान और सुरक्षित हो जाता है। विशेष रूप से गठिया, जोड़ों के दर्द, सर्जरी के बाद रिकवरी या बुजुर्गों के लिए यह बेहद फायदेमंद है।
एक्वा योग शरीर की थकान को मिटाकर राहत देता है पानी में योग करने से जोड़ों और मांसपेशियों पर दबाव नहीं पड़ता। इससे लचीलापन बढ़ता है और स्ट्रेचिंग आसानी से हो पाती है। पानी में सांस लेने का तरीका सुधरता है। इससे न्यूरो संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है। पानी का शीतल स्पर्श मन को शांत करता है। तनाव, चिंता और अनिद्रा जैसी समस्याओं में कमी आती है। इसके नियमित अभ्यास से इम्युनिटी मजबूत होती है, रक्त संचार सुधरता है और थकान कम होती है। पानी का प्रतिरोध मसल्स को अच्छा व्यायाम देता है। इससे शरीर टोन होता है और वजन नियंत्रण में भी मदद मिलती है।
योग विशेषज्ञों का कहना है कि एक्वा योग न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य सुधारता है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभकारी है। पानी में योग नींद सुधारने में भी मदद करता है। यह न केवल शारीरिक फिटनेस देता है बल्कि मन की शांति और समग्र स्वास्थ्य भी प्रदान करता है।
एक्वा योग के साथ ही जल का इस्तेमाल कर कई रोगों का भी इलाज किया जाता है, जिसे हाइड्रोथेरेपी कहा जाता है। यह न केवल माइग्रेन बल्कि शरीर के दर्द, सूजन और तनाव में भी राहत देने में कारगर है। जोड़ों के दर्द, पीठ दर्द और कई अन्य शारीरिक व मानसिक रोगों में भी कारगर साबित हुई है। हाइड्रोथेरेपी शरीर की प्राकृतिक जीवन शक्ति को बढ़ाकर रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करती है। जब नींद, खान-पान, व्यायाम जैसी आदतें बिगड़ती हैं, तो शरीर कमजोर पड़ जाता है। हाइड्रोथेरेपी पानी के जरिए शरीर को डिटॉक्स करती है, रक्त संचार सुधारती है, मांसपेशियों को आराम देती है और सूजन कम करती है।
इस थेरेपी में गर्म पानी में स्नान, ठंडे पानी के पैक, स्टीम बाथ, पूल में व्यायाम या सिर पर बर्फ की मालिश जैसी विधियां शामिल हैं। एक अध्ययन में पुराने माइग्रेन के मरीजों पर हाइड्रोथेरेपी का असर देखा गया। 40 मरीजों को दो समूहों में बांटा गया। एक समूह को दवाओं के साथ हाइड्रोथेरेपी (गर्म पानी में हाथ-पैर डुबोना और सिर पर बर्फ की मालिश) दी गई, जबकि दूसरे को सिर्फ दवाएं। 45 दिनों बाद हाइड्रोथेरेपी वाले समूह में सिरदर्द की आवृत्ति, तीव्रता और प्रभाव में काफी कमी आई। साथ ही हार्ट रेट वेरिएबिलिटी में सुधार हुआ, जिससे ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम बेहतर हुआ।
--आईएएनएस
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
सोने की चमक बढ़ी, चांदी का दाम 2.55 लाख रुपए हुआ
मुंबई, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। सोने और चांदी की कीमत में गुरुवार को उछाल देखने को मिला, जिससे दोनों की कीमती धातुओं की कीमत क्रमश: करीब 1.55 रुपए प्रति 10 ग्राम और 2.55 लाख रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई हैं।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सुबह 10:45 पर सोने का कॉन्ट्रैक्ट (5 जून 2026) 1,016 रुपए या 0.66 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,54,964 रुपए पर था।
अब तक के कारोबार में सोने ने 1,54,501 रुपए का न्यूनतम स्तर और 1,54,990 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है।
चांदी का कॉन्ट्रैक्ट (5 मई 2026) 3,258 रुपए या 1.29 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,55,000 रुपए पर था। अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,54,074 रुपए का न्यूनतम स्तर और 2,55,735 रुपए का उच्चतम स्तर बनाया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। सोना 0.70 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,856 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.54 प्रतिशत की बढ़त के साथ 80 डॉलर प्रति औंस पर थी।
जानकारों के मुताबिक, अमेरिका के उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) के उम्मीद से कमजोर आंकड़ों के बाद अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में गिरावट होने से सोने की कीमतों में तेजी आई। इससे मुद्रास्फीति संबंधी तात्कालिक चिंताएं कम हुईं और बाजार का समग्र माहौल बेहतर हुआ। आंकड़ों से पता चला कि पीपीआई में मामूली वृद्धि हुई, जो उम्मीदों से कम रही। इससे संकेत मिलता है कि मुद्रास्फीति का दबाव मुख्य रूप से अमेरिका-ईरान संघर्ष जैसे बाहरी झटकों से प्रेरित है।
उन्होंने आगे बताया कि इससे डॉलर की सुरक्षित निवेश के रूप में मांग कम हुई और सोने की कीमतों में वृद्धि हुई, क्योंकि डॉलर के कमजोर होने से विदेशी खरीदारों के लिए सोना अधिक आकर्षक हो जाता है।
दुनिया की छह बड़ी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 97.80 पर पहुंच गया है, जो कि कुछ दिनों पहले 99 पर था।
--आईएएनएस
एबीएस/
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