अमेरिका ने ईरान वार्ता में प्रगति के दिए संकेत, कहा-समझौते की संभावनाओं को लेकर हैं आश्वस्त
वॉशिंगटन, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। व्हाइट हाउस ने कहा है कि ईरान के साथ बातचीत “सार्थक और जारी” है। हालांकि होरमुज़ जलडमरूमध्य को लेकर जारी तनाव अब भी वार्ता की गति और परिणाम को प्रभावित कर रहा है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने संवाददाताओं से कहा कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत में सक्रिय रूप से शामिल है। उन्होंने उन खबरों का खंडन किया जिनमें कहा गया था कि वॉशिंगटन ने औपचारिक रूप से मौजूदा युद्धविराम को बढ़ाने की मांग की है।
लेविट ने कहा, “इस समय हम इन वार्ताओं में पूरी तरह से शामिल हैं” और जोड़ा कि बातचीत “सार्थक और जारी” है।
उन्होंने बताया कि ईरान के साथ कई स्तरों पर बातचीत जारी है और आमने-सामने बैठकों की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि अभी कुछ भी अंतिम रूप नहीं दिया गया है।
उन्होंने कहा, “मैंने आमने-सामने बातचीत की संभावना को लेकर कुछ खबरें भी देखी हैं। इस पर चर्चा हो रही है लेकिन जब तक व्हाइट हाउस से आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक कुछ भी तय नहीं माना जाएगा।”
मध्यस्थता के प्रयासों पर बोलते हुए लेविट ने कहा, “इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान एक बेहतरीन मध्यस्थ रहा है,” और जोड़ा, “इसी वार्ता में वही एकमात्र मध्यस्थ है।”
उन्होंने कहा कि कई देशों ने बातचीत को आगे बढ़ाने में रुचि दिखाई है लेकिन प्रशासन इस्लामाबाद के माध्यम से एक सुव्यवस्थित वार्ता प्रक्रिया बनाए रखने पर ध्यान दे रहा है।
लेविट ने संकेत दिया कि अगर अगला दौर तय होता है, तो उसकी बैठक संभवतः पहले की बैठकों वाली ही जगह पर होगी।
व्हाइट हाउस ने वार्ता की दिशा को लेकर सतर्क आशावाद जताया। उन्होंने कहा, “हम समझौते की संभावनाओं को लेकर अच्छा महसूस कर रहे हैं।” यह जारी कूटनीतिक प्रयासों का हवाला देते हुए कहा गया।
साथ ही, लेविट ने स्पष्ट किया कि प्रशासन किसी समझौते के लिए समय-सीमा तय नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा, “मैं कभी भी अमेरिका के राष्ट्रपति की ओर से समय-सीमा निर्धारित नहीं करूंगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी बातचीत की स्थिति स्पष्ट कर दी है। “उन्होंने इन वार्ताओं में अपनी सीमाएं दूसरी ओर के सामने साफ कर दी हैं।”
व्हाइट हाउस ने क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों को लेकर अपनी स्थिति भी स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि जहां ईरान से जुड़े जहाजों को लक्षित करते हुए नाकेबंदी लागू है, वहीं अमेरिकी बल अन्य जहाजों के लिए आवाजाही की स्वतंत्रता सुनिश्चित कर रहे हैं।
लेविट ने कहा, “क्षेत्र में हमारी अमेरिकी सेनाएं उन जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता का समर्थन कर रही हैं जो गैर-ईरानी बंदरगाहों से होरमुज़ जलडमरूमध्य के जरिए आ-जा रहे हैं।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कार्रवाई “उन सभी देशों के जहाजों पर लागू होती है जो ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश कर रहे हैं या वहां से निकल रहे हैं।”
--आईएएनएस
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उज्जैन में मनरेगा कर्मचारियों को 8 माह से नहीं मिला वेतन, नाराज अधिकारी 2 दिन तक सामूहिक अवकाश पर
उज्जैन में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत कार्य करने वाले संविदा अधिकारी, कर्मचारी और उपयंत्री सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं। लंबे समय से ये कम वेतन मिलने से परेशान हैं, जिससे आक्रोशित होकर इन्होंने ये निर्णय लिया है। अपनी मांगों को लेकर इन्होंने 16 और 17 अप्रैल को दो दिवसीय सांभर का अवकाश पर जाने का निर्णय लिया है।
इस दो दिवसीय सामूहिक अवकाश पर जिले का समस्त तकनीकी अमला और अधिकारी कर्मचारी जाने वाले हैं। इससे मनरेगा का काम प्रभावित होने की बात कही जा रही है। चलिए पूरा मामला जान लेते हैं।
सामूहिक अवकाश मनरेगा कर्मचारी
इस संबंध में मनरेगा अभियंता संघ मध्य प्रदेश की ओर से जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को यह सूचना दी गई है कि जनपद पंचायत में जितने उपेंद्र कार्य कर रहे हैं उन्हें 8 महीने से वेतन नहीं मिला है। इस वजह से कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पारिवारिक दैनिक खर्च, बच्चों की फीस और इलाज जैसे खर्चे पूरे करना भी मुश्किल हो रहा है। आर्थिक अस्थिरता की वजह से कर्मचारी मानसिक तनाव में है और उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।
आंदोलन पर उतरे अधिकारी कर्मचारी
कर्मचारियों का कहना है कि वेतन न मिलने के बावजूद भी उन्होंने जल गंगा संवर्धन योजना सहित शासन की अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं पर काम करते हुए जिले को बेहतर प्रदर्शन दिलाने में अपना योगदान दिया है। इसके बावजूद भी उन्हें वेतन नहीं दिया जा रहा है। यही कारण है कि कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं। इस आंदोलन में उप यंत्री और समन्वयक भी उनके साथ दे रहे। प्रांतीय स्तर पर भी इस आंदोलन को समर्थन मिल रहा है। पदाधिकारी की ओर से ही स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि वेतन का भुगतान नहीं होता है तो सभी संविदा अधिकारी और कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे जिससे कार्यों पर व्यापक असर पड़ सकता है।
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