यूरोप के ऊर्जा संकट पर ट्रंप ने यूके की नीतियों पर उठाए सवाल, तेल उत्पादन बढ़ाने की सलाह
नई दिल्ली, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऊर्जा नीति और यूरोप की स्थिति को लेकर तीखी टिप्पणी की है। ट्रंप ने यूके को अधिक तेल उत्पादन बढ़ाने और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान देने की सलाह दी।
ट्रंप ने यूनाइटेड किंगडम की नॉर्थ सी ऑयल नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऊर्जा की भारी जरूरत के बावजूद यूके वहां तेल और गैस की खुदाई नहीं बढ़ा रहा है, जबकि नॉर्वे इस संसाधन से भारी मुनाफा कमा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पोस्ट में कहा, यूरोप को ऊर्जा की सख्त जरूरत है, फिर भी यूनाइटेड किंगडम नॉर्थ सी ऑयल को खोलने से मना कर रहा है, जो दुनिया के सबसे बड़े तेल क्षेत्रों में से एक है। यह बहुत दुख की बात है। एबरडीन में तो इस समय जबरदस्त तेजी होनी चाहिए थी। नॉर्वे अपना नॉर्थ सी ऑयल यूके को दोगुनी कीमत पर बेच रहा है। वे इससे बहुत ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं। यूके, जो ऊर्जा के मामले में नॉर्थ सी पर नॉर्वे से भी बेहतर स्थिति में है, उसे तो और ज्यादा खुदाई करके तेल निकालना चाहिए! यह बिल्कुल पागलपन है कि वे ऐसा नहीं कर रहे हैं... और, अब और कोई विंडमिल नहीं है।
इस बीच ट्रंप ने पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट को लेकर भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वार्ता की। फोन पर हुई इस बातचीत में पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की गई। साथ ही होर्मुज स्ट्रेट को खुला और सुरक्षित रखने के महत्व पर विचार-विमर्श किया गया। अस्थाई संघर्ष विराम के बाद प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप के बीच ये पहली बातचीत है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, मेरे मित्र, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फोन आया। हमने विभिन्न क्षेत्रों में अपने द्विपक्षीय सहयोग में हुई महत्वपूर्ण प्रगति की समीक्षा की। हम सभी क्षेत्रों में अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा की और होर्मुज स्ट्रेट को खुला और सुरक्षित रखने के महत्व पर भी जोर दिया।
वहीं, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दावा किया कि उन्होंने मौजूदा हालात को लेकर अपने ईरानी समकक्ष मसूद पेजेश्कियन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों से संयंम बरतने की अपील की है। साथ ही इस्लामाबाद में बेनतीजा रही बातचीत को फिर से शुरू करने, गलतफहमियों को दूर करने और किसी भी तरह के उकसावे से बचे रहने की अपील की।
--आईएएनएस
एवाई/डीएससी
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समंदर में छिड़ेगा 'टोल वॉर'? ट्रंप की नाकेबंदी से बदला वर्ल्ड ट्रेड का नक्शा, मंदी का बड़ा खतरा
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को ब्लॉक करके समुद्री रास्तों को एक घातक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. अब तक ईरान इसी रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर भारी-भरकम टोल लगाकर मोटी कमाई कर रहा था और इसी पैसे के दम पर वह जंगी मैदान में टिका हुआ था. लेकिन अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की इस ताकत को खत्म करने की ठान ली है. अमेरिका ने अपनी शक्तिशाली नेवी की बदौलत होर्मुज की नाकेबंदी कर दी है, जिससे ईरान का एकाधिकार खत्म हो रहा है.
ट्रंप की बारूदी चाल और टोल का खेल
दरअसल, ट्रंप भी अब उसी पुरानी रणनीति पर चल रहे हैं जो एक सदी पहले अमेरिकी नौसेना अधिकारी अल्फ्रेड थायर ने दी थी. उनका मानना था कि समुद्री शक्ति और व्यापारिक रास्तों पर कब्जा ही दुनिया की महान शक्तियों का भविष्य तय करेगा. ट्रंप ने होर्मुज की नाकेबंदी कर अपने तेवर साफ कर दिए हैं. अमेरिका न सिर्फ ईरान की कमाई रोकना चाहता है, बल्कि खुद भी इस रणनीतिक रास्ते से फायदा उठाने की फिराक में है. लेकिन इस बारूदी चाल ने दुनिया के अन्य समुद्री रास्तों पर भी खतरे की घंटी बजा दी है.
दुनिया के अन्य रास्तों पर मंडराया खतरा
होर्मुज में जो कुछ हो रहा है, उससे कई देशों की टेंशन बढ़ गई है. दुनिया का करीब 80 पर्सेंट व्यापार समुद्र के जरिए होता है. अगर होर्मुज की देखा-देखी अन्य बड़े समुद्री रास्तों पर भी देशों ने टोल वसूलना शुरू कर दिया, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी. स्वेज नहर और पनामा स्ट्रेट में पहले से ही टोल लिया जाता है, लेकिन अब आशंका है कि वहां भी कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं. सबसे बड़ा खतरा 'स्ट्रेट ऑफ मलक्का' पर है, जो इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर के बीच स्थित है.
एशिया और चीन के लिए बड़ी चुनौती
स्ट्रेट ऑफ मलक्का लगभग 900 किलोमीटर लंबा है और कुछ जगहों पर इसकी चौड़ाई 3 किलोमीटर से भी कम है. दुनिया का 40 पर्सेंट ग्लोबल ट्रेड और चीन का 80 पर्सेंट तेल यहीं से गुजरता है. अगर इन देशों ने भी टोल लगाना शुरू किया, तो एशिया का पूरा व्यापार प्रभावित होगा. यही वजह है कि चीन इस इलाके में अमेरिका की दखलंदाजी से बौखलाया हुआ है और लगातार चेतावनी दे रहा है. चीन के रक्षा मंत्री ने भी साफ किया है कि वे इस क्षेत्र में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेंगे.
अन्य चोक पॉइंट्स पर भी होगी वसूली?
दुनिया में कई ऐसे पॉइंट हैं जहां टोल लगने से व्यापार महंगा हो जाएगा. यमन और जिबूती के बीच 'बाब अल-मंडेब' पर पहले से ही युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं. इसके अलावा स्पेन और मोरक्को के बीच 'स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर' पर टोल लगा तो यूरोप-अफ्रीका का ट्रेड महंगा होगा. तुर्की ब्लैक सी के रास्ते पर टोल लगाकर मोटी कमाई कर सकता है, जबकि डेनमार्क 'डेनिश स्ट्रेट' से बाल्टिक सागर जाने वाले जहाजों को रोक सकता है. सबसे व्यस्त शिपिंग लेन 'इंग्लिश चैनल' पर यूके और फ्रांस की मनमानी बढ़ सकती है.
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा बुरा असर
डिफेंस एक्सपर्ट पीके सहगल का मानना है कि अगर हर चोक पॉइंट पर ऐसा ही सीन रहा, तो व्यापार करना बहुत महंगा हो जाएगा. इससे दुनिया दो खेमों में बंट जाएगी और छोटे-छोटे देश भी बड़ी ताकतों को ब्लैकमेल करने लगेंगे. इसका सबसे ज्यादा बोझ आम आदमी की जेब पर पड़ेगा क्योंकि हर सामान की कीमत कई गुना बढ़ जाएगी. फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या होर्मुज का रास्ता जंग से खुलेगा या बातचीत से, हालांकि अभी शांति के आसार बेहद कम नजर आ रहे हैं. 22 अप्रैल तक का समय बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि तब तक के लिए एक नाजुक युद्धविराम लागू है.
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