सूंघने की क्षमता में गिरावट भी अल्जाइमर्स का शुरुआती संकेत
नई दिल्ली, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। अल्जाइमर एक ऐसी अवस्था है जिसमें ढलती उम्र के साथ याददाश्त कमजोर होती चली जाती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, अल्जाइमर डिमेंशिया (मस्तिष्क क्षीणता) का एक प्रकार है। इसमें याददाश्त के साथ-साथ सोचने-समझने, निर्णय लेने, और पहचानने व बोलने और समझने की क्षमता में गिरावट आती है। कुछ ऐसे लक्षण होते हैं जिन पर गौर किया जाए तो इसको काबू में किया जा सकता है। इसमें से एक सूंघने की क्षमता भी है।
एक नए शोध में संकेत मिला है कि सूंघने की क्षमता में कमी अल्जाइमर्स के शुरुआती संकेत हो सकते हैं, जो याददाश्त में गिरावट के स्पष्ट लक्षणों से पहले ही दिखाई दे सकती है।
यह निष्कर्ष प्रतिष्ठित जर्नल नेचर कम्युनिकेशन्स में प्रकाशित हुआ है, जिसमें बताया गया कि दिमाग में होने वाले शुरुआती बदलाव इंद्रियों, विशेष रूप से सूंघने की क्षमता पर असर डालते हैं।
जर्मनी के डीजेडएनई और लुडविंग-मैक्सिमिलियंस-यूनिवर्सिटी म्यूनिख के वैज्ञानिकों ने पाया कि दिमाग की प्रतिरक्षा प्रणाली इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। शोध के अनुसार, माइक्रोग्लिया नामक प्रतिरक्षा कोशिकाएं गलती से उन तंत्रिका रेशों पर हमला कर सकती हैं, जो सूंघने की क्षमता के लिए जरूरी होते हैं।
अध्ययन में बताया गया कि सूंघने से जुड़ी समस्या तब उत्पन्न होती है, जब दिमाग के दो अहम हिस्सों के बीच संचार बाधित हो जाता है। इनमें ओलफैक्ट्री बल्ब, जो नाक से आने वाले गंध संकेतों को प्रोसेस करता है, और लोकस कोरुलियस शामिल हैं, जो इस प्रक्रिया को तंत्रिका कनेक्शनों के जरिए नियंत्रित करता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, जब माइक्रोग्लिया इन दोनों हिस्सों के बीच संपर्क को प्रभावित करती हैं, तो गंध पहचानने की क्षमता कमजोर पड़ने लगती है। यही बदलाव आगे चलकर अल्जाइमर के अन्य लक्षणों का संकेत बन सकते हैं।
इस अध्ययन में चूहों और इंसानों, दोनों पर आधारित साक्ष्य शामिल किए गए। शोधकर्ताओं ने दिमाग के ऊतकों के विश्लेषण और पीईटी स्कैनिंग के जरिए यह समझने की कोशिश की कि बीमारी के शुरुआती चरणों में ये परिवर्तन कैसे होते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सूंघने की क्षमता में कमी को समय रहते पहचाना जाए, तो यह अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारी के शुरुआती निदान में मददगार साबित हो सकता है, जिससे इलाज और देखभाल के बेहतर विकल्प विकसित किए जा सकते हैं।
--आईएएनएस
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Punjab में महिलाओं के लिए खास योजना की शुरुआत, हर महीने आएंगे 1000 से 1500 रुपए; जानिए कैसे होगा रजिस्ट्रेशन
Punjab News: पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के जन्मदिवस के खास मौके पर 'मांवां-धीयां सतिकार योजना' की घोषणा की है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाना और उन्हें छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने से बचाना है. मुख्यमंत्री ने इस पहल को राज्य की सबसे बड़ी महिला सुरक्षा और कल्याणकारी योजना बताया है.
किसे और कितना मिलेगा लाभ
इस योजना के तहत राज्य की उन सभी महिलाओं को शामिल किया गया है जिनकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक है. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग की पात्र महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी. वहीं, अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाली महिलाओं के लिए यह राशि 1500 रुपये प्रति माह तय की गई है. सरकार का अनुमान है कि इस योजना से राज्य की लगभग 97 प्रतिशत महिलाएं लाभान्वित होंगी, जो अपने आप में एक बड़ा आंकड़ा है.
पंजीकरण की प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तारीखें
योजना को सुचारू रूप से लागू करने के लिए सरकार ने इसे दो चरणों में बांटने का फैसला किया है. पहले चरण में एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत 9 हलकों का चयन किया गया है. इनमें आदमपुर, मलोट, श्री आनंदपुर साहिब, दिड़बा, सुनाम, मोगा, कोटकपूरा, बटाला और पटियाला देहाती शामिल हैं. इन क्षेत्रों में 15 अप्रैल 2026 से रजिस्ट्रेशन का काम शुरू कर दिया जाएगा. इसके बाद, राज्य के बाकी बचे 108 हलकों में 15 मई 2026 से पंजीकरण प्रक्रिया शुरू होगी. सबसे राहत की बात यह है कि रजिस्ट्रेशन के लिए कोई आखिरी तारीख तय नहीं की गई है.
जुलाई से खातों में आने लगेगी राशि
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि योजना के तहत पैसों का भुगतान जुलाई 2026 से शुरू होगा. यदि कोई महिला देरी से भी पंजीकरण कराती है, तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है. सरकार ने भरोसा दिलाया है कि देरी से जुड़ने वाली महिलाओं को भी जुलाई से मिलने वाली बकाया राशि का पूरा भुगतान किया जाएगा. इस योजना के लिए पंजाब सरकार ने साल 2026-27 के बजट में 9300 करोड़ रुपये का भारी-भरकम फंड आवंटित किया है, ताकि भुगतान में कभी कोई रुकावट न आए.
जरूरी दस्तावेज और सखियों की मदद
पंजीकरण की प्रक्रिया को सरकार ने बहुत ही आसान रखा है ताकि आम महिलाओं को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें. आवेदन के लिए केवल तीन मुख्य दस्तावेजों की जरूरत होगी: पंजाब के पते वाला आधार कार्ड, पंजाब का वोटर आईडी और बैंक की पासबुक. जो महिलाएं 1500 रुपये वाली श्रेणी (अनुसूचित जाति) में आती हैं, उन्हें अपना जाति प्रमाण पत्र देना होगा. अगर किसी के पास फिलहाल जाति प्रमाण पत्र नहीं है, तो भी वह रजिस्ट्रेशन करा सकती हैं. ऐसी महिलाओं को तब तक 1000 रुपये मिलेंगे जब तक वे अपना प्रमाण पत्र जमा नहीं कर देतीं.
घर-घर पहुंचेंगी महिला सतिकार सखियां
योजना को जमीनी स्तर पर हर घर तक पहुंचाने के लिए राज्य भर में 26,000 से अधिक पंजीकरण केंद्र बनाए जा रहे हैं. ये केंद्र आंगनवाड़ी, सेवा केंद्रों और नगर निगम के दफ्तरों में होंगे. इसके साथ ही सरकार 'महिला सतिकार सखियों' की एक बड़ी टीम तैनात कर रही है. ये सखियां हर गांव और वार्ड में घर-घर जाकर महिलाओं को फॉर्म भरने में मदद करेंगी. अगर किसी महिला के पास जरूरी कागजात नहीं हैं, तो ये सखियां उन्हें कागजात बनवाने में भी सहयोग करेंगी.
महिलाओं को बांटे पंजीकरण प्रमाणपत्र
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि जब महिला के हाथ में पैसा होता है, तो वह पूरे परिवार की बेहतरी के लिए खर्च होता है. यह योजना न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से आजाद करेगी बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी बड़ी बढ़ोतरी करेगी. कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कई महिलाओं को टोकन के तौर पर पंजीकरण प्रमाणपत्र भी बांटे. लाभार्थियों ने सरकार के इस फैसले की सराहना करते हुए इसे अपनी जिंदगी बदलने वाला कदम बताया है.
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