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छत्तीसगढ़ के वेदांत पावर प्लांट में धमाका, 10 की मौत, कई घायल

छत्तीसगढ़ के सक्ति जिले के सिंघीतराई इलाके में स्थित वेदांता पावर प्लांट में बड़ा हादसा हो गया. दरअसल यहां हुए भीषण बॉयलर विस्फोट ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया.  इस हादसे में अब तक 10 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है.  जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं.

कैसे हुआ हादसा?

मिली जानकारी के अनुसार, प्लांट में काम के दौरान अचानक बॉयलर में जोरदार विस्फोट हो गया. धमाका इतना तेज था कि आसपास काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए. घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे.

घायलों का इलाज जारी

हादसे के बाद घायलों को तुरंत जिंदल फोर्टिस हॉस्पिटल और रायगढ़ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिलट में भर्ती कराया गया है. यहां पर डॉक्टरों की विशेष टीम इन घायलों का इलाज कर रही है. कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है. 

मिली जानकारी के मुताबिक कुल 21 मजदूर घायल अवस्था में अस्पताल लाए गए हैं. जबकि कई की हालत गंभीर बताई जा रही है.  इलाज के दौरान 7 लोगों की मौत हुई वहीं प्लांट में ही 3 मजदूरों ने दम तोड़ा दिया. इस तरह मरने वालों की संख्या 10 हो गई है. 

प्रशासन का बयान

इस घटना पर प्रफुल्ल ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि बॉयलर विस्फोट में 10 लोगों की मौत हुई है और करीब 15 लोग घायल हैं. प्रशासन ने तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है.

पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे

यह पहली बार नहीं है जब बॉयलर विस्फोट ने जानें ली हों. मार्च 2025 में गाजियाबाद के भोजपुर क्षेत्र में एक पेपर मिल में बॉयलर फटने से 3 मजदूरों की मौत हो गई थी. उस हादसे में विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि मजदूर कई फीट दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए थे.

सुरक्षा पर उठ रहे सवाल

लगातार हो रहे ऐसे हादसे औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं. क्या प्लांट में सुरक्षा नियमों का पालन हो रहा था? क्या बॉयलर की नियमित जांच की गई थी? या फिर क्या कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा प्रशिक्षण मिला था? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे.

सक्ति जिले का यह हादसा न केवल एक दुखद घटना है, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा की अनदेखी के गंभीर परिणामों को भी उजागर करता है.  सरकार और संबंधित एजेंसियों के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वे ऐसी घटनाओं की गहन जांच करें और भविष्य में इस तरह के हादसों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाएं. 

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मेडिकल क्षेत्र में एआई सहायक है, लेकिन मजबूत क्लिनिकल आधार जरूरी: डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को बाल चिकित्सा गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी और पोषण की पोस्टग्रेजुएट पाठ्यपुस्तक के दूसरे संस्करण का विमोचन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि जब मजबूत क्लिनिकल आधार तैयार हो जाता है, तब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एक उपयोगी सहायक और सक्षम बनाने वाला माध्यम बन सकता है।

मंत्री ने मेडिकल शिक्षा में मजबूत क्लिनिकल फाउंडेशन की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि एआई का बढ़ता उपयोग अपनी जगह है, लेकिन बुनियादी चिकित्सा ज्ञान और प्रशिक्षण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

इस किताब का संपादन प्रो. अनुपम सिबल और डॉ. सरथ गोपालन ने किया है, जबकि इसकी प्रस्तावना कैथलीन बी श्वार्ट्ज ने लिखी है। कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने कहा कि तकनीक को चिकित्सा शिक्षा में पूरक के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए, न कि इसके स्थान पर।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि छात्र बिना मूलभूत चिकित्सा सिद्धांतों को समझे एआई पर ज्यादा निर्भर हो जाते हैं, तो इससे उनकी सीखने की प्रक्रिया कमजोर हो सकती है और वे सक्षम डॉक्टर नहीं बन पाएंगे।

डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि मेडिकल क्षेत्र में रिसर्च और प्रकाशनों की गति तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में जरूरी है कि शिक्षा प्रणाली में कॉन्सेप्ट की स्पष्टता और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाए।

उन्होंने कहा कि तकनीक ने जानकारी तक पहुंच आसान बना दी है, लेकिन सीखने की प्रक्रिया को हमेशा बुनियादी सिद्धांतों और व्यावहारिक अनुभव पर आधारित होना चाहिए।

मंत्री ने मेडिकल शिक्षा प्रणाली को लगातार अपडेट करने की जरूरत भी बताई, ताकि नई चुनौतियों जैसे तकनीकी बदलाव और बीमारियों की बढ़ती जटिलता का सामना किया जा सके।

उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे पहले अपने बेसिक्स मजबूत करें और उसके बाद ही किसी विशेष क्षेत्र (स्पेशलाइजेशन) की ओर बढ़ें।

इस किताब के दूसरे संस्करण में हाल के मेडिकल विकास को शामिल किया गया है, जिसमें कुल 45 अध्याय जोड़े गए हैं। इसमें इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज, न्यूरो-गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, सीलिएक डिजीज और गाय के दूध से होने वाली एलर्जी जैसे विषय शामिल हैं।

इसके अलावा, इसमें गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और लिवर से जुड़ी बीमारियों में जेनेटिक्स, एंडोस्कोपी और लिवर ट्रांसप्लांट जैसे नए विषय भी जोड़े गए हैं।

यह किताब मुख्य रूप से बाल रोग (पीडियाट्रिक्स) के छात्र, विशेषज्ञ डॉक्टर और प्रैक्टिस कर रहे बाल रोग विशेषज्ञों के लिए तैयार की गई है।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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