पान का पत्ता बढ़ते यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में मददगार, सूजन और मसूड़ों के दर्द में दिलाता है राहत
नई दिल्ली, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय घरों में पान के पत्तों का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है। पूजा-पाठ और पारंपरिक रस्मों में इसका खास स्थान रहा है, लेकिन यह सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होता है।
वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार, पान के पत्तों में फिनोलिक कंपाउंड्स, फ्लेवोनॉयड्स और एंटीऑक्सिडेंट्स समेत कई तरह के सक्रिय तत्व पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर में फ्री रेडिकल्स को कम करने में मदद करते हैं, जिससे कोशिकाओं को नुकसान से बचाया जा सकता है। इसके अलावा इनमें एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी पाए गए हैं, जो शरीर को संक्रमण और सूजन से बचाने में मदद कर सकते हैं।
आज के समय में बढ़ता यूरिक एसिड एक आम समस्या बन गया है, जो जोड़ों में दर्द और सूजन का कारण बनता है। पान के पत्तों में मौजूद तत्व शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर करने में मदद करते हैं, जिससे यूरिक एसिड का स्तर संतुलित रखने में मदद मिलती है।
पाचन से जुड़ी समस्याओं के लिए भी पान के पत्तों को उपयोगी माना जाता है। आयुर्वेद और वैज्ञानिक रिसर्च की मानें, तो पान के पत्ते लार को बढ़ाते हैं, जिससे खाना पचाने में मदद मिलती है। यह गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं को कम करने में मददगार होते हैं। इसके नियमित और सीमित सेवन से पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
सूजन और मसूड़ों से जुड़ी दिक्कतों में भी पान के पत्तों काफी फायदेमंद है। इनमें पाए जाने वाले एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व शरीर में सूजन को कम करने में मदद करते हैं। अगर मसूड़ों में दर्द या सूजन हो, तो पान के पत्ते चबाने से कुछ राहत मिलती है। इसके अलावा, इनके एंटीबैक्टीरियल गुण मुंह के बैक्टीरिया को कम करने में भी सहायक होते हैं।
दांतों की सेहत के लिए भी पान के पत्तों को लाभकारी माना जाता है। पान के पत्तों में मौजूद प्राकृतिक तत्व दांतों और मसूड़ों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।
इसके अलावा, कुछ रिसर्च में यह पाया गया है कि पान के पत्तों में मौजूद एंटीमाइक्रोबियल गुण सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं में मदद करते हैं। शहद के साथ इसका सेवन गले को आराम देता है, जबकि इसके पत्तों का लेप हल्की चोट या घाव पर लगाने से तेजी से भरने में मदद मिलती है।
--आईएएनएस
पीके/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
सरकार ने नेशनल हाईवे पर ओवरलोडेड वाहनों के शुल्क संबंधी नियमों में किया बदलाव, लागू किए नए शुल्क नियम
नई दिल्ली, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने नेशनल हाईवे पर ओवरलोडेड (अधिक वजन वाले) वाहनों के लिए शुल्क संबंधी नियमों में बदलाव करते हुए नए नियम अधिसूचित किए हैं। इन नियमों को नेशनल हाईवे फीस (रेट निर्धारण और संग्रह) चौथा संशोधन नियम, 2026 के तहत लागू किया गया है।
ये नए नियम 15 अप्रैल 2026 से लागू होंगे, और इनका उद्देश्य ओवरलोडिंग पर नियंत्रण, सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देना और हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
नए नियमों के तहत अब ओवरलोडिंग के प्रतिशत के आधार पर शुल्क लिया जाएगा। अगर कोई वाहन 10 प्रतिशत तक अतिरिक्त वजन ले जा रहा है, तो उस पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा।
लेकिन अगर वाहन 10 प्रतिशत से ज्यादा और 40 प्रतिशत तक ओवरलोड है, तो उसे बेस रेट का दोगुना शुल्क देना होगा।
वहीं, 40 प्रतिशत से ज्यादा ओवरलोड वाले वाहनों पर बेस रेट का चार गुना शुल्क लगाया जाएगा।
नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ओवरलोडिंग की जांच टोल प्लाजा पर लगे प्रमाणित वजन मापने वाले उपकरणों से की जाएगी।
अगर किसी टोल प्लाजा पर वजन मापने की सुविधा नहीं है, तो वहां ओवरलोड शुल्क नहीं लिया जाएगा।
इसके अलावा, ओवरलोडिंग शुल्क केवल फास्टैग के जरिए ही वसूला जाएगा, और ऐसे वाहनों की जानकारी राष्ट्रीय वाहन रजिस्टर (वाहन) में दर्ज की जाएगी।
जो वाहन बिना वैध फास्टैग के नेशनल हाईवे पर प्रवेश करेंगे, उनके खिलाफ मौजूदा नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, ये नए नियम उन कुछ निजी निवेश परियोजनाओं पर लागू नहीं होंगे, जो पहले से चल रही हैं, जब तक कि संबंधित कंपनी (कंसेशनायर) इन्हें अपनाने की सहमति न दे।
सरकार ने शुल्क गणना को स्पष्ट करने के लिए उदाहरण भी दिए हैं, ताकि अलग-अलग वाहनों के लिए ओवरलोड फीस कैसे तय होगी, यह समझना आसान हो सके।
सरकार का मानना है कि इन नए नियमों से ओवरलोडिंग कम होगी, सड़कों को नुकसान कम पहुंचेगा और माल ढुलाई अधिक सुरक्षित और सुचारु तरीके से हो सकेगी।
इसके साथ ही, डब्ल्यूआईएम (वेट-इन-मोशन) तकनीक के जरिए वाहनों का वजन चलते-फिरते ही मापा जा सकेगा, जिससे प्रक्रिया और भी आसान और पारदर्शी बनेगी।
--आईएएनएस
डीबीपी
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