बिहार की राजनीति के दिग्गज नेता नीतीश कुमार ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे 20 साल के उस युग का अंत हो गया। उनके इस्तीफे के बाद, सबकी निगाहें इस बात पर होंगी कि नीतीश कुमार का उत्तराधिकारी कौन होगा, जो निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं और राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ले चुके हैं। राजनीतिक दल-बदल के लिए जाने जाने वाले 75 वर्षीय जेडीयू प्रमुख, जिनकी पार्टी भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा है। उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन को लोक भवन में सौंपा। यह इस्तीफा एनडीए की बिहार विधानसभा चुनावों में जेडीयू के दमदार प्रदर्शन के दम पर मिली शानदार जीत के पांच महीने बाद आया है। इससे पहले दिन में नीतीश कुमार ने अपने इस्तीफे से पहले अपनी कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की, जिससे राज्य में पहली बार भाजपा सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है।
अपने इस्तीफे के बाद एक ट्वीट में नीतीश कुमार ने कहा कि उनकी सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली जैसे सभी क्षेत्रों में समाज के हर वर्ग के लिए काम किया, जिसमें महिलाओं और युवाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने कहा कि नई सरकार इन जिम्मेदारियों को आगे बढ़ाएगी और उसे उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि हमने 24 नवंबर, 2005 को पहली बार राज्य में एनडीए सरकार बनाई थी। तब से कानून का शासन दृढ़ता से स्थापित है और हम विकास के प्रति निरंतर प्रतिबद्ध रहे हैं। शुरुआत से ही हमारी सरकार ने समाज के हर वर्ग हिंदू, मुस्लिम, उच्च जाति, पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग, दलित और महादलित के लिए काम किया है। उन्होंने आगे कहा कि अगले पांच वर्षों, 2025 से 2030 तक, के लिए हमने '7 निश्चय-3' ढांचा तैयार किया है, जो और भी अधिक प्रगति को गति देगा और बिहार को आगे ले जाएगा। केंद्र ने बिहार के विकास में पूरा सहयोग दिया है और इसके लिए हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।
नीतीश कुमार ने यह भी कहा कि बिहार तेजी से विकास करता रहेगा और देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होकर राष्ट्रीय प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देगा। उन्होंने आगे कहा कि हमने बिहार की जनता के लिए व्यापक रूप से काम किया है और लंबे समय तक समर्पण भाव से उनकी सेवा की है। हमने यह निर्णय लिया था कि अब मेरे लिए मुख्यमंत्री पद से हटने का समय आ गया है। उन्होंने कहा नई सरकार अब जिम्मेदारियों को आगे बढ़ाएगी और उसे मेरा पूरा सहयोग और मार्गदर्शन प्राप्त होगा। मुझे विश्वास है कि राज्य सार्थक प्रगति करता रहेगा और विकास के पथ पर आगे बढ़ता रहेगा।
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बिहार की राजनीति में आज सबसे बड़ी हलचल देखने को मिल रही है, जहां भाजपा पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनाने की तैयारी में है। यह बड़ा राजनीतिक बदलाव वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद शुरू हुआ है, जो अब राज्यसभा जाने वाले हैं। इस बीच, नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगता दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक, निशांत कुमार न तो बिहार मंत्रिमंडल का हिस्सा होंगे और न ही उन्हें डिप्टी सीएम बनाया जाएगा।
निशांत कुमार के मंत्रिमंडल में शामिल होने पर सस्पेंस खत्म
पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर थी कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को सूबे का नया डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। हालांकि, अब सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि वह सरकार में कोई आधिकारिक पद नहीं संभालेंगे। इससे पहले 8 मार्च को जब निशांत ने जेडीयू ज्वाइन की थी, तब से ही उनके सक्रिय राजनीति में बड़े रोल को लेकर कयास लगाए जा रहे थे।
कौन हैं निशांत कुमार?
1980 में जन्मे निशांत कुमार स्वभाव से अत्यंत संकोची और सरल व्यक्ति माने जाते हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई पटना के सेंट कैरेंस स्कूल और फिर मसूरी के मानव भारती स्कूल से की। स्वास्थ्य कारणों से पटना लौटने के बाद उन्होंने केंद्रीय विद्यालय से शिक्षा पूरी की और बाद में इंजीनियरिंग में स्नातक किया। वह हमेशा से सुर्खियों से दूर रहना पसंद करते रहे हैं।
जेडीयू में निशांत की एंट्री
निशांत कुमार को हाल ही में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की मौजूदगी में पार्टी में शामिल किया गया था। पार्टी में शामिल होने के दौरान निशांत ने अपने पिता के राज्यसभा जाने के फैसले को उनका निजी निर्णय बताया था। उन्होंने कहा था कि वह संगठन को मजबूत करने के लिए काम करेंगे और अपने पिता के मार्गदर्शन में आगे बढ़ेंगे।
बिहार का नया सियासी समीकरण
नीतीश कुमार द्वारा राजभवन जाकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद अब भाजपा के नए सीएम के नाम का इंतजार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व जल्द ही किसी चौंकाने वाले नाम का ऐलान कर सकता है। राज्य में पहली बार भाजपा की अगुवाई वाली सरकार को लेकर कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
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