BIS बढ़ाएगा Silver Jewellery की जांच क्षमता, दो वर्षों में होगा लैब का विस्तार
नयी दिल्ली, नौ अगस्त सोने की कीमतों में तेज उछाल के बीच चांदी के आभूषणों की बढ़ती मांग को देखते हुए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने उनकी (चांदी के आभूषणों की) जांच क्षमता बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। बीआईएस अगले दो साल में देशभर में चांदी के आभूषणों की जांच के लिए ‘संदर्भ’ और ‘परीक्षण’ प्रयोगशालाओं का विस्तार करेगा। बीआईएस की उप महानिदेशक (प्रयोगशाला) निशात एस हक ने पीटीआई-को बताया कि चांदी के आभूषणों की जांच की बढ़ती जरूरत को देखते हुए संगठन ने अपनी तैयारियों का आकलन कर लिया है और अब अपनी प्रयोगशालाओं में बड़े पैमाने पर जांच के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि अगले करीब दो साल तक बीआईएस अपनी मौजूदा प्रयोगशालाओं के जरिये बढ़ी हुई जरूरत को पूरा करने में सक्षम होगा। इस अवधि के दौरान देशभर में संदर्भ और परीक्षण प्रयोगशालाओं का विस्तार किया जाएगा। चांदी की हॉलमार्किंग वर्ष, 2005 से स्वैच्छिक है।
सितंबर, 2025 से हॉलमार्क वाले चांदी के आभूषणों पर हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन (एचयूआईडी) नंबर भी दिया जा रहा है, जिससे उपभोक्ता आभूषण की शुद्धता की जांच कर सकते हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में हॉलमार्क किए गए चांदी के आभूषणों की संख्या बढ़कर 59 लाख हो गई, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 32 लाख थी। फिलहाल देशभर में करीब 230 संदर्भ और परीक्षण केंद्र बीआईएस से मान्यता प्राप्त हैं जो चांदी के आभूषणों की जांच करते हैं।
हक ने कहा कि हॉलमार्क वाले सोने के आभूषणों की बाजार निगरानी के तहत होने वाली सभी जांच बीआईएस अपनी प्रयोगशालाओं में ही करता है। इस काम को बाहरी प्रयोगशालाओं को नहीं सौंपा जाता। उन्होंने कहा कि हॉलमार्क वाले आभूषणों की बाजार निगरानी के लिए बीआईएस ने अपनी प्रयोगशाला व्यवस्था के भीतर ही संदर्भ (रेफरल) और परीक्षण (एसे) प्रयोगशाला स्थापित की है।
बीआईएस ने पिछले वर्ष करीब 2.70 लाख उत्पाद नमूनों की जांच की। संगठन के पास फिलहाल देशभर में अपनी 10 प्रयोगशालाएं हैं, जबकि मान्यता प्राप्त निजी और सूचीबद्ध सरकारी प्रयोगशालाओं का व्यापक नेटवर्क भी उसके साथ जुड़ा है। हक के अनुसार, वर्ष 2014 में बीआईएस के साथ करीब 147 मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं और 24 सूचीबद्ध सरकारी प्रयोगशालाएं थीं।
अब इनकी संख्या क्रमश: 440 और 350 हो गई है। बीआईएस ने कुल करीब 23,000 मानक निर्धारित किए हैं, जिनमें लगभग 700 अनिवार्य हैं। बीआईएस जांच की गति बढ़ाने, पारदर्शिता सुधारने और मानवीय त्रुटियों को कम करने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई), मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स का इस्तेमाल भी बढ़ाने पर काम कर रहा है।
हक ने बताया कि इस वर्ष सीमेंट की जांच के लिए ‘पिक एंड प्लेस’ रोबोटिक इकाई का परीक्षण किया जा रहा है। इसके परिणामों के आधार पर अन्य प्रयोगशालाओं में भी रोबोटिक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
RC Bhargava ने आर्थिक सुधार तेज करने का किया आह्वान, Maruti Suzuki ने बायोगैस में बढ़ाया निवेश
नयी दिल्ली, नौ अगस्त मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) के चेयरमैन आर सी भार्गव ने केंद्र और राज्य सरकारों से आर्थिक सुधारों की रफ्तार तेज करने तथा कारोबार सुगमता की स्थिति बेहतर करने के प्रयास बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से ऐसे सुधारों और कार्यक्रमों का समर्थन करने को कहा है, जो देश में संपत्ति और रोजगार के नए अवसर पैदा करते हैं। कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में शेयरधारकों को दिए संदेश में भार्गव ने कहा कि सरकार और विपक्ष को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सुधारों से पैदा होने वाले अतिरिक्त संसाधनों का इस्तेमाल अधिक न्यायपूर्ण और समान समाज के निर्माण में किया जाए।
भार्गव के अनुसार, माल एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों के बाद देश के वाहन उद्योग की वृद्धि की संभावनाएं बेहतर हुई हैं। मारुति का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2030-31 तक भारत का कार बाजार 61 लाख से 63 लाख इकाई सालाना तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में छोटी कारों की मांग पिछले पांच साल की तुलना में कहीं अधिक तेजी से बढ़ सकती है।
उन्होंने बताया कि 22 सितंबर, 2025 से नई जीएसटी दरें लागू होने के बाद वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में मारुति सुजुकी की खुदरा बिक्री में 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मार्च, 2026 के अंत में कंपनी के पास करीब 1.9 लाख लंबित बुकिंग थीं। इसका प्रमुख कारण मांग वाले मॉडल के लिए उत्पादन क्षमता का पर्याप्त नहीं होना था।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी की बिक्री 38 प्रतिशत बढ़ी, जबकि पूरे उद्योग की वृद्धि 28 प्रतिशत रही। इसी अवधि में छोटी कारों की बिक्री में 35 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। भार्गव ने कहा कि कंपनी अब अपनी नई उत्पादन लाइन को अधिक लचीला बना रही है, ताकि मांग के अनुसार इसमें बदलाव किया जा सके।
इससे बाजार में मांग बढ़ने पर कंपनी तेजी से उत्पादन बढ़ा सकेगी। स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र पर भार्गव ने कहा कि भारत को शुद्ध शून्य उत्सर्जन लक्ष्य हासिल करने के लिए किसी एक प्रौद्योगिकी पर निर्भर रहने के बजाय कई प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल करना होगा। उन्होंने बायोगैस को महत्वपूर्ण विकल्प बताते हुए कहा कि इसे स्थानीय संसाधनों से बड़े पैमाने पर तैयार किया जा सकता है।
इससे आयातित सीएनजी पर निर्भरता कम होगी और स्वच्छ एवं नवीकरणीय ईंधन उपलब्ध कराया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि बायोगैस उत्पादन से जैविक खाद जैसे उपयोगी उप-उत्पाद भी मिलेंगे। इससे मिट्टी की गुणवत्ता और कृषि उत्पादकता में सुधार हो सकता है।
साथ ही पराली जलाने की समस्या कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण को बढ़ावा देने में भी मदद मिल सकती है। मारुति सुजुकी पिछले दो साल से भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), पूसा के साथ इस दिशा में काम कर रही है। कंपनी के निदेशक मंडल ने पहले चरण में चार बायोगैस संयंत्र स्थापित करने के लिए 561 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है।
भार्गव ने कहा कि इन संयंत्रों से प्राप्त अनुभव के आधार पर कंपनी भविष्य में बायोगैस के उत्पादन और वितरण में बड़े पैमाने पर निवेश करने की योजना बना सकती है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi










