Jharkhand News: नक्सलियों के गढ़ में अब पहुंचेगी बिजली और सड़क, बूढ़े पहाड़ पर विकास की बड़ी तैयारी
Jharkhand News: अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाने वाला झारखंड के गढ़वा जिले की अब काया पलटने वाली है. सोरेन सरकार ने इस क्षेत्र की पहचान बदलने का पक्का इरादा कर लिया है. कभी यहां का बूढ़ा पहाड़ इलाका लंबे समय तक नक्सलियों का अभेद्य किला बना रहा. दशकों तक यहां विकास की किरण नहीं पहुंच पाई और लोग डर के साये में जीने को मजबूर थे. झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इस दुर्गम इलाके को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कमर कस ली है. उन्होंने साफ कर दिया है कि अब बूढ़ा पहाड़ के लोगों को उपेक्षा और अभाव में नहीं रहने दिया जाएगा.
वित्त मंत्री के दिखे सख्त तेवर
सोमवार को गढ़वा समाहरणालय में आयोजित एक अहम बैठक में मंत्री का सख्त तेवर देखने को मिला. उन्होंने जिले के तमाम आला अधिकारियों के साथ एक-एक कर विकास योजनाओं की समीक्षा की. इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु बूढ़ा पहाड़ और उसके आसपास के गांवों का विकास था. मंत्री ने दोटूक शब्दों में कहा कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी अब स्वीकार नहीं की जाएगी. बैठक में उपायुक्त से लेकर वन विभाग और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद रहे, जिन्हें अपनी कार्यशैली सुधारने की हिदायत दी गई.
धरातल पर उतरेगी विकास की योजनाएं
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने यह कड़ा रुख अपने हालिया दौरे के बाद अपनाया है. बीते 3 अप्रैल को उन्होंने खुद दुर्गम रास्तों को पार करते हुए बूढ़ा पहाड़ का दौरा किया था. वहां उन्होंने देखा कि कैसे लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं. ग्रामीणों ने उन्हें बताया था कि सड़क और बिजली न होने से उनका जीवन कितना कठिन है. इन्हीं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मंत्री ने अधिकारियों की क्लास लगाई. उन्होंने कहा कि कागजी आंकड़ों से काम नहीं चलेगा, अब जमीन पर बदलाव दिखना चाहिए.
खराब रास्ते हैं सबसे बड़ी रुकावट
बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र के विकास में सबसे बड़ी रुकावट खराब रास्ते रहे हैं. इस बाधा को दूर करने के लिए मंत्री ने कुसुम्बा से बूढ़ा पहाड़ तक पक्की सड़क बनाने का काम प्राथमिकता पर रखने को कहा है. उनका मानना है कि जब तक गांव तक गाड़ी नहीं पहुंचेगी, तब तक वहां अस्पताल और स्कूल की कल्पना करना बेकार है. सड़क बनने से जहां एक तरफ लोगों का आना-जाना आसान होगा, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा बल भी अपनी पैठ मजबूत कर सकेंगे. इससे नक्सलियों की बची-खुची गतिविधियों पर भी पूरी तरह से लगाम लग सकेगी.
अंधेरे से गांव को मिलेगी मुक्ति
सड़क के बाद सबसे बड़ा मुद्दा बिजली का है. मंत्री ने बैठक में बिजली विभाग के इंजीनियरों से उन गांवों की सूची मांगी है, जो आज भी अंधेरे में डूबे हुए हैं. उन्होंने आदेश दिया कि चाहे पहाड़ हो या गहरी घाटी, हर घर में बिजली का बल्ब जलना चाहिए. रोशनी होने से न केवल ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार आएगा, बल्कि उनके बच्चों को रात में पढ़ाई करने में भी सुविधा होगी. सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले कुछ समय में बूढ़ा पहाड़ का कोई भी कोना अंधेरे में न रहे.
शिक्षा क्षेत्र में भी उठाया बड़ा कदम
शिक्षा के क्षेत्र में भी एक बड़ा कदम उठाते हुए मंत्री ने हेसातू मध्य विद्यालय को हाई स्कूल में अपग्रेड करने का प्रस्ताव मांगा है. अब तक यहां के बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए मीलों दूर शहर जाना पड़ता था, जिसके कारण कई बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते थे. स्कूल अपग्रेड होने से स्थानीय स्तर पर ही उच्च शिक्षा मिल सकेगी. इसके साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के लिए कुल्ही में एक नया स्वास्थ्य उपकेंद्र बनाने का फैसला लिया गया है. इससे छोटी-मोटी बीमारियों के इलाज के लिए ग्रामीणों को अब भटकना नहीं पड़ेगा.
अधिकारियों को दी अंतिम चेतावनी
बैठक के अंत में वित्त मंत्री ने अधिकारियों को एक तरह से आखिरी चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन का असली मकसद समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचना है. उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि विकास के कामों में अगर कोई तकनीकी अड़चन आती है, तो उसे आपस में तालमेल बिठाकर तुरंत दूर करें. वन विभाग को विकास के रास्ते में रोड़ा नहीं बल्कि मददगार बनना चाहिए.
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने क्षेत्र की समस्याओं को मजबूती से रखा
इस बैठक में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी अपने क्षेत्र की समस्याओं को मजबूती से रखा. बड़गड़ के बीडीओ, सीओ और टेहरी पंचायत की मुखिया बींकू टोप्पो ने मंत्री को बताया कि कहां-कहां काम अटके हुए हैं. अब जब सरकार ने इस इलाके की सुध ली है, तो ग्रामीणों में एक नई उम्मीद जागी है. अगर ये योजनाएं समय पर पूरी होती हैं, तो वह दिन दूर नहीं जब बूढ़ा पहाड़ अपनी पुरानी कड़वी यादों को भुलाकर खुशहाली और पर्यटन की नई इबारत लिखेगा. प्रशासन की यह सक्रियता संकेत है कि अब इस क्षेत्र में गोलियों की आवाज नहीं, बल्कि विकास के पहियों की गूंज सुनाई देगी.
ट्रंप का दावा: होर्मुज स्ट्रेट से 34 जहाज गुजरे, बंदी के बाद सबसे ज्यादा संख्या
नई दिल्ली, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से कल 34 जहाज गुजरे, जो बंदी की शुरुआत के बाद से अब तक की सबसे ज्यादा संख्या है।
ट्रंप ने सोमवार को ट्रुथ सोशल पर कहा, कल होर्मुज स्ट्रेट से 34 जहाज गुजरे, जो इस बंदी की शुरुआत के बाद से अब तक की सबसे ज्यादा संख्या है।
सोमवार को ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समुद्री नाकाबंदी शुरू करने की जानकारी देते हुए ईरानी जहाज को तबाह करने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि उसी किल सिस्टम का प्रयोग किया जाएगा, जो ड्रग तस्करों के खिलाफ किया जाता है।
ट्रंप ने फिर दोहराया, ईरान की नेवी समुद्र की गर्त में जा चुकी है और पूरी तरह तबाह-बर्बाद हो चुकी है। हमने उसके 158 जहाज तबाह कर दिए। कुछ को छोड़ दिया जिन्हें वे फास्ट अटैक शिप कहते हैं, क्योंकि हमारा मानना है कि उससे हमें कोई खतरा नहीं है।
इसके साथ ही ट्रंप ने चेतावनी देते हुए लिखा कि अगर इनमें से कोई भी जहाज हमारी नाकाबंदी के पास भी आया तो उन्हें तुरंत खत्म कर दिया जाएगा, उसी किल सिस्टम का इस्तेमाल करके जो हम समुद्र में नावों पर ड्रग डीलरों के खिलाफ करते हैं।
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से ईरान पर लगाई गई समुद्री नाकाबंदी शुरू हो गई है। यह फैसला सोमवार शाम 7:30 बजे (अमेरिकी समय के समयानुसार सुबह 10:00 बजे) से लागू हो गया।
ट्रंप ने पिछली पोस्ट्स में ही कह दिया था कि फैसले के तहत जो भी जहाज होर्मुज से गुजरने की कोशिश करेगा, उसे रोककर जांच की जाएगी। खास तौर पर उन जहाजों पर नजर रखी जाएगी, जो ईरान को टोल देते हैं। जो जहाज ईरान को गैरकानूनी टोल देंगे, उन्हें सुरक्षित रास्ता नहीं दिया जाएगा। ट्रंप के अनुसार, इससे ईरान की आर्थिक ताकत कम की जाएगी।
यूएस सेंट्रल कमांड (सीईएनटीसीओएम) ने यह कदम राष्ट्रपति के आदेश के बाद उठाया है और यह ईरानी पोर्ट्स में आने-जाने वाले सभी समुद्री ट्रैफिक को टारगेट करेगा, जिसमें अरब की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के किनारे के पोर्ट्स भी शामिल हैं।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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