बीएसपी सुप्रीमो मायावती का आरक्षण को लेकर बड़ा बयान, कहा- SC-ST समाज के लिए ये बेहद जरूरी
Mayawati on Reservation: बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया है. इसके साथ ही उन्होंने आरक्षण के मुद्दे पर राजनीति न करने की अपील भी की. बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में कहा कि आरक्षण को खत्म करने की कोशिश बाबा साहब अंबेडकर के उद्देश्यों के खिलाफ है.
1.देश में ’बहुजन समाज’ में से ख़ासकर एससी, एसटी व ओबीसी वर्गों के लिये आरक्षण ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ अर्थात् हमेशा से इनके आत्म-सम्मान की ज़िन्दगी से जुड़ा अति-महत्वपूर्ण व अत्यन्त संवेदनशील मामला है और जाति के आधार पर सदियों से यहाँ तोड़े, सताये व पछाड़े गये एससी व…
— Mayawati (@Mayawati) August 9, 2026
पेट और हिप की चर्बी को कहें अलविदा, उष्ट्रासन से शरीर बनेगा ज्यादा लचीला और मजबूत
नई दिल्ली, 9 अगस्त (आईएएनएस)। योग सिर्फ शरीर को फिट रखने का तरीका नहीं, बल्कि पूरे शरीर और मन को संतुलित रखने की एक बेहतरीन प्रक्रिया है। अगर आप कमर और गर्दन के दर्द, पेट और हिप की चर्बी से परेशान रहते हैं या शरीर में लचीलापन बढ़ाना चाहते हैं, तो उष्ट्रासन (कैमल पोज) को अपनी योग रूटीन में शामिल कर सकते हैं।
आयुष मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि उष्ट्रासन करने के लिए सबसे पहले वज्रासन में बैठें। इसके बाद घुटनों और पैरों के बीच थोड़ा अंतर रखते हुए घुटनों के बल खड़े हो जाएं। धीरे-धीरे सांस लेते हुए शरीर को पीछे की ओर झुकाएं और दोनों हाथों को अपनी एड़ियों पर रखें। इस दौरान गर्दन को अचानक या झटके से पीछे न ले जाएं। अंतिम स्थिति में जांघें जमीन के लगभग सीधी रहती हैं और शरीर का वजन हाथों व पैरों पर संतुलित रहता है। इस मुद्रा में 10 से 30 सेकंड तक सामान्य सांस लेते हुए रुक सकते हैं।
उष्ट्रासन शरीर की लचक बढ़ाने में मदद कर सकता है। खासकर कमर, कंधों और गर्दन में जकड़न महसूस करने वालों के लिए यह उपयोगी योगासन माना जाता है। शरीर को पीछे की ओर मोड़ने से पेट और हिप्स के आसपास की मांसपेशियों में खिंचाव आता है, जिससे इस हिस्से चर्बी कम होने में मदद मलती है। हालांकि सिर्फ एक योगासन से चर्बी कम होने की गारंटी नहीं है। इसके लिए संतुलित खान-पान और नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है।
यह आसन पाचन तंत्र को सक्रिय रखने में भी मददगार हो सकता है। साथ ही, छाती को फैलाने वाली इस मुद्रा से सांस लेने की क्षमता और शरीर की ऊर्जा पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। नियमित योगाभ्यास के साथ इसका अभ्यास शरीर को मजबूत और ज्यादा लचीला बनाने में सहायक हो सकता है।
हालांकि, उष्ट्रासन करते समय सावधानी बहुत जरूरी है। दिल से जुड़ी समस्याओं या हर्निया से पीड़ित लोगों को बिना विशेषज्ञ की सलाह के यह आसन नहीं करना चाहिए।
--आईएएनएस
पीआईएम/वीसी
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